
Rajasthan Politics : जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत फूंक फूंककर राजनीतिक कदम रख रहे हैं, क्योंकि उनके सामने राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई है थोड़ी सी भी सावधानी हटी और दुर्घटना घटी जैसी स्थिति से बचने के लिए राजनीतिक नियुक्तियों और अन्य पार्टी गतिविधियों और नियुक्तियों को लेकर बहुत सोच विचार कर कदम उठा रहे हैं। राजनीति के हिसाब से और ज्योतिष के हिसाब से मकर सक्रांति के बाद उनका समय बदल रहा है। विधानसभा सत्र की अधिसूचना भी जारी हो जाएगी और मकर संक्रांति के बाद सूर्य की दिशा भी बदल जाएगी। फिर चक्र शुरू समझो।
सभी रास्ते बंद
अब तय हो चुका है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चुनाव से पहले कोई संकट नहीं है। आलाकमान उनके हिसाब से सब कुछ कार्य कर रहा है। अजय माकन घर बैठ चुके हैं। रंधावा जी गहलोत की सूचियों को फटाफट पास कर रहे हैं। ऐसे में सचिन पायलट (Sachin Pilot) के समर्थकों का मानना है कि पायलट के लिए सारे दरवाजे कांग्रेस में बंद दिख रहे हैं। अति महत्वकांक्षी पायलट अब अपना क्या कदम उठाएंगे, इसकी प्रतीक्षा उनके समर्थकों को भी है और कांग्रेस को भी।
सुर बदलने लगे
अशोक गहलोत के हाथ मजबूत होते देख उनके कई विरोधी अब अपने सुर बदल चुके हैं। एक मंत्री जी जो ज्यादा बोल रहे थे अब चुप्पी साध गए हैं। कुछ बड़बोले विधायक भी अब चुपचाप हैं। पार्टी के पदाधिकारियों ने भी बदलते समय में अब चुप रहने में ही अपनी भलाई समझ ली है। सचिन पायलट के मीडिया समर्थक और अन्य नेता अब कुछ भी टीका टिप्पणी करने से पहले सब कुछ संभल कर कर रहे हैं।
जम गये डोटासरा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में रोजाना 25 किलोमीटर की पदयात्रा की और राहुल गांधी के हमसफर बने रहे। राहुल गांधी उनसे यात्रा के दौरान प्रभावित हुए बिना नहीं रहे, इसलिए अब डोटासरा के मन में चल रहा डर खत्म हो गया है। उन्हें विश्वास है कि चुनाव में टिकट तो उनके हस्ताक्षर से ही दिए जाएंगे।
कुर्सी बचाने की जुगत
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया इन दिनों पूरी ताकत के साथ अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं। पहली बार उन्हें दिल्ली से लगा है कि कुर्सी जा सकती है। इसलिए वे उन लोगों से संबंध सुधार रहे हैं। जिनसे संबंध खराब चल रहे थे, मीडिया में इस तरह की खबरें चला रहे हैं कि उनकी कुर्सी को कोई खतरा नहीं है जबकि दिल्ली में ऐसी स्थिति नहीं नजर आती है।
किरकिरी कराई एसीबी के कार्यकारी डीजे हेमंत प्रियदर्शी ने एक तुगलकी आदेश निकाल कर सरकार की अच्छी किरकिरी करा दी अब यह आदेश उन्होंने वापस ले लिया है, कि एसीबी जिसको ट्रैप करेगी, पकड़ेगी उसकी फोटो और नाम मीडिया में जारी होंगे।
जानकारों की माने तो मुख्यमंत्री गहलोत इस पुलिस अधिकारी से बेहद नाराज हुए हैं, इसलिए उनकी अगली सूची में विदाई तय मानी जा रही है और कहीं बिठाया जाएगा।
कमान खिलाड़ियों को नहीं राजस्थान को लेकर भाजपा का राष्ट्रीय आलाकमान लगता है बड़ी चुक कर रहा है, क्योंकि अशोक गहलोत जैसे अनुभवी नेता के सामने उसने किसी अनुभवी नेता को उतारना उचित नहीं समझा है और खिलाड़ियों की अपेक्षा प्रेक्टिस करने वालों को कमान दे दी है। भाजपा के धुरंधर राज्य के गुलाबचंद कटारिया वसुंधरा राजे राजेंद्र राठौड़ घनश्याम तिवारी वासुदेव देवनानी तथा अन्य कई दूर बैठकर तमाशा देख रहे हैं, परंतु जिनके हाथ से कमान है वे ज्यादा अनुभवी नहीं है इसीलिए गहलोत का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे हैं।