
रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों के आपत्तिजनक अंश जिसमें समस्त महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों को सामाजिक, धार्मिक स्तर पर नित्यप्रति अपमानित होना पड़ता है, को संशोधित/प्रतिबंधित करने एवं पीड़ित वर्ग को सम्मान दिलाने हेतु पत्र मा. राष्ट्रपति जी व मा. प्रधानमंत्री जी को प्रेषित। pic.twitter.com/rLmuoFKgRs
— Swami Prasad Maurya (@SwamiPMaurya) February 8, 2023
इससे पहले 7 फरवरी को किए गए ट्वीट में स्वामी प्रसाद मौर्य ने लिखा था कि -"माननीय प्रधानमंत्री जी आप चुनाव के समय इन्हीं महिलाओं, आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों को हिंदू कहते हैं। आरएसएस प्रमुख, भागवत जी कहते हैं कि जाति पंडितों ने बनाई। तो आखिर इन्हें नीच, अधम, प्रताड़ित अपमानित करने वाली रामचरित्र मानस की आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटाने हेतु पहल क्यों नहीं।"मानस की आपत्तिजनक कुछ चौपाइयों को संशोधित व प्रतिबंधित करने की मांग को, कुछ लोग श्रीराम, हिंदू धर्म और रामचरितमानस से जोड़कर मामले को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे ही लोग महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों के 97% आबादी के सम्मान के विरोधी हैं।
— Swami Prasad Maurya (@SwamiPMaurya) February 8, 2023
रामचरितमानस को लेकर सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा किया जा रहा एक के बाद एक ये ट्वीट लगातार इस विवाद में 'आग में घी डालने' जैसा काम कर रहा है।मा. प्रधानमंत्री जी आप चुनाव के समय इन्हीं महिलाओं, आदिवासियों, दलितों, पिछड़ो को हिंदू कहते हैं। आरएसएस प्रमुख, भागवत जी कहते हैं कि जाति पंडितों ने बनाई। तो आखिर इन्हें नीच, अधम, प्रताड़ित, अपमानित करने वाली रामचरित्र मानस की आपत्तिजनक टिप्पड़ीयों को हटाने हेतु पहल क्यों नहीं।
— Swami Prasad Maurya (@SwamiPMaurya) February 7, 2023