बिहार चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन में खटपट : कांग्रेस को झटका दे सकती है आरजेडी
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:25 AM
Politics in Bihar : बिहार की सियासत एक बार फिर गर्माने लगी है। विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने शेष हैं, ऐसे में विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के भीतर से असहमति की आवाजें तेज हो रही हैं। अब खबर आ रही है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) भी केंद्र सरकार द्वारा लाए गए संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 की जांच करने वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से अलग होने का मन बना रही है।
कांग्रेस के लिए मुश्किल हालात
अब तक तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SAPA), आम आदमी पार्टी (AAP) और शिवसेना (UBT) पहले ही जेपीसी से बाहर हो चुके हैं। अगर आरजेडी भी यह कदम उठाती है तो कांग्रेस के लिए सियासी तौर पर यह बड़ा झटका होगा। क्योंकि कांग्रेस शुरू से ही समिति में बने रहकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही थी। पार्टी का तर्क है कि समिति के भीतर रहकर ही विधेयक की कमियों और खामियों को उजागर किया जा सकता है। लेकिन सहयोगी दलों की बढ़ती नाराजगी के बीच अब कांग्रेस भी दबाव महसूस कर रही है। पार्टी के भीतर एक धड़ा चाहता है कि कांग्रेस भी इंडिया ब्लॉक की अन्य पार्टियों के साथ एकजुट दिखे, वरना गठबंधन की एकता पर सवाल उठेंगे।
राहुल-तेजस्वी की यात्रा और अलग-अलग रुख
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ राहुल गांधी और तेजस्वी यादव मिलकर बिहार में वोट अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं और जनता से सीधा जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजद का यह संभावित फैसला कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकता है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बिहार में जनता के बीच एकजुटता दिखाने वाली ये दोनों पार्टियां, दिल्ली की राजनीति में अलग-अलग रास्ता अपना सकती हैं।
क्या है विवादित 130वां संशोधन?
20 अगस्त को मानसून सत्र के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने यह विधेयक संसद में पेश किया। प्रावधानों के मुताबिक यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है और लगातार 30 दिन हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन उसे पद से हटना होगा। अनुपालन न करने की स्थिति में वह स्वत: पदमुक्त हो जाएगा। सरकार का दावा है कि यह विधेयक राजनीति को अपराधमुक्त करने और जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम है। लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से भी किया जा सकता है।
जेपीसी को मिली जिम्मेदारी
इस बिल को जांच के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया है, जिसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल हैं। समिति को संसद के शीतकालीन सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार चुनाव से ठीक पहले आरजेडी का जेपीसी से अलग होना कई संकेत देता है। एक तरफ यह कदम कांग्रेस को अलग-थलग करने की कोशिश हो सकता है, वहीं दूसरी तरफ गठबंधन के भीतर आंतरिक खींचतान को भी उजागर करता है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों के सामने अब दोहरी चुनौती
1. बिहार में तेजस्वी यादव के साथ तालमेल बनाए रखना।
2. दिल्ली में सहयोगी दलों के दबाव के बीच जेपीसी को लेकर अपने स्टैंड को तय करना।
बिहार चुनाव के लिए अभी बिगुल नहीं बजा है, लेकिन इंडिया ब्लॉक की राजनीति पहले ही दरारों से गुजरती नजर आ रही है। आने वाले हफ़्तों में यह तय होगा कि कांग्रेस अपने रुख पर कायम रहती है या साथियों के दबाव में झुककर जेपीसी से बाहर होने का फैसला करती है।