
Rahul Gandhi : देश की विदेश नीति एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर पर सीधा हमला बोलते हुए तीन बड़े सवाल उठाए और उन्हें 'जेजे' कहकर संबोधित किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर की गई इस टिप्पणी से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
राहुल गांधी ने विदेश मंत्री से जो तीन सवाल पूछे, वे सीधे तौर पर देश की विदेश नीति की दिशा और प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं:
भारत को पाकिस्तान के साथ क्यों जोड़ दिया गया है?
पाकिस्तान की आलोचना करने में कोई भी देश भारत के साथ क्यों नहीं खड़ा हुआ?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का सुझाव किसने दिया?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह से "ध्वस्त" हो चुकी है। साथ ही उन्होंने विदेश मंत्री को "नए युग का जयचंद" बताया, जो इतिहास में विश्वासघात के प्रतीक माने जाते हैं।
राहुल गांधी की इस पोस्ट पर विदेश मंत्रालय ने संक्षिप्त लेकिन सख्त प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही चरण में पाकिस्तान को चेतावनी दी गई थी और राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्य भ्रामक और गलत हैं।
एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने नागपुर में राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा, "जब पूरा देश एकजुट है, तब विपक्ष के नेता ऐसी बचकानी बातें कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को खुद पछताना पड़ रहा होगा कि उनके नेता ने ऐसा गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया।
यह कोई पहली बार नहीं है जब विदेश नीति राजनीतिक बहस का मुद्दा बनी हो, लेकिन इस बार जो बात इसे अलग बनाती है, वह है भारत-पाक संबंधों की संवेदनशीलता और सुरक्षा से जुड़ा माहौल। विपक्ष जहां सरकार की पारदर्शिता और रणनीति पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार और उसके सहयोगी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ बताकर विपक्ष को घेर रहे हैं। Rahul Gandhi