वेब सीरीज शूटिंग टीम पर बजरंग दल का तीखा विरोध

बजरंग दल के सौरभ मकरेया ने बताया कि सूचना मिलने पर जब कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तो वहां अंडे और चिकन की सब्जी मौजूद मिली। इसे देखकर कार्यकर्ता भड़क गए और उन्होंने टीम के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

Bajrang Dal demonstration
मंदिर में नॉनवेज खाने का आरोप, शूटिंग पर सवाल (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Mar 2026 02:26 PM
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Madhya Pradesh News : मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर नगर स्थित गिलावनी माता मंदिर परिसर में फिल्म मेकर टीम द्वारा कथित तौर पर नॉनवेज (अंडा और मांस) बनाने का मामला सामने आया है। इस घटना पर सोमवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताते हुए टीम के खिलाफ जमकर हंगामा किया। आरोप है कि शूटिंग टीम ने मंदिर की पवित्रता भंग करने के साथ हिंदू धर्म की आस्थाओं से खिलवाड़ किया।

मंदिर परिसर में मिला नॉनवेज का सामान

रिपोर्ट के अनुसार, नगर में पिछले तीन दिनों से 'फौजी' वेब सीरीज की शूटिंग चल रही है। फिल्म मेकर टीम गिलावनी माता मंदिर परिसर में ठहरी हुई थी, जहां हनुमान मंदिर भी स्थित है। सोमवार को बजरंग दल को सूचना मिली कि टीम को भोजन में अंडा और मांस परोसा जा रहा है। बजरंग दल के सौरभ मकरेया ने बताया कि सूचना मिलने पर जब कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे तो वहां अंडे और चिकन की सब्जी मौजूद मिली। इसे देखकर कार्यकर्ता भड़क गए और उन्होंने टीम के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

बजरंग दल की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कहा कि मंदिर परिसर में मांसाहारी भोजन बनाना न केवल मंदिर को अपवित्र करने वाला कृत्य है, बल्कि यह हिंदू धर्म की आस्थाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि शूटिंग टीम को तत्काल परिसर से नहीं हटाया गया तो बजरंग दल को उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

शूटिंग से रोजगार पर संकट

मंदिर परिसर में नॉनवेज विवाद के अलावा, शूटिंग टीम के कारण स्थानीय व्यापारियों का भी आक्रोश फूट पड़ा है। शूटिंग के लिए मेकर टीम ने पूरे बस स्टैंड परिसर को रस्सी बांधकर बंद कर दिया है। इससे परिसर में स्थित सब्जी, फल तथा अन्य दुकानदारों का व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया है। व्यापारियों का कहना है कि बंदिश के चलते उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

मेकर्स ने मांगी माफी

विरोध और बवाल के बाद मेकर्स टीम को अपनी गलती माननी पड़ी। मुंबई से आई टीम के एक सदस्य ने स्वीकार किया कि उन्होंने नॉनवेज मंगवाया था, लेकिन विरोध के बाद उन्होंने आश्वासन दिया कि अब मंदिर परिसर में दोबारा नॉनवेज नहीं परोसा जाएगा और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाएगा। Madhya Pradesh News

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Tata Tiago vs Maruti WagonR: बेस मॉडल की लड़ाई में कौन है आगे? जानें

टाटा टियागो का बेस मॉडल मारुति वैगनआर की तुलना में काफी किफायती साबित होता है। Tata Tiago इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 4.57 लाख रुपये से होती है, जो टॉप वेरिएंट में जाकर 7.82 लाख रुपये तक पहुंचती है। Maruti WagonR वहीं, वैगनआर की शुरुआती कीमत लगभग 4.98 लाख रुपये से शुरू होती है।

Tata Tiago vs Maruti WagonR
माइलेज की दौड़ में WagonR है अजेय (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Mar 2026 01:26 PM
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Tata Tiago vs Maruti WagonR : भारतीय ऑटो बाजार में सस्ती और बजट फ्रेंडली कारों की मांग हमेशा बनी रहती है। इसी सेगमेंट में टाटा मोटर्स का 'Tiago' और मारुति सुजुकी का 'WagonR' दो सबसे ज्यादा लोकप्रिय चेहरे हैं। अक्सर ग्राहक घबराहट के साथ इस सवाल का सामना करते हैं कि आखिर इन दोनों में किस कार का बेस मॉडल खरीदना सबसे फायदेमंद रहेगा। अगर आप भी इसी उलझन में हैं, तो हम यहां आपको कीमत, फीचर्स और माइलेज के आधार पर इन दोनों कारों का विस्तृत विश्लेषण करा रहे हैं।

कीमत के मामले में कौन है आगे?

बात अगर कीमत की हो, तो टाटा टियागो का बेस मॉडल मारुति वैगनआर की तुलना में काफी किफायती साबित होता है। Tata Tiago इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 4.57 लाख रुपये से होती है, जो टॉप वेरिएंट में जाकर 7.82 लाख रुपये तक पहुंचती है। Maruti WagonR वहीं, वैगनआर की शुरुआती कीमत लगभग 4.98 लाख रुपये से शुरू होती है, जो टॉप मॉडल में 6.94 लाख रुपये तक जाती है। स्पष्ट है कि जिन ग्राहकों का बजट सीमित है और वे एंट्री-लेवल हैचबैक की तलाश में हैं, उनके लिए टियागो एक बेहतर विकल्प हो सकता है। दोनों कारें पेट्रोल और CNG फ्यूल ऑप्शन के साथ उपलब्ध हैं, जो खरीदारों को अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चुनने की आजादी देती हैं।

