नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के लिए सोमवार का दिन बेहद खास है। आज पहली बार कांग्रेस के बुलावे पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भी शामिल हुई। इससे विपक्षी एकता की तस्वीर पर जमी धूल काफी हद तक साफ होने लगी है। सोमवार को कांग्रेस के प्रदर्शन में दूसरे दलों के साथ शामिल होकर टीएमसी ने विपक्षी एका का संदेश दे दिया।
संसद परिसर में धरने के बाद निकाला पैदल मार्च
कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहराने और अडाणी समूह से जुड़े मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस और कुछ अन्य सहयोगी दलों के सांसदों ने राहुल पर कार्रवाई के विरोध में काले कपड़े पहन रखे थे। विपक्षी नेताओं ने पहले संसद भवन परिसर में धरना दिया और फिर विजय चौक तक मार्च निकाला।
संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरने में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस के कई सांसद, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के टीआर बालू, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एनके प्रेमचंद्रन और कुछ अन्य नेता शामिल हुए। कांग्रेस के सभी सांसद, द्रमुक के बालू, आरएसपी के प्रेमचंद्रन और कुछ अन्य विपक्षी सांसद भी काले कपड़े पहने हुए थे। धरने के बाद विपक्षी सांसदों ने विजय चौक तक मार्च निकाला। उन्होंने हाथों में एक बड़ा बैनर ले रखा था, जिस पर ‘सत्यमेव जयते’ लिखा हुआ था। विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। विपक्ष के मार्च में तृणमूल कांग्रेस के सांसद प्रसून बनर्जी भी शामिल हुए। उन्होंने 18 विपक्षी दलों की बैठक में भी भाग लिया था। तृणमूल कांग्रेस लंबे समय बाद कांग्रेस के बुलावे पर विपक्षी दलों की किसी बैठक और प्रदर्शन में शामिल हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने राहुल गांधी को अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए विपक्षी दलों का आभार जताया।
अडाणी मामले पर सवालों से डर गई सरकार
खरगे ने विजय चौक पर संवाददाताओं से कहा कि हम काले कपड़े पहनकर आए हैं, क्योंकि हम यह दिखाना चाहते हैं कि पीएम मोदी देश में लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं। पहले स्वायत्त संस्थाओं को खत्म किया गया और फिर डरा-धमकाकर हर जगह सरकारें बनाई गईं और फिर जो लोग झुकते नहीं हैं, उन्हें ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कर डराने धमकाने का प्रयास किया गया। खरगे ने दावा किया कि राहुल गांधी को अयोग्य ठहराया गया, क्योंकि सरकार अडाणी मामले पर उनके द्वारा उठाए गए सवालों से डर गई थी। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद उन्हें अपने लिए चुनौती मानने लगी थी। अडाणी को लेकर राहुल गांधी ने संसद में कुछ सवाल पूछे थे, जिनका जवाब नहीं मिला। सभी दल यही मांग कर रहे हैं कि अडाणी मामले पर जेपीसी बनाई जाए। अगर जेपीसी बनेगी तो सब चीजें बाहर आएंगी। सरकार जेपीसी से क्यों डर रही है? आपकी तो बहुमत की सरकार है।
खरगे यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि आप डर रहे हैं, क्योंकि दाल में कुछ काला है। जो लोग डरते हैं, वो कभी न कभी मरते भी हैं? मानहानि के मामले में दो साल की सजा सुनाई गई। यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लोकसभा अध्यक्ष को बोलकर राहुल गांधी को अयोग्य घोषित करवा दिया, ताकि वह अडाणी की बात सदन में नहीं कर सकें। राहुल गांधी को डराने के लिए यह है। राहुल गांधी नहीं डरेंगे। विपक्षी दल झुकेंगे नहीं, दबेंगे नहीं और डरेंगे नहीं। द्रमुक के टीआर बालू ने भी कहा कि राहुल गांधी को अयोग्य ठहराया जाना लोकतंत्र के लिए काला दिन है। इससे पहले, विपक्षी नेताओं ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की।
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