
देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद से उनका कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया और वे कहीं दिखाई नहीं दिए। उनकी इस खामोशी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को संसद में इस चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, “जो व्यक्ति पहले राज्यसभा में खुले तौर पर बोलते थे, वह आज पूरी तरह चुप क्यों हैं? क्या वे एक शब्द भी नहीं बोल सकते ? Hindi India News
राहुल गांधी ने कहा, “उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के दिन मुझे वेणुगोपाल जी ने सूचित किया। उनके इस्तीफे के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिन्हें सभी नहीं जानते। सवाल यह है कि वे क्यों छिपे हुए हैं? भारत के उपराष्ट्रपति ऐसी स्थिति में क्यों हैं कि एक शब्द भी नहीं बोल सकते?” उन्होंने इसे वर्तमान समय की गंभीर चुनौती बताया और कहा कि यही वह समय है, जब एक लोकतांत्रिक समाज में ऐसे मौन रहना चिंताजनक है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस चुप्पी के बीच विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। शिवसेना नेता संजय राउत ने तो गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर हेबियस कॉर्पस याचिका दायर करने तक की बात कही थी। बावजूद इसके, धनखड़ न तो सामने आए और न कोई टिप्पणी की।
संसद में राहुल गांधी ने 20 अगस्त को पेश किए गए एक विवादास्पद बिल पर भी टिप्पणी की। यह बिल उन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान करता है, जिन्हें गंभीर आपराधिक आरोप में गिरफ्तार किया गया हो और 30 दिन तक हिरासत में रखा गया हो। राहुल ने इसे मध्यकालीन शासन की तरह बताया और कहा, “उस समय राजा अपनी इच्छा से किसी को हटाता था। आज लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेताओं का कोई महत्व नहीं रह गया। यदि किसी का चेहरा पसंद नहीं आता, तो ईडी को केस दर्ज करने का आदेश और 30 दिन में चुना हुआ नेता खत्म। यह देश को मध्ययुगीन काल में वापस धकेलने जैसा है। Hindi India News