उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में करीब चार साल बाद कानूनी लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट में आरोपियों की ओर से रखी गई दलीलों पर सुनवाई के बाद ऐसा फैसला आया है, जिसका असर अब इस मामले की आगे की सुनवाई पर भी दिखाई देगा।

National News : राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने आठ आरोपियों को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने आरोपियों की अपीलें खारिज करते हुए विशेष NIA अदालत की ओर से तय किए गए आरोपों को बरकरार रखा है। इसके साथ ही मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मुकदमे की सुनवाई आगे जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अदालत के इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि आठों आरोपियों को दोषी करार दे दिया गया है। हाईकोर्ट ने केवल आरोप तय करने के आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है। आरोपियों के दोषी या निर्दोष होने का फैसला ट्रायल के दौरान पेश होने वाले सबूतों और गवाहों के आधार पर होगा।
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने 5 नवंबर को अपना फैसला सुनाया। अदालत के सामने आठ आरोपियों की ओर से विशेष NIA अदालत के 12 जनवरी 2024 और 13 फरवरी 2024 के आदेशों को चुनौती दी गई थी। इन आदेशों के जरिए आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आरोप तय किए गए थे। आरोपियों का कहना था कि उनके खिलाफ UAPA लगाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। बचाव पक्ष ने बरामद वीडियो, ऑनलाइन धमकियों और किसी प्रतिबंधित संगठन से जुड़ाव के सबूतों पर भी सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को आरोपमुक्त करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना और अपीलें खारिज कर दीं।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक साजिश के मामलों में प्रत्यक्ष सबूत या प्रत्यक्षदर्शी का न होना अपने आप में आरोपियों को आरोपमुक्त करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत के मुताबिक, साजिश का आकलन घटनाओं और परिस्थितियों को एक साथ देखकर भी किया जा सकता है। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के चरण में अदालत को पूरे मामले का ट्रायल नहीं करना होता। इस स्तर पर यह देखा जाता है कि अभियोजन की ओर से पेश सामग्री प्रथम दृष्टया मामला बनाती है या नहीं। सबूतों की विश्वसनीयता और गवाहों के बयानों का विस्तृत मूल्यांकन मुकदमे की सुनवाई के दौरान किया जाएगा।
यह मामला उदयपुर के दर्जी कन्हैयालाल टेली की हत्या से जुड़ा है। 28 जून 2022 को दो हमलावर ग्राहक बनकर उनकी दुकान पर पहुंचे थे और धारदार हथियार से हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। अभियोजन के अनुसार, सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट साझा किए जाने को लेकर कन्हैयालाल को धमकियां मिली थीं। इसी विवाद को हत्या की वजह बताया गया। घटना के बाद हत्या का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया था, जिसने देशभर में आक्रोश पैदा किया था। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की और आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में मुकदमा चला।
आठ आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा 16, 18 और 20 के तहत आरोप कायम हैं। इनमें आतंकवादी कृत्य, आतंकवादी गतिविधि की साजिश और आतंकवादी गिरोह या संगठन की सदस्यता से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। जिन आठ आरोपियों की अपीलें खारिज हुई हैं, उनमें मोहम्मद रियाज अत्तारी, मोहम्मद गौस, मोहसिन खान, आसिफ हुसैन, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली, मोहम्मद जावेद खान और मुस्लिम खान शामिल हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद आठों आरोपियों के खिलाफ विशेष NIA अदालत में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में सबूत और गवाह पेश करने होंगे। बचाव पक्ष को भी उन सबूतों और गवाहियों को चुनौती देने का अवसर मिलेगा। हाईकोर्ट ने साफ किया है कि इस स्तर पर दिया गया फैसला आरोपियों के दोष या निर्दोष होने का अंतिम निर्धारण नहीं है। निचली अदालत मुकदमे के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करेगी।
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