
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के दांव-पेंच में धार्मिक स्थलों की अहमियत और बढ़ती जा रही है। इस बार केंद्र में है सीतामढ़ी का ‘पुनौरा धाम’, जिसे हिंदू मान्यता के मुताबिक माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है। यही वजह है कि चाहे बीजेपी हो या विपक्ष, हर बड़ा नेता यहां मत्था टेककर सियासी संदेश देने से चूकना नहीं चाहता। अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में पुनौरा धाम में माता सीता के भव्य मंदिर की आधारशिला रखी। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव अपनी ‘वोट अधिकार यात्रा’ के दौरान सीतामढ़ी पहुंचे और मां जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना कर बीजेपी की हिंदुत्व पॉलिटिक्स को जवाब देने की कोशिश की है। Bihar Assembly Election 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही धार्मिक आस्था के जरिए मतदाताओं को साधने की जंग में उतर चुके हैं। बीजेपी-जेडीयू गठबंधन ने सीतामढ़ी के पुनौरा धाम को अयोध्या की तर्ज पर भव्य मंदिर के रूप में विकसित करने का ऐलान कर हिंदुत्व की पिच पर बड़ा दांव चला है, वहीं कांग्रेस और राजद मंदिरों में माथा टेककर इस नैरेटिव को चुनौती देने की रणनीति बना रहे हैं। सत्ता पाने की दौड़ में मिथिला से उठी ‘मां सीता’ की आस्था अब पूरे बिहार की राजनीति का केंद्र बिंदु बन चुकी है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की गर्माहट बढ़ते ही सियासी दल एक-दूसरे की चाल को काटने के लिए धार्मिक प्रतीकों का सहारा ले रहे हैं। बीजेपी-जेडीयू गठबंधन जहां सीता मंदिर निर्माण को हिंदुत्व के बड़े नैरेटिव में बदलकर बहुसंख्यक वोटरों को साधने की कवायद कर रहा है, वहीं कांग्रेस और राजद भी पीछे हटने को तैयार नहीं। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने सीतामढ़ी में मां जानकी के दरबार में मत्था टेककर साफ कर दिया कि वे भी हिंदू आस्था की राजनीति में हिस्सेदारी चाहते हैं। विपक्ष अब समझ चुका है कि अगर हिंदू वोटों की गोलबंदी को तोड़ना है तो आस्था की राजनीति में उतरना ही होगा।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अब मुकाबला सिर्फ जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हिंदुत्व की पिच पर भी जमकर खेला जा रहा है। बीजेपी-जेडीयू गठबंधन ने पुनौरा धाम में सीता मंदिर का शिलान्यास कर बहुसंख्यक वोटों को साधने का सीधा संदेश दिया है। वहीं कांग्रेस और राजद इस एजेंडे को बेअसर करने के लिए मंदिरों में माथा टेकते हुए जनता को यह बताने में जुटे हैं कि बीजेपी की ‘हिंदुत्व पॉलिटिक्स’ ही चुनावी मैदान का अकेला नैरेटिव नहीं है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की जंग अब सिर्फ वोट बैंक की राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि आस्था की राजनीति का अखाड़ा बन चुकी है। सीतामढ़ी का पुनौरा धाम इसी टकराव का केंद्र है, जहाँ एक ओर राहुल गांधी संविधान और ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाकर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी-जेडीयू गठबंधन विपक्ष के मंदिर दौरे को महज दिखावा बताकर हिंदुत्व के एजेंडे को और धार दे रहा है। साफ है कि मां सीता की आस्था अब दोनों खेमों के लिए चुनावी वरदान साबित करने वाली सबसे बड़ी रणनीतिक चाल बन चुकी है। Bihar Assembly Election 2025