
Rajasthan Assembly Election : राजस्थान में इस वर्ष नवंबर- दिसंबर में विधानसभा की 200 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। चुनाव में कांग्रेस के टिकट कौन बांटेगा, इस पर चर्चा और समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे की पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से हुई बातचीत में विधानसभा चुनाव यह मुद्दा रहा। कहा जा रहा है कि गहलोत ने खरगे को विश्वास दिलाया है कि सरकार रिपीट हो जाएगी।
राजस्थान में वर्तमान में कांग्रेस के 108 विधायक हैं और 12 निर्दलीय विधायक समर्थन दे रहे हैं। एक मोटे अनुमान के तौर पर माना जा रहा है कि इनमें से 60 विधायकों को टिकट देने में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और आलाकमान को एतराज नहीं है, क्योंकि यह सब जीत की गणित वाले विधायक है। शेष में से कई अपने परिजनों को उतारना चाहते हैं। कुछ क्षेत्र बदलना चाहते हैं और कुछ के खिलाफ क्षेत्र में शिकायत है तथा पार्टी में उनका आचरण अच्छा नहीं माना गया है, लेकिन सब मामलों में फैसला आलाकमान करेगा।
टिकट बंटवारे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अहम भूमिका होगी। माना जा रहा है कि उनकी इच्छा से आलाकमान लगभग 50 टिकट देगा, मुख्यमंत्री की नजर उन सीटों पर ज्यादा है जो लंबे समय से भाजपा के कब्जे में है। लगभग 40 टिकट आलाकमान की इच्छा से बांटे जाएंगे, इनमें शेष बचे विधायक तथा पिछला चुनाव हारे प्रत्याशी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। लगभग 15 टिकट पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की सिफारिश पर बांटे जाएंगे जिनमें वे अपनी कार्यकारिणी के पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों को एडजेस्ट करवाएंगे। शेष बचे 35 टिकट बांटने में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट तथा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह व अन्य नेताओं की भूमिका रहेगी। यह नेता उन्हीं को टिकट दिला पाएंगे जिनके लिए पार्टी आलाकमान मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष भी सहमत होंगे।
2018 के विधानसभा चुनाव में अकेले सचिन पायलट ने 100 से ज्यादा टिकट बांटे थे, जिनमें से अधिकांश चुनाव हार गए जो जीते उन्होंने बगावत की इसलिए इन सब के टिकट पर इस बार पेंच लग सकता है।