
RAM V SUTAR[/caption]
Ram V.Sutar: पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने श्री राम कृष्ण जोशी के बारे में सुना जो एक प्रसिद्ध ड्राइंग टीचर थे । उनका नाम सुनकर उनके पास पेंटिंग सीखने के लिए चले गए । जोशी जी उनसे प्रभावित हुए और उन्हें अपना शिष्य स्वीकार कर लिया। उनके गुरु जी ने उनके शिवाजी और भवानी आर्ट वर्क को मुंबई में एक एग्जिबिशन में भेजा, जहां उन्हें सिल्वर मेडल प्राप्त हुआ यह उनका पहला अवार्ड था। फिर एक दौर ऐसा भी आया जब कला की तरफ ज्यादा झुकाव से उनकी पढ़ाई लिखाई प्रभावित होने लगी, मैट्रिक के इंतिहान के दौरान उनके पिता का भी देहांत हो गया इस सब का नतीजा यह हुआ कि वे परीक्षा में फेल हो गए ।
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सुतार ने भारत में राजनेताओं से लेकर ऐतिहासिक नायकों तक की इतनी मूर्तियों को बनाने में योगदान दिया है कि उन्हें आज का विश्वकर्मा कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। गुजरात में बनी दुनिया की सबसे ऊंची 182 मीटर की मूर्ति राम वी सुतार ने ही तैयार की है। दिल्ली की 10 फीट लंबी गोविंद वल्लभ पंत की कांस्य प्रतिमा, बिहार में कर्पूरी ठाकुर, अनुग्रह नारायण सिन्हा की मूर्ति, अमृतसर में महाराजा रणजीत सिंह की 21 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ संसद के अंदर लगी महात्मा गांधी की मूर्ति को भी सुतार ने ही आकार दिया है। संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के मुख्यालय पर महात्मा गांधी की प्रतिमा का शिल्प भी राम वनजी सुतार ने किया था। महात्मा गांधी की यह पहली मूर्ति है, जिसे यूएन मुख्यालय में स्थापित किया गया। अयोध्या में लता मंगेशकर को समर्पित लगा चौक पर लगी वीणा की विशाल प्रतिमा भी सुतार ने ही तैयार की है।