शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें उस समय तेज हुईं, जब अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने दोनों दलों को दोबारा साथ देखने की जनता की इच्छा का जिक्र किया।

Akali Dal-BJP Alliance : पंजाब की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर पुराने राजनीतिक समीकरणों के लौटने की चर्चा शुरू हो गई है। शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें उस समय तेज हुईं, जब अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने दोनों दलों को दोबारा साथ देखने की जनता की इच्छा का जिक्र किया। मजीठिया के बयान से पहले अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल भी दोनों दलों के पुराने तालमेल की जरूरत की ओर संकेत कर चुकी हैं। इसके अलावा अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हालिया मुलाकात के बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में गठबंधन को लेकर चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है। Akali Dal-BJP Alliance
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में बिक्रम सिंह मजीठिया ने अकाली दल और भाजपा के लंबे राजनीतिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों दलों ने वर्षों तक पंजाब की राजनीति में मिलकर काम किया है और इस साझेदारी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने मजबूत आधार दिया था। मजीठिया के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भी यह गठबंधन आगे बढ़ा। हालांकि, कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद पैदा हुए और अकाली दल ने भाजपा से दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि पंजाब की सामाजिक संरचना, भाईचारे और सीमावर्ती राज्य के रूप में उसकी संवेदनशील स्थिति को देखते हुए जनता दोनों दलों को दोबारा एक मंच पर देखना चाहती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय दोनों दलों के केंद्रीय नेतृत्व को ही लेना है। Akali Dal-BJP Alliance
मजीठिया के बयान से पहले बठिंडा की सांसद हरसिमरत कौर बादल भी अकाली दल और भाजपा के पुराने तालमेल की ओर संकेत कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि पंजाब के विकास के लिए जिस तरह पहले राज्य और केंद्र के बीच तालमेल के साथ काम हुआ, उसकी जरूरत दोबारा महसूस की जा रही है। हरसिमरत के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक दोनों दलों की ओर से औपचारिक रूप से किसी नए गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है। Akali Dal-BJP Alliance
अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद गठबंधन की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हुई हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात को लेकर भले ही सार्वजनिक तौर पर अलग-अलग राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हों, लेकिन इसके बाद अकाली दल और भाजपा के बीच संभावित नजदीकी पंजाब की सियासत में चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। अब मजीठिया और हरसिमरत कौर बादल के बयानों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। Akali Dal-BJP Alliance
अकाली दल और भाजपा की राजनीतिक साझेदारी करीब दो दशक से अधिक समय तक चली। दोनों दलों का गठबंधन 1998 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ अकाली दल के जुड़ने के बाद मजबूत हुआ। पंजाब में दोनों दलों ने मिलकर 2007 से 2017 तक लगातार दो कार्यकाल सरकार चलाई। हालांकि, वर्ष 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर पंजाब में विरोध बढ़ने के बाद अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया। उस समय हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। बाद में केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में तीनों कृषि कानून वापस ले लिए। Akali Dal-BJP Alliance
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