भारतीय रेलवे ने रिटायर कर्मचारियों को दिए जाने वाले चांदी के सिक्के की परंपरा को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। यह फैसला भोपाल और राजस्थान में सामने आए नकली मेडल घोटाले के बाद लिया गया है। जांच में सिक्कों में मात्र 0.23 प्रतिशत चांदी पाए जाने से मामला गंभीर हो गया।

भारतीय रेलवे (Indian Railway) में पिछले करीब 20 वर्षों से चली आ रही एक खास परंपरा अब समाप्त हो गई है। रेलवे बोर्ड ने सेवानिवृत्त अधिकारियों को विदाई उपहार के रूप में दिए जाने वाले गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल (चांदी के सिक्के) देने की प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करने का फैसला किया है। यह फैसला न केवल कर्मचारियों के लिए भावनात्मक है बल्कि इसके पीछे सामने आया एक बड़ा घोटाला भी इसकी अहम वजह माना जा रहा है।
बता दें कि, यह परंपरा रेलवे में मार्च 2006 में शुरू की गई थी। उस समय यह तय किया गया था कि रिटायर होने वाले कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप लगभग 20 ग्राम वजन का स्वर्ण मढ़ा हुआ चांदी का सिक्का भेंट किया जाएगा। इसके बाद बीते 20 सालों में हजारों कर्मचारियों को यह मेडल दिया गया और यह रिटायरमेंट की पहचान बन गया।
रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने बुधवार, 28 जनवरी 2026, को इस संबंध में एक औपचारिक आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा गया है, “Discontinuation of practice of presenting Gold plated Silver Medals to retiring Railway officials.” यानि अब रिटायर होने वाले किसी भी रेलवे अधिकारी को यह मेडल नहीं दिया जाएगा।
इस फैसले के पीछे भोपाल रेल मंडल में सामने आया एक गंभीर मामला अहम वजह माना जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि जिन सिक्कों को चांदी बताया जा रहा था उनमें चांदी की मात्रा सिर्फ 0.23% ही थी। असल में ये सिक्के चांदी नहीं बल्कि तांबे के सोने-पॉलिश वाले नकली मेडल निकले। इस खुलासे के बाद रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ FIR दर्ज कराई और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ऐसा ही मामला राजस्थान में भी सामने आया जहां एक रिटायर्ड कर्मचारी को शक हुआ और उसने सिक्के की जांच करवाई। लैब रिपोर्ट में सामने आया कि उसमें सिर्फ 0.25% चांदी मौजूद थी। इसके बाद पिछले दो वर्षों से नकली सिक्के बांटे जाने की आशंका पर विजिलेंस जांच शुरू की गई। मध्य प्रदेश के भोपाल रेल मंडल में भी रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ बड़ा धोखा सामने आया। सम्मान के नाम पर दिए गए सिक्कों की लैब टेस्टिंग में पता चला कि उनमें मात्र 0.23 ग्राम चांदी ही थी।
पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने बताया कि करीब 3600 सिक्के बांटे जाने थे जिनमें से एक लॉट में गंभीर डिफेक्ट पाया गया। इसके बाद पूरे मामले की जांच की गई और नकली सिक्कों की पुष्टि हुई।
रेलवे के पास मौजूद वर्तमान मेडल स्टॉक को अब अन्य प्रशासनिक कार्यों में उपयोग किया जाएगा। यह नया नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले अधिकारियों पर भी लागू होगा यानी अब उन्हें भी यह चांदी का मेडल नहीं मिलेगा।
यह फैसला केवल एक उपहार बंद करने का नहीं है बल्कि रेलवे की पारदर्शिता और भरोसे से जुड़ा हुआ मामला भी है। जिन कर्मचारियों ने जीवनभर रेलवे की सेवा की, उनके साथ सम्मान के नाम पर हुआ यह धोखा बेहद गंभीर माना जा रहा है।