दैनिक जागरण के साहित्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकतंत्र, असहमति के अधिकार और Gen Z की आकांक्षाओं पर विचार रखे। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र को जागरण साहित्य सृजन सम्मान से सम्मानित किया गया।

National News : देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र समूह दैनिक जागरण की ओर से शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को राजधानी दिल्ली में साहित्य और पत्रकारिता को समर्पित एक महत्वपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक एवं लेखक नरेन्द्र मोहन की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। समारोह में प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र को ‘जागरण साहित्य सृजन सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा, पत्रकारिता की जिम्मेदारियों, लोकतांत्रिक मूल्यों और नई पीढ़ी की बदलती आकांक्षाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दैनिक जागरण समूह का यह आयोजन साहित्यकारों के योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ समाज में वैचारिक संवाद को प्रोत्साहित करने का अवसर भी बना। कार्यक्रम के माध्यम से नरेन्द्र मोहन के साहित्यिक और पत्रकारिता संबंधी योगदान को याद किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में लोकतंत्र में असहमति के अधिकार, संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही और युवा पीढ़ी की सोच को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समारोह का प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र को ‘जागरण साहित्य सृजन सम्मान’ प्रदान किया जाना रहा। हिंदी साहित्य में गीत और नवगीत विधा को समृद्ध करने वाले डॉ. मिश्र का सम्मान उनकी दीर्घकालीन साहित्यिक साधना और रचनात्मक योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के अंतर्गत दिया जाने वाला यह सम्मान हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वाले रचनाकारों को प्रोत्साहित करने की पहल का हिस्सा है। इस सम्मान के अंतर्गत 11 लाख रुपये की सम्मान राशि और स्मृति चिह्न प्रदान किए जाने का प्रावधान है। डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र हिंदी गीत और नवगीत की परंपरा के प्रतिष्ठित रचनाकार हैं। उनकी रचनाओं में भारतीय समाज, मानवीय संवेदनाओं, जीवन के अनुभवों और सांस्कृतिक मूल्यों की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। उनके सम्मान से हिंदी साहित्य में गीत विधा की भूमिका और उसके समकालीन महत्व को भी पहचान मिली है। हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने में रचनाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे सम्मान साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भाषा, कविता और साहित्य की विभिन्न विधाओं से जोड़ने में भी सहायक होते हैं। National News
समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन असहमति और अराजकता के बीच अंतर बनाए रखना भी आवश्यक है। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं की जवाबदेही और उनकी विश्वसनीयता के महत्व को रेखांकित किया। उनके संबोधन में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि लोकतंत्र केवल अधिकारों की व्यवस्था नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों और संस्थाओं की जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण होती हैं। राजनाथ सिंह ने नरेन्द्र मोहन को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व, विचारों और पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोहन की लेखनी में विचारों की स्पष्टता और सामाजिक सरोकार दिखाई देते थे। उनके साथ संवाद करना और उनके विचारों को सुनना सीखने का अवसर प्रदान करता था। रक्षा मंत्री के संबोधन ने लोकतंत्र में विचारों की विविधता, असहमति की अभिव्यक्ति और संस्थागत जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की आवश्यकता को सामने रखा। National News
