
बिहार चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का खेल तेज हो गया है। इसी बीच जनसुराज पार्टी के फाउंडर और मशहूर राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। जेडीयू और बीजेपी के कई नेताओं ने उनके और उनकी पार्टी की फंडिंग पर सवाल उठाए, लेकिन किशोर ने इस पूरे विवाद को अपनी पारदर्शिता के दम पर पलट दिया। बीजेपी और अन्य विपक्षी दल अगले कोई सवाल करने से पहले ही प्रशांत किशोर ने अपने तीन साल के बैंक अकाउंट और कमाई का पूरा ब्योरा सार्वजनिक कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कितनी कमाई की, कहां से कमाई की, कितना जीएसटी और इनकम टैक्स जमा किया और पार्टी को कितना दान दिया। उनके द्वारा पेश किए गए आंकड़े इतने चौंकाने वाले हैं कि राजनीति के समीकरण पर इसका असर पड़ना तय है। Prashant Kishore
जनसुराज पार्टी के फाउंडर और चर्चित राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपनी कमाई का खुलासा करके सभी को हैरान कर दिया है। इस कदम ने न सिर्फ पारदर्शिता का उदाहरण पेश किया, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नया ट्रेंड भी सेट कर दिया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या आने वाले दिनों में अन्य राजनीतिक दल और उनके नेता भी अपनी कमाई और फंडिंग का खुलासा करेंगे। प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि उनकी कमाई का हर रुपया सरकारी निगरानी के तहत है, और जनसुराज पार्टी की फंडिंग पूरी तरह पारदर्शी और वैध है। उन्होंने बताया कि उन्होंने सलाहकार के रूप में काम किया और इसके लिए उन्हें मानक शुल्क मिला, जिससे पार्टी की फंडिंग और उनकी व्यक्तिगत कमाई दोनों ही पूरी तरह खुलकर सामने आई। Prashant Kishore
प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीते तीन साल की अपनी कमाई और टैक्स का पूरा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कंसल्टेंट के रूप में उनकी कुल कमाई 241 करोड़ रुपए रही, यानी औसतन हर साल लगभग 80 करोड़ रुपए। इसके साथ ही उन्होंने 31 करोड़ रुपए जीएसटी और 20 करोड़ रुपए इनकम टैक्स के रूप में सरकार को चुकाए। इतना ही नहीं, किशोर ने कहा कि जनसुराज पार्टी को चेक के जरिए 98.5 करोड़ रुपए दान किए गए। उन्होंने साफ कहा, “मैं दूसरों की तरह नहीं छुपाता। मेरी कमाई, टैक्स और खर्च का पूरा हिसाब सबके सामने है।” उनके इस पारदर्शी कदम ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि नेताओं के लिए भी एक नई मिसाल कायम कर दी है।
प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक खास कंसल्टेंसी असाइनमेंट की भी जानकारी दी। प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर बताया कि एक कंसल्टेंसी असाइनमेंट के लिए उन्हें 11 करोड़ रुपए की फीस मिली, जो एक प्रोडक्ट लॉन्च के लिए थी। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र सरकार को चुनौती दी और कहा कि ईडी या कोई भी जांच एजेंसी मेरी कमाई की पूरी जांच कर सकती है, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। दरअसल, हाल के दिनों में बिहार की विपक्षी पार्टियों ने जनसुराज पार्टी की फंडिंग पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद किशोर को मीडिया के सामने आकर अपने आय और टैक्स का पूरा ब्योरा देना पड़ा। इस कदम ने उन्हें पारदर्शिता का प्रतीक बना दिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का नया विषय खड़ा कर दिया। Prashant Kishore
वर्तमान में, प्रशांत किशोर की नेटवर्थ करोड़ों में आंकी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग 45 से 60 करोड़ रुपए के बीच है। राजनीतिक रणनीति के क्षेत्र में उनकी पहचान उनकी कंसल्टेंसी फर्म i-PAC से और भी मजबूत हुई, जिसके जरिए उन्होंने कई पार्टियों के लिए चुनावी अभियान चलाए और इस काम के लिए कुल 100 करोड़ रुपए तक की फीस अर्जित की। प्रशांत किशोर ने 2014 में बीजेपी, 2015 में बिहार चुनाव में जेडीयू और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए चुनावी रणनीति तैयार की। वहीं 2019 में आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में वे वाईएसआरसीपी के साथ भी नजर आए। उनकी यह राजनीतिक यात्रा और भारी कमाई ने उन्हें देश के सबसे चर्चित रणनीतिकारों में से एक बना दिया है। Prashant Kishore