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21 मई 1991 की वह रात भारतीय राजनीति के इतिहास में एक ऐसा दर्दनाक अध्याय बन गई, जिसे देश कभी भूल नहीं सकता। तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में हुए आत्मघाती बम विस्फोट ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री की जिंदगी छीन ली थी।

Rajiv Gandhi Death Anniversary : 21 मई 1991 की वह रात भारतीय राजनीति के इतिहास में एक ऐसा दर्दनाक अध्याय बन गई, जिसे देश कभी भूल नहीं सकता। तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में हुए आत्मघाती बम विस्फोट ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री की जिंदगी छीन ली थी। इस हमले ने न केवल कांग्रेस पार्टी को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि पूरे देश को शोक में डुबो दिया था। एलटीटीई की आत्मघाती हमलावर धनु ने फूलों की माला पहनाने और चरण स्पर्श करने के बहाने विस्फोट किया, जिसमें राजीव गांधी समेत कई लोगों की मौत हो गई। उस घटना के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई थी। Rajiv Gandhi Death Anniversary
राजीव गांधी के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन में रखा गया था। यहां देश-विदेश से लाखों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। आम नागरिकों से लेकर दुनिया के कई बड़े नेता तक इस दुखद क्षण के गवाह बने। हर चेहरे पर गम और आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे। उस समय पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ भी प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली पहुंचे थे। वहीं उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बेनजीर भुट्टो भी श्रद्धांजलि देने आई थीं। दोनों एक ही देश से थे, लेकिन राजनीतिक कटुता इतनी गहरी थी कि पूरे कार्यक्रम के दौरान एक-दूसरे से दूरी बनाए रखी। Rajiv Gandhi Death Anniversary
तीन मूर्ति भवन से वीर भूमि तक निकली राजीव गांधी की अंतिम यात्रा भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी शव यात्रा में गिनी जाती है। दिल्ली की सड़कें लोगों से पूरी तरह भर चुकी थीं। भीषण गर्मी के बावजूद लाखों लोग अपने प्रिय नेता की एक झलक पाने के लिए घंटों खड़े रहे। राजपथ, इटो और राजघाट के आसपास का पूरा इलाका शोक में डूबा दिखाई दे रहा था। लोगों के हाथों में फूल थे और आंखों में आंसू। ऐसा लग रहा था मनो पूरा देश अपने युवा नेता को अंतिम विदाई देने सड़कों पर उतर आया हो। राजीव गांधी की अंत्येष्टि में दुनिया के कई बड़े नेता शामिल हुए। यासर अराफात सबसे ज्यादा भावुक नजर आए। गांधी परिवार से उनके व्यक्तिगत संबंध बेहद करीबी थे। अंतिम संस्कार के दौरान कई बार उनकी आंखें नम हो गईं। इसके अलावा ब्रिटेन के चार्ल्स III, अफगानिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्लाह और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री खालिदा जिया सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां मौजूद रहीं। Rajiv Gandhi Death Anniversary
24 मई 1991 की शाम वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। उस समय सोनिया गांधी अपने बेटे राहुल गांधी को संभालती नजर आईं। राहुल गांधी ने पिता की चिता की अनदेखी कर मुखाग्नि दी। पास में खड़ी प्रियंका गांधी वाड्रा की आंखें भी नम थीं। वीर भूमि पर मौजूद हजारों लोगों के लिए यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। Rajiv Gandhi Death Anniversary
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