प्रशांत किशोर ने किया नरेन्द्र मोदी का समर्थन, बोले सही है
भारत
RP Raghuvanshi
29 Nov 2025 03:19 AM
रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा का खुला समर्थन किया है। बिहार में जन सुराज पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का समर्थन करके सभी को चौंका दिया है। लम्बे अर्से तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ काम कर चुके प्रशांत किशोर के समर्थन कोराजनीति में सच को सच कहने की परम्परा का प्रतीक माना जा रहा है। प्रशांत किशोर राजनीति में सच के पक्षधर बनकर आगे बढऩे का प्रयास कर रहे हैं। Prashant Kishore
प्रशांत किशोर ने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने सही किया
बिहार में पत्रकारों ने प्रशांत किशोर से सवाल पूछा कि उन्हें संसद में पेश किए गए 130वें संसोधन विधेयक के विषय में क्या कहना है। इस सवाल का जवाब देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह विधेयक लाकर केन्द्र सरकार ने बिल्कुल सही काम किया है। केन्द्र सरकार द्वारा पेश किए गए 130वें संसोधन विधेयक में 30 दिन तक जेल में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों को उनके पद से हटाने का प्रावधान किया गया। ज्यादातर विपक्षी दलों ने इस महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध किया है। वहीं प्रशांत किशोर ने इस विधेयक का खुला समर्थन करके राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। प्रशांत किशोर ने केन्द्र सरकार के बिल का समर्थन करते हुए साफ कहा कि यह बिल बिल्कुल सही है। Prashant Kishore
पत्रकारों के सवालों का उत्तर देतेे हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि क्रिमिनल बिल इसलिए लाया जा रहा है कि जब संविधान बना होगा, तब इसके निर्माताओं को एहसास ही नहीं रहा होगा कि सत्ता में बैठे लोग इतने भ्रष्टाचारी और इतने बड़े अपराधी हो जाएंगे कि उन्हें जेल जाना पड़ेगा। उससे भी बढक़र वो जेल जाने के बाद भी अपना पद नहीं छोड़ेंगे। यह बिल बिलकुल सही है। Prashant Kishore
प्रशांत किशोर को जान लेना बहुत जरूरी है
प्रशांत किशोर को भविष्य के बड़े नेता के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर का पूरा परिचय जान लेना बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि 34 साल की उम्र में संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोडक़र भारत आये बक्सर निवासी प्रशांत किशोर जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े तब उन्हें आम जनता नहीं जानती थी। प्रशांत किशोर ने राजनीति में ब्रांडिंग का दौर शुरू किया था। जब नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाया तब प्रशांत किशोर अपने काम में जुट गये। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही प्रचार का दौर शुरू हुआ। ऐसा प्रचार पहले कभी नहीं देखा गया था। Prashant Kishore
साल 2014 में प्रशांत किशोर ने सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (कैग) की स्थापना की थी। इसे भारत की पहली राजनीतिक एक्शन कमेटी माना जाता है। यह एक एनजीओ है जिसमें आईआईटी और आईआईएम में पढऩे वाले युवा प्रोफेशनल्स शामिल थे। प्रशांत किशोर को नरेंद्र मोदी कीउन्नत मार्केटिंग और विज्ञापन अभियान जैसे कि चाय पर चर्चा, 3डी रैली, रन फॉर यूनिटी, मंथन का श्रेय दिया जाता है। 2014 में जब भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तब पहली बार प्रशांत किशोर सुर्खियों में आये। लोग कहने लगे पीएम मोदी की शानदार जीत में प्रशांत किशोर का अहम योगदान रहा।
हालांकि कुछ दिन बाद ही प्रशांत किशोर और भाजपा के बीच की दूरी बढऩे लगे। प्रशांत किशोर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बहुत बड़ी मदद कर चुके हैं। वहीं प्रशांत किशोर अब दावा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार की राजनीति का दौर अब समाप्त हो चुका है। 2015 में प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नीतीश कुमार-लालू यादव के महागठबंधन का साथ थामा था। उन्हें सफलता मिली। इसके बाद 2017 में वह वाईएसआर कांग्रेस से जुड़ गए। पार्टी के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने किशोर की मुलाकात पार्टी के बड़े नेताओं से करवाई थी। हालांकि बिहार में जिस रणनीति ने काम किया था वह आंध्र प्रदेश में कामयाबी हासिल नहीं कर पाई।
उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर काम किया था लेकिन यहां भी पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद वह राजनीति में आये। सीएम नीतीश कुमार की पार्टी में शामिल हुए। पीके को बड़ा पद भी दिया गया। कुछ दिन बाद ही प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार के बीच भी दूरियां बढऩे लगी। चुनावी राजनीति में अपनी महारत दिखाने वाले प्रशांत किशोर पांडेय को जदयू से निकाल दिया गया है। Prashant Kishore
पश्चिम बंगाल में सरकार बनवाने का काम कर चुके हैं प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार बना चुके हैं। आप को बता दें कि 2021 में तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर को पश्चिम बंगाल में विधानसभा सभा की जिम्मेदारी सौंपी। पीके ने भी इस चुनाव में पीएम मोदी और भाजपा के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी। ममता बनर्जी फिर से मुख्यमंत्री चुनी गई थी। इस बार फिर से पीके की चर्चा पूरे देश में हुई। कुछ लोगों ने तो उन्हें चुनाव जीताने तक का श्रेय दे दिया।
इसके बाद पीके में बिहार में सक्रिया राजनीति करने का फैसला किया। वह बिहार लौटकर आये। दो अक्टूबर 2022 को गांधी जयंती के अवसर पर उन्होंने चंपारण से अपनी पदयात्रा शुरू की। दो साल तक बिहार के गांव-गांव घूमे और लोगों से मिले। दो साल बाद यानी दो अक्टूबर 2024 को गांधी जयंती के ही दिन अपनी नई पार्टी बनाई। इनका नाम रखा जनसुराज। पार्टी में शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन समेत कई क्षेत्रों के दिग्गज जुड़े।
प्रशांत किशोर ने 2025 विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी के लडऩे का एलान तो किया ही साथ ही 220 से अधिक सीटों पर जीत का दावा भी कर दिया। लेकिन, विधानसभा चुनाव से पहले चार सीटों पर उपचुनाव हुआ। इसमें पीके की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। यहां पर यह चर्चा करना भी जरूरी है कि प्रशांत किशोर के भविष्य को लेकर जनता क्या सोचती है।
पूरे देश में युवा वर्ग की बड़ी संख्या ऐसी हैं जो प्रशांत किशोर की तरफ बड़ी उम्मीद से देख रही है। युवा वर्ग को लगता है कि राजनेताओं को सलाह देकर बड़ी-बड़ी सरकार बनाने वाले प्रशांत किशोर नेता बनकर देश का बड़ा भला कर सकते हैं। बिहार से लेकर पूरे देश का युवा वर्ग प्रशांत किशोर को सत्ता में बैठकर काम करते हुए देखना चाहता है। अक्टूबर 2025 में होने वाला बिहार विधानसभा चुनाव बिहार प्रदेश के भविष्य के साथ ही प्रशांत किशोर का भविष्य भी तय करने वाला चुनाव साबित होगा। यही कारण है कि प्रशांत किशोर पूरे सधे हुए कदमों के साथ जेपी के रास्ते पर चल पड़े हैं। Prashant Kishore