Political News : राज्य मिलकर तय करें मानगढ़ के विकास की रूपरेखा : मोदी
Madhya Pradesh, Rajasthan, Gujarat and Maharashtra should decide together the roadmap for the development of Mangarh: Modi
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:54 AM
लगभग 10 साल बाद 1500 आदिवासियों की शहीद स्थली मानगढ़ धाम पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने जमकर चुनावी निशाना साधा। गुजरात विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उन्होंने आदिवासियों को लुभाने की भरपूर कोशिश की। इस सभा में गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित करने के पीछे का मकसद भांपकर सीएम अशोक गहलोत ने भी पूरी तैयारी कर ली थी। पीएम मोदी ने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से पहले आदिवासी समाज ने आजादी का बिगुल फूंका था। हम आदिवासी समाज के योगदानों के कर्जदार हैं। भारत के चरित्र को सहेजने वाला आदिवासी समाज ही है। हालांकि उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्मारक बनाने की घोषणा नहीं की। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद स्मारक का दौरा कर आदिवासियों को श्रृद्धांजलि दी।
पीएम मोदी ने कहा कि मानगढ़ धाम को भव्य बनाने की इच्छा सबकी है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र आपस में चर्चा कर एक विस्तृत प्लान तैयार कर मानगढ़ धाम के विकास की रूपरेखा तैयार करें। चार राज्य और भारत सरकार मिलकर इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। नाम भले ही राष्ट्रीय स्मारक या कोई और नाम दे देंगे।
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कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि सीएम के नाते हमने साथ-साथ काम किया। अशोक गहलोत हमारी जमात में सबसे सीनियर थे। अभी भी जो हम मंच पर बैठे हैं, उनमें अशोक गहलोत सबसे सीनियर सीएम हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मानगढ़ धाम के इतिहास को स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। हमने पीएम से अपील की है कि इसे राष्ट्रीय स्मारक बनाया जाए। आदिवासी समाज आजादी की जंग लड़ने के मामले में किसी से पीछे नहीं था। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया में सम्मान महात्मा गांधी के कारण मिलता है। हमारी अपील है कि मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करें। सीएम गहलोत ने कहा कि राजस्थान की चिरंजीवी योजना को एग्जामिन कराएंगे तो यह पूरे देश में लागू हो सकती है। गहलोत ने कहा कि कुछ दिनों पहले आपने मानगढ़ को लेकर अलग-अलग प्रदेशों के बारे में जानकारी ली है। इसके मायने होते हैं। मैं उम्मीद करता हूं मानगढ़ को आप राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देंगे। गहलोत ने बांसवाड़ा को रेल मार्ग से जोड़ने की मांग की।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि 17 नवंबर 1913 का काला दिन कोई नहीं भूल सकता। आदिवासियों को विकास की मुख्य धारा में लाने का प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश को आजादी चांदी की तश्तरी में रखकर नहीं मिली है। आदिवासियों के बलिदान को भुला दिया गया था, लेकिन मोदी सरकार ने उन्हें नमन करने का अभियान चलाया है।
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यह कार्यक्रम इन तीनों राज्यों की 99 विधानसभा सीटों (आदिवासी बहुल) तक सिमटा हुआ रहने वाला है। मानगढ़ एक ऐसा स्थान है, जहां गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमाएं आकर मिलती हैं। इन राज्यों के आदिवासियों की यहां बहुत श्रद्धा है। इससे भी बढ़कर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक में बहुत बड़ी संख्या में रहने वाली आदिवासी समाज की आबादी करीब 8-10 करोड़ है।
गौरतलब है कि गुजरात में एक महीने बाद चुनाव हैं। एक-दो साल में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ कर्नाटक, तेलंगाना के विधानसभा और देश के लोकसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में विधानसभा की 200 और लोकसभा की लगभग 50 सीटें ऐसी हैं, जो सीधे तौर पर आदिवासी बहुल हैं। इनके अलावा इन सभी राज्यों में 50-60 प्रतिशत सीटें ऐसी हैं, जहां आदिवासी मतदाताओं की अच्छी-खासी उपस्थिति है।
मानगढ़ धाम बांसवाड़ा जिले में है। यह एक पहाड़ी पर बना हुआ है। पहाड़ी का एक हिस्सा गुजरात में और एक हिस्सा राजस्थान में शामिल है। इस पहाड़ी क्षेत्र में गोविंद गुरु नामक आदिवासी नेता ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता का आंदोलन चला रहे थे। तब 1913 में इसी धाम पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें और उनके आदिवासी साथियों को घेर लिया था। यहां अंग्रेजों ने 1500 आदिवासियों का सामूहिक नरसंहार किया था। उन्हीं की याद में मानगढ़ धाम बना हुआ है। मोदी जब 10 साल पहले गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वह मानगढ़ आए थे। उन्होंने तब गुजरात के हिस्से में मानगढ़ तक पहुंचने की सड़कों को शानदार करवाया था, ताकि पर्यटक आसानी से यहां तक पहुंच सकें। इस धाम तक पहुंचने की पहली पक्की सड़क मोदी ने ही बनवाई थी। उसके बाद गुजरात वाले हिस्से में वे लगातार विकास करवाते रहे। अब भाजपा इसके इतिहास पर एक किताब भी छपवा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के साहित्य में भी इसे बहुत महत्व दिया जाता है। आदिवासी समाज परम्परागत रूप से गुजरात में भाजपा का वोट बैंक माना जाता है।