क्या दिल्ली प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी को लेकर फैलाए गए गोलीबारी और मौतों के दावे सच थे ? दिल्ली पुलिस ने इन दावों को अफवाह बताया है। जानिए वायरल वीडियो की सच्चाई और भ्रामक पोस्ट पर कार्रवाई से जुड़ा पूरा मामला।
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National News : देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं फैलाने का मामला सामने आया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी और लोगों की मौत से जुड़े दावे भी प्रसारित किए गए। दिल्ली पुलिस ने ऐसे दावों को अफवाह बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। मामले ने उस समय गंभीरता से ध्यान खींचा, जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया गया कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गोली चलाई और पांच लोगों की मौत हो गई। पोस्ट में लोगों से सड़कों पर उतरने और दिल्ली को बंद करने की अपील भी की गई थी। दिल्ली पुलिस ने इस दावे को गलत बताया और लोगों से ऐसी सूचनाओं पर भरोसा नहीं करने की अपील की। National News
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के घायल होने और पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने जैसे दावे प्रसारित होने की बात सामने आई। हालांकि, गोलीबारी और मौतों से जुड़े वायरल दावों की पुष्टि नहीं हुई। सरकारी तथ्य-जांच इकाई पीआईबी ने भी 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की गोलीबारी का दावा करने वाले एक वीडियो को भ्रामक बताया। पीआईबी के मुताबिक, वीडियो पुराना था और उसका जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन से संबंध नहीं था। प्रदर्शन के दौरान 13 लोगों की मौत होने का दावा भी सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने की बात सामने आई। ऐसी खबरों के साथ वीडियो साझा किए जाने से भ्रम फैलने की आशंका बढ़ी। हालांकि, किसी भी वायरल पोस्ट को वास्तविक घटना का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसे दावों की पुष्टि के लिए पुलिस, प्रशासन और आधिकारिक तथ्य-जांच एजेंसियों की जानकारी देखना जरूरी है। National News
दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाले प्रदर्शन में गोलीबारी और मौतों का झूठा दावा फैलाने वाले एक सोशल मीडिया खाते के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पुलिस के अनुसार, भ्रामक सामग्री फैलाने वाली करीब 300 पोस्ट हटाई गई थीं। पुलिस ने संबंधित मंच से आपत्तिजनक और कथित रूप से भ्रामक सामग्री हटाने के लिए भी संपर्क किया। हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित हर भ्रामक पोस्ट के पीछे किसी एक देश या संगठन का हाथ होने का निष्कर्ष बिना ठोस जांच के नहीं निकाला जा सकता। पाकिस्तान से संचालित खातों और कथित समन्वित दुष्प्रचार अभियान से जुड़े दावों को भी संबंधित एजेंसियों के पुष्ट निष्कर्षों के आधार पर ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। National News
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