हम दो, हमारे सत्रह, राजस्थान का ये मामला जान सिर पकड़ लेंगे आप
भारत
चेतना मंच
27 Aug 2025 11:52 AM
21वीं सदी में जब देश डिजिटल इंडिया, चंद्रयान और विकासशील अर्थव्यवस्था की बात कर रहा है उस समय राजस्थान के आदिवासी अंचल से एक ऐसी खबर सामने आई है जो सरकारी नीतियों, जनसंख्या नियंत्रण अभियान और जमीनी हकीकत की सच्चाई उजागर करती है। उदयपुर जिले के झाड़ोल क्षेत्र में रहने वाली 55 वर्षीय रेखा कालबेलिया ने हाल ही में अपने 17वें बच्चे को जन्म दिया है। यह खबर इलाके में चर्चा का विषय बन गई है लेकिन इसके पीछे की कहानी कहीं ज्यादा दर्दनाक और चिंताजनक है। Rajasthan News
भंगार बेचकर चलता है परिवार
रेखा और उनके पति कवरा कालबेलिया का परिवार घोर गरीबी में जी रहा है। भंगार इकट्ठा कर दो वक्त की रोटी जुटाने वाला ये परिवार न घर का मालिक है और न स्थायी आमदनी का कोई जरिया। बच्चों को पढ़ाने की बात तो दूर कई बार उनके पास उन्हें भरपेट खिलाने तक के साधन नहीं होते। कवरा बताते हैं कि ब्याज पर कर्ज लेकर बच्चों को पाल रहे हैं। अब तक लाखों रुपये चुका चुके हैं, लेकिन साहूकार का पूरा ब्याज चुकता नहीं हुआ।
शिक्षा और योजना से वंचित
रेखा और कवरा के परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान तो आवंटित हुआ लेकिन जमीन उनके नाम न होने के कारण वे उस घर में नहीं रह पा रहे हैं। पूरा परिवार आज भी बच्चों समेत बिना छत के जीने को मजबूर है। शिक्षा की बात करें तो बच्चों को स्कूल भेजने का अवसर भी नहीं मिला। परिवार पूरी तरह से सरकारी योजनाओं और सहायता से वंचित नजर आता है।
17वीं संतान को बताया चौथी
झाड़ोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रोशन दरांगी ने बताया कि जब रेखा को अस्पताल लाया गया तो परिवार ने इसे चौथी डिलीवरी बताया। लेकिन बाद में जांच में पता चला कि यह उनकी 17वीं संतान है। डॉक्टरों ने अब रेखा और उनके पति को स्थायी नसबंदी के लिए जागरूक करने की बात कही है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।
यह मामला सिर्फ एक महिला या एक परिवार की नहीं है बल्कि यह गांव, गरीबी और गुमनामी में दबे हजारों परिवारों की कहानी है जो आज भी सरकारी योजनाओं की पहुंच से कोसों दूर हैं। जब तक आदिवासी क्षेत्रों का समग्र विकास नहीं होगा जब तक शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी मूलभूत जरूरतें हर घर तक नहीं पहुंचेंगी तब तक भारत विकसित नहीं सिर्फ कागजों में विकासशील बना रहेगा। Rajasthan News