राजनीतिक रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की इसी कंपनी IPAC ने भारत की राजनीति में बड़े-बड़े कामों को अंजाम दिया है। भारत सरकार के प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में IPAC के दफ्तरों पर बड़ी छापेमारी की है।

Prashant Kishore : राजनीतिक कंसलटेंट फर्म IPAC के कारण राजनीति में बड़ा बवाल मचा हुआ है। पश्चिम बंगाल से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक IPAC की खूब चर्चा हो रही है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह कंपनी IPAC प्रशांत किशोर की मूल कंपनी है। राजनीतिक रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की इसी कंपनी IPAC ने भारत की राजनीति में बड़े-बड़े कामों को अंजाम दिया है। भारत सरकार के प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में IPAC के दफ्तरों पर बड़ी छापेमारी की है।
प्रशांत किशोर की कंपनी IPAC का इतिहास लम्बा है। IPAC के इतिहास को समझने से पहले प्रशांत किशोर के विषय में बताना जरूरी है। प्रशांत किशोर वर्तमान में बिहार प्रदेश के राजनेता हैं। प्रशांत किशोर की राजनीतिक पार्टी का नाम जन सुराज पार्टी है। हाल ही में हुए बिहार विधानसभा के चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी ने बिहार विधानसभा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में प्रशांत किशोर की करारी हार हुई है। इससे पहले प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर देश के अनेक राजनेताओं तथा राजनीतिक दलों को चुनाव जितवाने का बड़ा काम किया था।
अब बात करते हैं राजनीति में बवाल मचाने वाली IPAC फर्म की। आपको बता दें कि 8 साल पहले वर्ष-2013 में प्रशांत किशोर ने पॉलिटिक्स कंसलटेंट फर्म के रूप में IPAC फर्म की नींव डाली थी। इस फर्म IPAC की नींव प्रशांत किशोर ने अपने तीन साथियों प्रतीक जैन, ऋषिराज सिंह तथा विनेश चंदेल के साथ मिलकर डाली थी. शुरुआत में IPAC फर्म नाम सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस था, जो बाद में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के रूप में जानी जाने लगी. इस कंपनी का मकसद राजनीतिक दलों और नेताओं को चुनावी रणनीति, संगठन मजबूत करने और डेटा आधारित फैसलों में मदद करना है. आईपैक के जरिये ही प्रशांत किशोर ने 2014 में नरेंद्र मोदी के राजनीतिक प्रचार-प्रसार का जिम्मा लिया था. इसके बाद बिहार चुनावों में नीतीश कुमार, पंजाब में अमरिंदर सिंह और आंध्र प्रदेश वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी के लिए भी प्रशांत किशोर की कंपनी ने काम किया था. इसके बाद से आईपैक पश्चिम बंगाल की सीएम ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए काम करती है. दावा किया जाता है कि 2021 में प्रशांत किशोर ने आधिकारिक रूप से इस कंपनी को छोड़ दिया था. इसके बाद से ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन कंपनी के डायरेक्टर बन गए.
इस फर्म का कमाई का सबसे बड़ा जरिया राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के लिए की जाने वाली कंसल्टेंसी है. यह कंपनी चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान पार्टियों को पूरी रणनीति देती है. इसमें उम्मीदवार चयन, जमीनी सर्वे, वोटर डेटा एनालिसिस, प्रचार रणनीति, सोशल मीडिया कैंपेन और मैसेजिंग तक शामिल होता है. राजनीतिक दल आईपैक को इसके लिए मोटी फीस देते हैं, जो प्रोजेक्ट और चुनाव के स्तर के हिसाब से तय होती है. IPAC फर्म एक प्राइवेट पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, इसलिए इसकी सटीक नेटवर्थ सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बड़े चुनावी प्रोजेक्ट्स और लगातार बढ़ते काम को देखते हुए कंपनी की वैल्यू हजारों करोड़ों रुपये में आंकी जाती है. देश के बड़े राज्यों में चुनावी कैंपेन संभालने और लंबे समय तक पार्टियों के साथ काम करने से IPAC की कमाई और प्रभाव दोनों लगातार बढ़े है.
आपको बता दें कि बृहस्पतिवार 8 जनवरी 2026 को हजारों करोड़ रुपये के कोयला घोटाले में प्रवर्तन निर्देशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस आईटी सेल के प्रमुख प्रतीक जैन के घर तथा प्रशांत किशोर की कंपनी IPAC के दफ्तर पर छापा मारा। मनी लॉन्ड्रिंग में 12 घंटे चली कार्रवाई के दौरान प. बंगाल की सीएम और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी आई-पैक के निदेशक जैन के घर पहुंच गई और फाइल लेकर निकल गई। इसके बाद सियासी विवाद बढ़ गया। ममता ने आरोप लगाया कि ईडी पार्टी के आंतरिक दस्तावेज, हार्डडिस्क और संवेदनशील डिजिटल डाटा जब्त कर रही है। उन्होंने ईडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है। उनकी पार्टी शुक्रवार को विरोध रैली भी निकालेगी। वहीं, ईडी ने कहा कि किसी पार्टी कार्यालय की तलाशी में बाधा डाली और दस्तावेज जबरन नहीं ली गई। सीएम ममता ने कार्रवाई उठा ले गई।
इस पूरे प्रकरण को लेकर ED कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची है। कार्रवाई के विरोध में तृणमूल कांग्रेस ने भी हाईकोर्ट से केंद्र सरकार के खिलाफ मामला दर्ज कराने की अनुमति मांगी, जिस पर जस्टिस शुभ्रा घोष ने याचिका दायर करने की अनुमति दे दी है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है। आई-पैक भी हाईकोर्ट ईडी में तलाशी की वैधता को चुनौती देगी। ने बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली में 4 और बंगाल में 6 ठिकानों पर छापे मारे। इनमें कोलकाता में आई-पैक का कार्यालय और जैन का घर भी है। सूत्रों के अनुसार, जैन के खिलाफ घोटाले से जुड़े हवाला लेनदेन व नकदी डील के खास सबूत मिले हैं। मामला नवंबर, 2020 में सीबीआई की एफआईआर जुड़ा है। इस मामले में ईडी ममता भतीजे व सांसद अभिषेक बनर्जी से अवैध कोयला व्यापार से मिले फंड के पूछताछ कर चुकी है। दावा है कि से के बनर्जी भी लाभार्थी थे। Prashant Kishore