
5 अगस्त को लेकर मोदी सरकार की राजनीतिक रणनीति पहले ही स्पष्ट हो चुकी है—यह दिन "निर्णय और नीतिगत साहस" का पर्याय बन गया है। 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया। अगले ही वर्ष, 2020 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई। दोनों ही फैसले भाजपा और RSS के कोर एजेंडे का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में इस वर्ष की 5 अगस्त को लेकर भी जनमानस और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें केंद्र सरकार के कदम पर टिकी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से एक गोपनीय भेंट की। न तो राष्ट्रपति भवन और न ही पीएमओ की ओर से इस बैठक की कोई आधिकारिक जानकारी दी गई, लेकिन दोनों नेताओं के कद और समय की संवेदनशीलता को देखते हुए यह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात मानी जाए—यह सोचना राजनीतिक मासूमियत होगी। यह भेंट ऐसे समय हुई जब संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है, उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और कई संवेदनशील विधेयकों की चर्चा चल रही है।
जम्मू-कश्मीर के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम इस ओर इशारा कर रहे हैं कि सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठा सकती है। उमर अब्दुल्ला की केवड़िया यात्रा और गृहमंत्री शाह से शिया नेता इमरान रजा अंसारी की मुलाकातों को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। गृह मंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि "समय आने पर" जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा मिलेगा। पांच अगस्त 2019 को जब अनुच्छेद 370 हटाया गया, उसी दिन अगर छह साल बाद राज्य की बहाली होती है, तो यह एक प्रतीकात्मक और रणनीतिक संदेश होगा—खासकर आगामी लोकसभा चुनाव से पहले।
भाजपा और संघ के कोर एजेंडों में बचा हुआ बड़ा मुद्दा अब यूनिफॉर्म सिविल कोड है। उत्तराखंड में इसे लागू किया जा चुका है, जबकि असम और गुजरात में इसकी तैयारी है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या अब केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की ओर बढ़ रही है ? संविधान की धारा 44 का उल्लेख करते हुए सरकार पहले ही कह चुकी है कि समान नागरिक संहिता पर गंभीरता से विचार हो रहा है। 5 अगस्त जैसी प्रतीकात्मक तारीख को इसे विधायी स्वरूप देना राजनीतिक रूप से भी भाजपा के लिए निर्णायक बढ़त बन सकता है।
उपराष्ट्रपति पद के लिए अधिसूचना 7 अगस्त को जारी होने वाली है। इससे पहले प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का राष्ट्रपति से मिलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नई नियुक्ति को लेकर अंतिम मुहर लगाई जा सकती है। सवाल यह भी है कि क्या मोदी सरकार किसी सहयोगी दल को यह पद सौंपेगी या भाजपा से जुड़े किसी वरिष्ठ नेता को यह दायित्व मिलेगा?
‘एक देश, एक चुनाव’ का विचार वर्षों से चर्चा में है और संबंधित विधेयक पहले ही संसद में पेश किया जा चुका है। यह मुद्दा न केवल चुनावी खर्च और प्रशासनिक दक्षता से जुड़ा है, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच चुनावी तालमेल का भी सवाल है। क्या 5 अगस्त को इस दिशा में सरकार कोई बड़ा ऐलान करने जा रही है?
बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सत्ता के बीच टकराव जारी है। चर्चा है कि केंद्र सरकार इस प्रक्रिया को पूरे देश में लागू करने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह नागरिकता सत्यापन की दिशा में एक बड़ा कदम होगा और NRC जैसे मुद्दों से भी जुड़ सकता है। 5 August 2025