Rajasthan Election Results 2023: राजस्थान में परंपरा कायम रहेगी, कांग्रेस को अंतरकलह ले डूबी!
राजस्थान में यह परंपरा रही है कि हर पांच साल में एक पार्टी की सरकार बदल जाती है। और दूसरी पार्टी की सरकार बनती है।
Rajasthan Election Results 2023
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 11:22 AM
Rajasthan Election Results 2023: राजस्थान में यह परंपरा रही है कि हर पांच साल में एक पार्टी की सरकार बदल जाती है। और दूसरी पार्टी की सरकार बनती है। और रुझानों को देखते हुए यह सही लग रहा है। भाजपा की जीत टक्कर के साथ आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए एक बड़ा संकेत देने वाली है। हम निश्चित रूप से बात कर रहे हैं राजस्थान में गहलोत सरकार को मोदी नेतृत्व द्वारा टक्कर देने की। और दूसरा राजस्थान में एक महत्वपूर्ण फैक्टर है सत्ताधारी कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और युवा नेता सचिन पायलट के बीच दोनों का एक साथ चुनाव में पूरी तरह से मन से न उतर कर चलना।
सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच खटास भारी पड़ा
इस विश्लेषण में हम मुख्यतः दो बात कर रहे हैं जिसमें मोदी सरकार और मोदी के नेतृत्व के विश्व स्तरीय पहचान और उसकी सनातन संस्कृति के आदर्श मूल्य को लेकर चलना और दूसरे कांग्रेस सरकार के स्वयं के दिग्गज नेताओं के बीच खास तौर से सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच खटास दूरियों को लेकर चुनाव में उतरना। जहां कांग्रेस ने और उसके नेतृत्व ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारी और अशोक गहलोत एकला चलो की नीति पर चले जिससे पासा पलटने की पूरी संभावना है।
मुख्यमंत्री ने अपने काम पर किया था भरोसा
क्योंकि मुख्य मंत्री अशोक गहलोत को लग रहा था वह राजस्थान की महिलाओं को मुख्य घर की लक्ष्मी को ₹10000 देने की घोषणा करके मध्य प्रदेश के शिवराज की लाडली बहना की योजना से महिला आबादी को अपनी तरफ आकर्षित कर सकते हैं और उन्हें हम ₹500 के सिलेंडर का ऑफर देकर उन्हें घर में चूल्हा जलाने की बात कह कर मतदाता को प्रभावित कर सकते हैं और वह अपनी तमाम प्रमुख गोधन योजना ओल्ड पेंशन योजना, फ्री लैपटॉप योजना के दावों से अपनी जीत को निश्चित लेकर चल रहे थे। लेकिन लगता है कि जनता पर इन सब बातों का असर नहीं हुआ। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विश्व पटल पर भारत के विकास की पहचान, भारत के राज्यों में विकास की नीति और सनातन संस्कृति के मुख्य बिंदुओं को लेकर जनता के पूरे भरोसे के साथ डंके की चोट पर राजस्थान से गहलोत सरकार को पूरी तरह उखाड़ देने की बात मंचों पर कही थी।
Rajasthan Election Results 2023 in hindi
प्रधानमंत्री ने जनता से लाल डायरी का बार बार जिक्र किया
हम यह बात तो जरूर करने वाले हैं की दोनों टक्कर वाली पार्टियों ने क्या किया और किसकी पहचान का सिक्का चला लेकिन इससे पहले हम इस बात पर भी चर्चा करेंगे कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हिलाने में प्रधानमंत्री ने राजस्थान के तमाम मंचों से अशोक गहलोत की सरकार को जड़ से हिलाने के लिए लाल डायरी के पन्ने बार-बार जनता के सामने पेश करके अशोक सरकार को जड़ से हिलाने का काम किया। सवाल या नहीं की लाल डायरी में क्या था क्या नहीं। सवाल यह था कि लाल डायरी के पन्नों को बार-बार प्रधानमंत्री ने राजस्थान की जनता के सामने दरी का कोना पड़कर इतनी बुरी तरह हिलाया की अशोक सरकार की तमाम योजनाओं के दागों के पन्ने हिले नजर आए। और प्रधानमंत्री ने मंचों से बार-बार यही पूछा क्यों भाइयों क्या ऐसी भ्रष्ट सरकार को तुम हटाना नहीं चाहोगे क्यों। भाइयों क्या तुम लाल डायरी के पन्ने खोलने नहीं चाहोगे। क्यों भाइयों आप महिलाओं के प्रति होते अपराध वाली सरकार को हटाना नहीं चाहोगे।
