
बिहार चुनावी रणभूमि में सियासी गरमाहट चरम पर पहुँच चुकी है। जहाँ गठबंधनों में सीटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक रणनीति और खींचतान जारी है, वहीं नेताओं के दल बदलने ने समीकरण और पेचीदा कर दिए हैं। इसी राजनीतिक माहौल में जनसुराज पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपनी दूसरी उम्मीदवार सूची पेश की है, जिसमें 65 चेहरे शामिल हैं। इस लिस्ट में 7 वकील, 9 डॉक्टर और 4 इंजीनियर जैसे पेशेवर शामिल हैं, जो पार्टी के नए और भरोसेमंद विकल्प पेश करने की कोशिश को दर्शाते हैं। Bihar Assembly Election 2025
भागलपुर से वकील अभयकांत झा का टिकट सबसे ज्यादा चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इस कदम के जरिए प्रशांत किशोर मुस्लिम समुदाय को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके न्याय और सुरक्षा के मुद्दों को वे सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रखते। इस रणनीति को ब्राह्मण और मुस्लिम दोनों समुदायों को साधने की चाल के रूप में देखा जा रहा है, जो चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती है। Bihar Assembly Election 2025
बिहार विधानसभा चुनाव की राजनीति अब और ज्यादा गरम होती जा रही है। गठबंधनों में सीटों के बंटवारे को लेकर जारी खींचतान और नेताओं के दल बदलने ने सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इसी बीच, जनसुराज पार्टी ने अपनी दूसरी उम्मीदवार सूची जारी की है, जिसमें कुल 65 नए चेहरे शामिल हैं। इस लिस्ट में 7 वकील, 9 डॉक्टर और 4 इंजीनियर जैसी पेशेवर पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार हैं, जो पार्टी का नया और भरोसेमंद चेहरा पेश करने का संकेत देते हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है भागलपुर से वकील अभयकांत झा का टिकट। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस कदम के जरिए प्रशांत किशोर मुस्लिम समुदाय को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके न्याय और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को पार्टी गंभीरता से लेती है। वहीं, ब्राह्मण और मुस्लिम दोनों समुदायों को साधने की इस रणनीति को चुनावी समीकरणों को संतुलित करने की चाल के रूप में भी देखा जा रहा है।
भागलपुर से जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार बने अभयकांत झा न्याय और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी मिसाल के लिए जाने जाते हैं। 1989 के भागलपुर दंगों के दौरान उन्होंने मुस्लिम पीड़ितों के करीब 880 मामलों को मुफ्त में लड़ा, जिससे उनकी निष्पक्षता और न्यायप्रियता का शहर में सम्मान बढ़ा। 74 वर्षीय अभयकांत झा सिविल कोर्ट के सीनियर एडवोकेट हैं और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। पार्टी में उन्होंने जिले के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर के रूप में भी काम किया है और अब पहली बार विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट मिला है।
ब्राह्मण समाज से आने वाले झा हमेशा से जनहित और सामाजिक मुद्दों में आगे रहे हैं। शिक्षा, समाज सेवा और कानूनी सहायता के क्षेत्र में उनका योगदान उन्हें स्थानीय लोगों के बीच एक भरोसेमंद, ईमानदार और जनता से जुड़े नेता के रूप में स्थापित करता है। उनकी संवेदनशीलता और न्याय के प्रति निष्ठा ने उन्हें भागलपुर का सम्मानित चेहरा बना दिया है।
24 अक्टूबर 1989 का दिन भागलपुर के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है। इस दिन विश्व हिंदू परिषद ने राम शिला पूजन यात्रा निकाली, जिसमें हजारों हिंदू शामिल थे और सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात था। शुरुआत में शांतिपूर्ण दिखने वाला यह जुलूस अचानक भड़काऊ नारेबाजी का रूप ले गया, जैसे “जय मां काली…”, “बच्चा-बच्चा राम का…” और “मुसलमान जाओ पाकिस्तान। जुलूस के तातारपुर इलाके से गुजरते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया और दंगा शुरू हो गया। भगदड़ मची, दुकानों में तोड़फोड़ हुई और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।
अफवाहों ने स्थिति को और भयानक बना दिया: कहा गया कि मुसलमानों ने सैकड़ों हिंदुओं को कुएँ में डाल दिया, और यह खबर पूरे इलाके में फैल गई। कुछ ही घंटों में भागलपुर और आसपास के गांवों में हिंसा का भंवर फैल गया, घर जलाए गए और हजारों लोग पलायन करने को मजबूर हुए। इस दंगे में 116 मुसलमानों की हत्या कर उन्हें दफनाया गया, और ऊपर से उनकी कब्रों पर गोभी रोप दी गई। यह घटना न सिर्फ एक साम्प्रदायिक त्रासदी बन गई, बल्कि बिहार की राजनीतिक और सामाजिक संवेदनाओं पर आज भी गहरा असर छोड़ती है। Bihar Assembly Election 2025
भागलपुर की सियासी तस्वीर हमेशा से ही जटिल रही है। वर्तमान में कांग्रेस के अजीत शर्मा इस क्षेत्र से विधायक हैं, जबकि JDU के अजय कुमार मंडल दूसरे स्थान पर रहे। इस विधानसभा क्षेत्र में मुसलमान आबादी लगभग 26% है, जो चुनावी समीकरणों को बेहद नाज़ुक बनाती है। ऐसे में प्रशांत किशोर की रणनीति बेहद सूझ-बूझ वाली नजर आती है। ब्राह्मण और मुस्लिम दोनों समुदायों को ध्यान में रखते हुए अभयकांत झा का टिकट इस बार पार्टी की संतुलित राजनीतिक चाल को दर्शाता है। न केवल यह जनसुराज पार्टी के नए और भरोसेमंद चेहरे को सामने लाता है, बल्कि भागलपुर की संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक परिस्थिति में सामंजस्य कायम करने का भी एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। Bihar Assembly Election 2025