कार्यक्रम में नई पीढ़ी की सोच, उसकी अपेक्षाओं और नीति निर्माण में उसकी भागीदारी का विषय भी महत्वपूर्ण रहा। राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलते समय में युवाओं की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को समझना जरूरी है। किसी भी देश की प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि उसकी नीतियां वर्तमान की चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर बनाई जाएं। आज की युवा पीढ़ी तकनीक, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक बदलाव और नए अवसरों से जुड़ी अनेक अपेक्षाएं रखती है। ऐसे में नीति निर्माण की प्रक्रिया में युवाओं के विचारों और अनुभवों को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है। रक्षा मंत्री ने पीढ़ियों के बीच संवाद की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित किया। अनुभव और नई सोच के बीच बेहतर तालमेल से समाज को नई दिशा मिल सकती है। युवाओं की ऊर्जा और वरिष्ठ पीढ़ी के अनुभव का समन्वय सामाजिक तथा आर्थिक विकास में उपयोगी साबित हो सकता है। उन्होंने जेनरेशन जेड यानी Gen Z की जागरूकता और बदलते सामाजिक परिवेश का उल्लेख करते हुए युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को समझने पर जोर दिया। उनके संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य और तकनीकी बदलावों जैसे समकालीन विषयों का भी उल्लेख हुआ। National News
दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेन्द्र मोहन हिंदी पत्रकारिता और साहित्य जगत की महत्वपूर्ण हस्तियों में शामिल रहे। उनके लेखन और संपादकीय दृष्टिकोण ने हिंदी पत्रकारिता में विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी जयंती पर आयोजित समारोह उनके योगदान को याद करने और पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धांतों पर विचार करने का अवसर बना। नरेन्द्र मोहन का लेखन केवल समाचारों और समसामयिक घटनाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें साहित्यिक संवेदना और सामाजिक सरोकार भी दिखाई देते थे। उनके विचारों और लेखन ने पाठकों के बीच वैचारिक संवाद को बढ़ावा दिया। राजनाथ सिंह ने नरेन्द्र मोहन के व्यक्तित्व को याद करते हुए उनके लेखन की सराहना की। उन्होंने उनके साहित्यिक पक्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि वे गद्य और पद्य दोनों विधाओं में सक्रिय थे। उनकी रचनाओं में जीवन मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता की झलक मिलती थी। नरेन्द्र मोहन की स्मृति में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात को रेखांकित करता है कि पत्रकारिता की भूमिका केवल घटनाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं है। समाज के सामने महत्वपूर्ण सवाल उठाना, विचारों को स्थान देना और जनहित से जुड़े विषयों पर संवाद को प्रोत्साहित करना भी पत्रकारिता की जिम्मेदारियों में शामिल है। National News
दैनिक जागरण समूह का ‘हिंदी हैं हम’ अभियान हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अभियान के अंतर्गत साहित्यकारों और रचनाकारों के योगदान को सामने लाने तथा हिंदी के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ाने के प्रयास किए जाते हैं। ‘जागरण साहित्य सृजन सम्मान’ इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाला आयोजन है। इसके माध्यम से साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले रचनाकारों को पहचान मिलती है और साहित्यिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र को सम्मानित किया जाना गीत और नवगीत की उस परंपरा को रेखांकित करता है, जिसने हिंदी साहित्य में सामाजिक जीवन और मानवीय अनुभवों को अभिव्यक्ति दी है। साहित्यकारों का सम्मान समाज में रचनात्मक कार्यों के महत्व को स्थापित करने और नए लेखकों को प्रेरित करने में भी योगदान देता है। हिंदी भाषा का विकास तभी व्यापक रूप से संभव है, जब साहित्य को पाठकों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं और विभिन्न पीढ़ियों के बीच साहित्यिक संवाद को बढ़ावा मिले। National News
दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से साहित्य, पत्रकारिता और समकालीन सामाजिक विमर्श के बीच संबंधों को सामने लाया गया। एक ओर डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र को सम्मानित कर हिंदी गीत और नवगीत की परंपरा को पहचान दी गई, वहीं दूसरी ओर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संबोधन में लोकतांत्रिक मूल्यों, संस्थागत जवाबदेही और युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं पर विचार रखे गए। नरेन्द्र मोहन की जयंती के अवसर पर आयोजित यह समारोह उनकी स्मृति को सम्मान देने के साथ-साथ हिंदी पत्रकारिता और साहित्य की जिम्मेदारियों पर चर्चा का मंच भी बना। कार्यक्रम में सामने आए विचारों ने इस बात को रेखांकित किया कि साहित्य और पत्रकारिता दोनों समाज को समझने, विचारों को अभिव्यक्ति देने और सार्वजनिक जीवन में सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। National News
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