पुणे का अनोखा मंदिर, जहां मोर पर विराजते हैं बप्पा
भारत
RP Raghuvanshi
29 Nov 2025 08:38 PM
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RP Raghuvanshi
29 Nov 2025 08:38 PM
गणेश चतुर्थी का नाम सुनते ही अगर आपके मन में सिर्फ 'लालबागचा राजा' या 'दगडूशेठ हलवाई गणपती' आता है तो जरा रुकिए। पुणे के पुराने इलाके में गणपती बप्पा का एक ऐसा अनोखा मंदिर छुपा हुआ है जो सिर्फ इतिहास का ही नहीं बल्कि भक्ति और कला का भी अद्भुत संगम है। इस अनोखे मंदिर में दुनियाभर के लोग बप्पा की पूजा के लिए उमड़ते हैं। अगर आपको पुणे के इस मंदिर की जानकारी नहीं है तो आप यहां सभी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। Ganesh Chaturthi 2025
शानदार मोर पर सवार है बप्पा
हम जिस अनोखी मंदिर की बात कर रहे हैं उसका नाम है 'त्रिशुंड गणपती मंदिर'। पुणे का यह मंदिर भगवान गणेश की उस दुर्लभ प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है जहां वे पारंपरिक मूषक पर नहीं बल्कि एक शानदार मोर पर सवार हैं। यही नहीं, भगवान की तीन सूंड और छह भुजाएं भी हैं जो उन्हें और खास बना देती हैं।
गणेशोत्सव में पुणे का ये खजाना देखना न भूलें
पुणे के सोमवार पेठ में स्थित यह मंदिर भले ही किसी भव्य पंडाल जैसा ना दिखे लेकिन इसकी 18वीं सदी की वास्तुकला, दुर्लभ मूर्तिकला और इतिहास इसे बेहद खास बनाते हैं। अगर आप इस गणेशोत्सव पर पुणे में हैं, तो यह जगह आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।
कहां से आया यह मंदिर?
बताया जाता है कि, पुणे के 'त्रिशुंड गणपती मंदिर' की नींव 1754 में रखी गई और इसे तैयार होने में 16 साल लगे। यह निर्माण कार्य भीमगीरजी गोसावी नामक एक योगी द्वारा करवाया गया था। कहा जाता है कि शुरुआत में यह एक शिव मंदिर था, जिसे बाद में गणपति को समर्पित कर दिया गया। आज भी मंदिर परिसर में भीमगीरजी की समाधि मौजूद है।
क्यों कहलाता है ‘त्रिशुंड गणपती’?
त्रिशुंड गणपती मंदिर का नाम ही उसकी मूर्ति से लिया गया है। ‘त्रिशुंड’ यानी तीन सूंड वाले गणपती। भगवान की मूर्ति काले बेसाल्ट पत्थर से बनी है और इसमें कीमती रत्नों की नक्काशी की गई है। सबसे अनोखी बात ये है कि वे अपने पारंपरिक वाहन 'मूषक' पर नहीं बल्कि एक मोर पर विराजमान हैं जो शायद आपने पहले कभी नहीं देखा होगा।
कला और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण
मंदिर की दीवारों और खंभों पर की गई नक्काशी देखने लायक है। यहां राजस्थान, दक्षिण भारत, मालवा और मराठा स्थापत्य शैली की झलक मिलती है। आपको गैंडे और हाथियों की मूर्तियां, द्वारपाल, युद्ध के दृश्य और यहां तक कि 1757 के प्लासी युद्ध का एक दृश्य भी पत्थरों में उकेरा हुआ दिखाई देगा। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि एक खुला म्यूजियम भी है।
संरक्षण की दिशा में कदम
कई सालों तक यह मंदिर पुणे की भीड़ में कहीं छुपा रहा। लेकिन हाल के वर्षों में पुणे नगर निगम ने इसके संरक्षण की दिशा में काम किया है। अब यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि इतिहास और कला प्रेमियों के लिए भी एक खास जगह बन चुका है।
त्रिशुंड गणपती मंदिर सोमवार पेठ, पुणे में कमला नेहरू अस्पताल के पास स्थित है। पुणे रेलवे स्टेशन से आप ऑटो या टैक्सी से आसानी से यहां पहुंच सकते हैं। आखिरी कुछ मीटर पैदल चलना पड़ेगा, लेकिन इस दौरान आपको पुणे की पुरानी गलियों का असली रंग देखने को मिलेगा। इस गणेशोत्सव पर अगर आप कोई भीड़ से अलग, शांत और ऐतिहासिक अनुभव लेना चाहते हैं तो त्रिशुंड गणपती मंदिर जरूर जाएं। Ganesh Chaturthi 2025