फीचर्स और प्रीमियम फील

कार के अंदर के फीचर्स और प्रीमियम अहसास के मामले में टाटा टियागो अपनी एक अलग पहचान बनाती है।Tiago की खासियत टियागो के बेस वेरिएंट में भी अच्छे फीचर्स मिलते हैं। इसके हायर वेरिएंट में तो 7-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, 10.25-इंच डिस्प्ले, 8-स्पीकर हार्मन साउंड सिस्टम, ऑटोमैटिक एसी, 15-इंच अलॉय व्हील्स और प्रोजेक्टर हेडलैंप्स जैसे शानदार फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और प्रीमियम सीट्स इसे और आकर्षक बनाते हैं। WagonR के फीचर्स मारुति वैगनआर में भी कई उपयोगी फीचर्स जैसे 7-इंच टचस्क्रीन, 4-स्पीकर म्यूजिक सिस्टम, स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल्स और 14-इंच अलॉय व्हील्स मिलते हैं। टॉप वेरिएंट में स्मार्टप्ले स्टूडियो और ड्यूल-टोन कलर ऑप्शन भी है। लेकिन अगर टेक्नोलॉजी और प्रीमियम फील की बात की जाए, तो Tiago इस दौड़ में WagonR से थोड़ा आगे नजर आती है।

माइलेज की दौड़ में कौन है बादशाह?

भारतीय ग्राहकों के लिए माइलेज सबसे बड़ा फैक्टर होता है, और इस मामले में मारुति वैगनआर को बढ़त मिलती है। Tata Tiago Mileage इसका पेट्रोल वेरिएंट लगभग 19 से 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है। CNG वेरिएंट में यह आंकड़ा मैनुअल के साथ 26.49 किमी/किग्रा और AMT के साथ 28.06 किमी/किग्रा तक पहुंच जाता है। इस सेगमेंट में Tiago CNG के साथ ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन देने वाली पहली कार है, जो इसका बड़ा फायदा है। Maruti WagonR Mileage वैगनआर का पेट्रोल वर्जन 25.19 किमी/लीटर तक का माइलेज देता है, जबकि CNG वेरिएंट 34.05 किमी/किग्रा तक का शानदार माइलेज देता है। हालांकि, इसका CNG मॉडल सिर्फ मैनुअल ट्रांसमिशन में ही उपलब्ध है।

अंत में फैसला आपकी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। अगर आपका फोकस सिर्फ माइलेज और शहरी इस्तेमाल पर है, तो Maruti WagonR CNG बेहतरीन विकल्प है। वहीं, अगर आप कम बजट में ज्यादा फीचर्स, बेहतर बिल्ड क्वालिटी और प्रीमियम फील चाहते हैं, तो Tata Tiago आपके लिए सबसे सही गाड़ी साबित हो सकती है। Tata Tiago vs Maruti WagonR

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महिलाओं के समान अधिकारों पर SC की बड़ी टिप्पणी, UCC को बताया रास्ता

मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के कथित उल्लंघन से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने साफ संकेत दिया कि अब इस संवेदनशील और लंबे समय से लंबित विषय पर गंभीर पहल की जरूरत है।

UCC पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
UCC पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Mar 2026 12:36 PM
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UCC : देश में महिलाओं के समान अधिकार, पर्सनल लॉ और कानूनी समानता को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के कथित उल्लंघन से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने साफ संकेत दिया कि अब इस संवेदनशील और लंबे समय से लंबित विषय पर गंभीर पहल की जरूरत है। अदालत की टिप्पणी ने न सिर्फ कानूनी हलकों में हलचल बढ़ाई है, बल्कि महिलाओं के अधिकार, समानता और न्याय की बहस को भी नई धार दे दी है।

विधायिका को पहल करने का संकेत

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि अलग-अलग पर्सनल लॉ से उत्पन्न जटिलताओं का स्थायी समाधान न्यायालय के आदेश से नहीं, बल्कि विधायिका द्वारा बनाए गए कानून से ही संभव है। अदालत ने कहा कि यदि व्यक्तिगत कानूनों को सीधे अमान्य घोषित कर दिया जाए तो इससे कानूनी शून्य की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि संसद इस विषय पर स्पष्ट कानून बनाए।

महिलाओं के समान अधिकार के लिए UCC पर जोर

मुस्लिम महिलाओं को उत्तराधिकार में समान अधिकार दिलाने की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश की सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने का एक प्रभावी तरीका समान नागरिक संहिता हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्सनल लॉ से जुड़े कई प्रावधान ऐसे हैं, जिनकी वजह से महिलाओं को समान अधिकार मिलने में कठिनाई होती है। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पर्सनल लॉ के आधार पर होने वाले सभी द्विविवाह संबंधों को अमान्य घोषित किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर अंतिम निर्णय लेने के लिए विधायिका की भूमिका अहम है, क्योंकि मौलिक कर्तव्यों और समानता के सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाना संसद का अधिकार क्षेत्र है।

याचिका में संशोधन करने की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं को उत्तराधिकार से वंचित किए जाने के मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 को चुनौती देने वाली याचिका में संशोधन का सुझाव भी दिया। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण से पूछा कि याचिका को अधिक व्यापक रूप देने के लिए उसमें संशोधन क्यों नहीं किया जाता। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल 1937 के अधिनियम तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा संवैधानिक सवाल भी है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को भरोसा दिलाया कि याचिका में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी और याचिकाकर्ता को संशोधित याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। UCC

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