जनता कांग्रेस के दिए प्रलोभन को भूली
पहले हम मतदाता की बात करें तो राजस्थान का मतदाता रिवाज हटाकर राज पर आया और क्यों आया या किसी को बताने की जरूरत नहीं है। क्योंकि राजस्थान का मतदाता पूरे देश और विश्व से अलग हटकर नहीं सोच सकता। आज का सोशल मीडिया उसकी हर पल विश्व स्तर तक जोड़ता है और उस समय वह मतदाता यह भूल जाता है कि मेरे घर में गृह लक्ष्मी के नाम पर अशोक गहलोत सरकार शिवराज सरकार की तरह लाडली बहन से टक्कर लेकर हर घर में ₹10000 का लाभ देने की घोषणा कर रही है या वह गोबर को ₹2 में खरीद कर हर घर में गोदान का लाभ जनता को देना चाहती है या वह महिलाओं के चूल्हे को जलाने के लिए ₹500 में सिलेंडर देना चाहती है।
एक तरफ अशोक गहलोत घोषणा करते हैं कि हमारी सरकार आएगी तो हम अंग्रेजी मीडिया शिक्षा स्कूलों को प्रोत्साहित करेंगे और हर बच्चे को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने के लिए कार्य करेंगे लेकिन आपको बता दें कि नरेंद्र मोदी अंग्रेजी माध्यम की बात कह कर क्षेत्रीय भाषाओं का अपमान नहीं करते। बल्कि क्षेत्र भाषाओं को विश्व पटल पर ताकत देने का काम करते हैं और उनकी नई शिक्षा नीति ने व्यापक पैमाने पर पहले ही या संदेश दे दिया की उच्च शिक्षाओं तक में हमारी क्षेत्रीय भाषाओं को महत्व मिलेगा और उन्होंने यह शुरुआत कर भी दी।
कांग्रेस के दो दिग्गज की आपसी तकरार ले डूबी नैया
एकता में अनेकता की ताकत मोदी जी दे जाते हैं वही हमारा विपक्ष कांग्रेस जब सचिन पायलट और अशोक गहलोत जैसे बड़े नेता भाजपा जैसी पार्टी से टकराने के लिए कांग्रेस राजस्थान में चुनाव में उतरती है और वह दो नेता ही आपस में एक साथ नहीं चल पाए तो जनता का इस पर कहीं ना कहीं प्रभाव जरूर जाता है। कांग्रेस के नेता आपस में ही एक मुख्य बिंदु पर भी एक क्यों नहीं हो पा रहे। ऐसा नहीं है कि भाजपा में और भाजपा के नेताओं में आपसी मतभेद ना हो, आपसी टूटन ना हो, आपसी फुटर ना हो लेकिन मोदी और भाजपा संगठन की एक सबसे बड़ी विशेषता जिसे चुनाव के विश्लेषक साफ-साफ बोलते हैं वह है नेतृत्व का निर्णय।
राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट का एक साथ ना चलना
अशोक गहलोत सरकार का अपने बड़े-बड़े दावों और योजनाओं के भरोसे एकला चलने की नीति ने कांग्रेस को निश्चित रूप से धक्का दिया है ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी के नेतृत्व ने देश भर की यात्रा करके जनता को फिर से अपने भरोसे में लेने का काम ना किया हो। राहुल ने अपनी ताकत निश्चित रूप से एक युवा की तरह दिखाई और जगह-जगह अपना जादू चलाने का कार्य किया लेकिन राहुल गांधी के निर्णय और फैसला उतनी बड़ी ताकत नहीं रखते। राहुल गांधी की मेहनत और जनता को साथ लेकर चलने का प्रयास निश्चित रूप से राहुल को जाना चाहिए और राहुल गांधी ने हिम्मत के साथ भाजपा का सामना करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। लेकिन कांग्रेस की अंतरकलह सब पर भारी पड़ गया।
प्रस्तुति मीना कौशिक
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