राहुल गांधी ने कहा कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के सभी छात्र मांग रहे हैं।

कांग्रेस के बड़े नेता तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने बड़ा ऐलान किया है। दिल्ली में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के सभी छात्र मांग रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा होने तक कांग्रेस पार्टी तथा विपक्षी दल सरकार के साथ लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष को धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी स्वीकार नहीं है।
राहुल गांधी ने कर दी प्रधानमंत्री से बड़ी मांग
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने भी बड़ी मांग रख दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्रों के ऊपर हुए लाठीचार्ज के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी छात्रों से तुरन्त माफी मांगे। राहुल गाँधी ने प्रेसवार्ता में छात्रों की तीन मांगों को दोहराते हुए कहा कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगें पूरी होने तक कांग्रेस पार्टी छात्रों के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करती रहेगी।
राहुल गांधी की तीन मांगे
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं हैं।
"देश का एजुकेशन सिस्टम टूट चुका है"
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश का शिक्षा और टेस्टिंग सिस्टम पूरी तरह कमजोर हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं पर ही युवाओं का भविष्य टिका था, लेकिन अब उस व्यवस्था पर भी छात्रों का भरोसा खत्म होता जा रहा है। उनके अनुसार युवाओं के लिए रोजगार और अवसर लगातार कम हो रहे हैं।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ गया है और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जबकि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस लगातार सरकार को घेर रही है। विपक्ष ने संसद के भीतर चर्चा की मांग की, जबकि संसद के बाहर भी प्रदर्शन किए गए। इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और छात्रों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। राहुल गांधी के आरोपों और मांगों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और छात्रों के आंदोलन तथा शिक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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