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बिहार की राजनीति एक बार फिर जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर को लेकर चर्चा में है। बिहार की सियासत में जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर को लेकर एक वरिष्ठ पत्रकार ने बड़ी बात कही है।

Prashant Kishore : बिहार की राजनीति एक बार फिर जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर को लेकर चर्चा में है। बिहार की सियासत में जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर को लेकर एक वरिष्ठ पत्रकार ने बड़ी बात कही है। प्रशांत किशोर और बिहार में उनके राजनीतक भविष्य को लेकर आकलन करने वाले वरिष्ठ पत्रकार का नाम सुरेंद्र किशोर है। सुरेंद्र किशोर ने अपने विश्लेषण में उन्होंने प्रशांत किशोर की सक्रियता और रणनीतिक सोच की तुलना पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी से करते हुए संकेत दिया है कि बिहार की जमीनी राजनीतिक संरचना को समझने में कहीं न कहीं समान प्रकार की सीमाएं दिखाई देती हैं। यह टिप्पणी उस समय और भी अहम हो जाती है जब राजनीतिक हलकों में यह अटकलें तेज हैं कि प्रशांत किशोर आगामी विधानसभा चुनाव में पटना की बांकीपुर सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। Prashant Kishore
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि वे प्रशांत किशोर की मेहनत और सक्रियता को नकार नहीं रहे हैं। उन्होंने लिखा कि प्रशांत किशोर बिहार में गंभीरता से काम कर रहे हैं और उनकी कोशिशें ध्यान आकर्षित करती हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी राजनीतिक दिशा और समझ को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशांत किशोर की कार्यशैली देखकर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी की बिहार में की गई राजनीतिक सक्रियता की याद आती है। सुरेंद्र किशोर ने अपने विश्लेषण में 1990 के दशक का संदर्भ देते हुए कहा कि सुब्रह्मण्यम स्वामी भी उस समय बिहार की राजनीति में सक्रिय हुए थे। उन्होंने पटना में संगठन खड़ा किया और सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य लेकर काम शुरू किया था, लेकिन वे बिहार की सामाजिक और राजनीतिक जमीनी संरचना को पूरी तरह समझ नहीं पाए। परिणामस्वरूप वे अपने राजनीतिक उद्देश्य में सफल नहीं हो सके और बाद में बिहार की राजनीति से दूर हो गए। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दों और जनहित याचिकाओं पर ध्यान केंद्रित किया, जहां उन्हें अधिक सफलता मिली। Prashant Kishore
वरिष्ठ पत्रकार ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि प्रशांत किशोर के हालिया बयानों और राजनीतिक गतिविधियों से यह संकेत मिलता है कि बिहार की जमीनी राजनीति की जटिलताओं को लेकर उनकी समझ सीमित हो सकती है। उनका मानना है कि इसी कारण जन सुराज अभियान की पूरी ऊर्जा बिहार में केंद्रित होने के बावजूद अपेक्षित राजनीतिक परिणाम नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि यदि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में बने रहना चाहते हैं तो उन्हें किसी संगठित राजनीतिक दल के भीतर भूमिका निभानी चाहिए या फिर सुब्रह्मण्यम स्वामी की तरह राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों और भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों पर ध्यान केंद्रित करना अधिक प्रभावी हो सकता है। Prashant Kishore
सुरेंद्र किशोर ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में प्रशांत किशोर की ओर से उनसे मुलाकात का अनुरोध किया गया था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों और व्यक्तिगत व्यस्तताओं के चलते उन्होंने मिलने में असमर्थता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति और दृष्टिकोण को लेकर उनकी सोच और प्रशांत किशोर की सोच में स्पष्ट अंतर है, इसलिए यह मुलाकात व्यावहारिक रूप से उपयोगी नहीं होती। Prashant Kishore
प्रशांत किशोर के बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ने की अटकलों के बीच इस लेख ने बिहार की सियासत में नई बहस को जन्म दे दिया है। जन सुराज की रणनीति, जनाधार और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। Prashant Kishore
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