बिहार के 10 बड़े नेता प्रशांत किशोर के निशाने पर, जानिए क्यों?
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:06 AM
बिहार चुनावों से पहले प्रशांत किशोर ने जन सुराज पार्टी के जरिए एक नया राजनीतिक मोड़ लेने की तैयारी कर ली है। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने बीजेपी‑एनडीए और विपक्षी दलों के कई नेताओं को निशाने पर लिया है। आरोपों की सूची लंबी है भ्रष्टाचार, चरित्र, नेतृत्व की योग्यता, गंभीरता आदि पर सवाल उठाए गए हैं। अब चर्चा ये है कि इन आरोपों से कितनी राजनीति बदलेगी और कौन खोयेगा, कौन सहेगा? नीचे उन दस नेताओं की सूची है जिन्हें प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया है और ये भी कि यह हमला उनके राजनीतिक भविष्य पर क्या असर डाल सकता है। Prashant Kishor
तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav)
प्रशांत किशोर लगातार तेजस्वी यादव को “नौवीं फेल” कह कर चुनौती देते रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा की कमी राजनीतिक नेतृत्व में विश्वास घटाती है। तेजस्वी ने इस तरह के आरोपों के जवाब में कहा है कि हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है। बावजूद इसके तेजस्वी यादव के राजनीतिक ग्राफ पर ये टिप्पणी असर कर सकती है खासकर उन मतदाताओं में जो शिक्षा और नेतृत्व को जोड़कर देखते हैं।
नीतीश कुमार (Nitish Kumar)
नीतीश कुमार पर प्रशांत किशोर का आरोप है कि उनके शासन में कुछ मंत्री भ्रष्ट हैं और सरकार में कार्यशैली सही नहीं है। हालांकि, किशोर यह भी कहते हैं कि नीतीश खुद ईमानदार हैं लेकिन उनके नजदीकी लोगों ने सिस्टम को बिगाड़ा है। बिहार में नीतीश कुमार की साख पर ये बातें असर डाल सकती हैं विशेषकर उन दक्षिण‑पश्चिम जिलों में जहां जनसुराज की मांग तेज है।
राहुल गांधी (Rahul Ganshi)
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को किशोर ने अक्सर ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और कथित वोटिंग irregularities के जरिये निशाने पर लिया है। किशोर उनके यात्रा‑शैली और भाषणों को जनता के समक्ष पर्याप्त नहीं बताते। कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे राहुल गांधी की भूमिका को मजबूत तरीके से साबित कर सकें।
नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)
प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप हैं कि विकास और परियोजनाएं गुजरात‑केन्द्रित रही हैं जबकि बिहार को अपेक्षित लाभ नहीं मिले। किशोर ये सवाल उठाते हैं कि क्या केंद्र सरकार ने बिहार के विकास को प्राथमिकता दी है या नहीं। पीएम मोदी की स्वीकार्यता उन वर्गों में प्रभावित हो सकती है जो विकास की अपेक्षा रखते हैं मगर महसूस करते हैं कि लाभ कहीं और जा रहा है।
अमित शाह (Amit Shah)
अमित शाह को भी किशोर ने चुनावी कोड, सीमांकन, घुसपैठ आदि मुद्दों पर निशाने पर रखा है। ये आरोप केंद्र सरकार की कानून व्यवस्था और सुरक्षा नीति के प्रति जनता की मांग को भी सामने लाते हैं। अमित शाह को यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक धारणा सकारात्मक बनी रहे।
अशोक चौधरी (Ashok Choudhary)
ग्रामीण विकास मंत्री अशोक चौधरी पर जमीन हड़पने, संपत्ति बढ़ाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। उन्होंने खुद भी भगवानी जवाब दिया है और मानहानि का नोटिस जारी किया है। ये एक ऐसे नेता की लड़ाई है जिसमें आरोप और बचाव दोनों बहुत सार्वजनिक हो चले हैं।
सम्राट चौधरी पर उम्र छिपाने, आपराधिक पृष्ठभूमि और मैट्रिक जैसे शिक्षण प्रमाणपत्रों में अनियमितताओं के आरोप हैं। ये आरोप उनके लिए सबसे संवेदनशील हो सकते हैं क्योंकि ये चरित्र और विश्वसनीयता से जुड़े प्रश्न हैं।
दिलीप जायसवाल (Dilip Jaiswal)
दिलीप जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने किशनगंज मेडिकल कॉलेज पर अवैध कब्जा किया है। ऐसा माना जाता है कि यह मामला सिर्फ व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि राजनीतिक गठजोड़ और व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो राजनीतिक संकट बढ़ सकता है।
मंगल पांडेय (Mangal Pandey)
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर उनके परिवार के बैंक खाते में संदिग्ध राशि जमा होने का आरोप लगाया गया है। सार्वजनिक विश्वास के लिए पारदर्शिता बहुत जरूरी होती है और इस तरह के मामले मामलों के त्वरित और स्पष्ट जवाब की मांग करते हैं।
चिराग पासवान (Chirag Paswan)
चिराग पासवान को प्रशांत किशोर ने युवा और जातिगत राजनीति से ऊपर उठने वाले नेता बताया है। लेकिन उनके नाम भी आरोपों में जुड़े हैं कि उन्होंने टिकट वितरण और राजनीतिक समझौतों में प्रभाव इस्तेमाल किया है। यदि सार्वजनिक धारणा यह हो जाए कि चिराग भी उसी तरह की राजनीति कर रहे हैं जैसे अन्य बड़े नेता तो उनकी युवा प्रतिष्ठा को झटका लग सकता है।
ये तेजी से बदलती राजनीति कितनी बदल देगी सब?
विश्वसनीयता (Credibility): उन नेताओं को अधिक मेहनत करनी होगी जो आरोपों के घेरे में हैं खासकर उन मतदाताओं के बीच जो बदलाव, पारदर्शिता और ईमानदारी की मांग करते हैं।
मतदाताओं की उम्मीदें: बहुत‑से लोग सिर्फ वादों से नहीं बल्कि काम से प्रभावित होते हैं। यदि जन सुराज पार्टी और प्रशांत किशोर ये आरोप साबित कर पाते हैं तो यह एनडीए और विपक्ष दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।
प्रचार और विरोधी रणनीति: आरोपी नेताओं को बचाव की रणनीतियां तैयार करनी होंगी उदाहरण के लिए, यह दिखाना कि आरोप आधारहीन हैं, प्रमाण कैसे गलत हैं या जनता को सुधार दिखाना।
भविष्य की राजनीति: आपसी आरोप‑प्रत्यारोप, मीडिया एक्सपोजर, न्यायालयिक कार्रवाई आदि इससे सार्वजनिक राजनीति का स्वरूप और धारणा बदल सकती है।
प्रशांत किशोर की इन “हिट‑लिस्ट” से राजनीति में हलचल जरूर बढ़ी है। संक्रमण की यह स्थिति है अब देखना है कि इन आरोपों का राजनीतिक नतीजा क्या होगा जनता की सोच, पार्टियों के गठबंधन और चुनावी परिणाम कैसे प्रभावित होंगे। Prashant Kishor