
दरअसल, सोमवार से जीएसटी की दरों में बदलाव किया गया है। इसके तहत नॉन ब्रांडेड आटा, चावल, दही, लस्सी, छांछ, पनीर, गुड़, खांडसारी और गेहूं महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने इन वस्तुओं पर पांच फीसदी जीएसटी लगा दिया है। मजेदार बात है कि सरकार गरीबों के रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं पर पांच फीसदी जीएसटी वसूल कर ही है। जबकि देश में सोने पर 03 फीसदी और हीरे पर डेढ़ प्रतिशत जीएसटी की विशेष दर वसूल की जाती है। दरअसल, आम लोगों को इन तथ्यों की जानकारी नहीं हो पाती है कि रोजमर्रा की जिन वस्तुओं को वे खरीद रहे हैं, उस पर कितना टैक्स दे रहे हैं। राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जयंत चौधरी का कहना है कि नॉन ब्रांडेड खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी लगाने से गरीबों पर आर्थिक मार पड़ेगी। सरकार के इस फैसले पर तंज कसते हुए जयंत चौधरी ने यह ट्वीट किया है, लेकिन इस कोई असर सरकार पर होगा, कहना मुश्किल है।