वीर तेजाजी की जन्म जयंती के अवसर पर राजस्थान की लोकआस्था, सामाजिक चेतना और लोकनायको की परंपरा को केंद्र में रखते हुए समुत्कर्ष समिति के तत्वावधान में 150वी समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। गोष्ठी का मुख्य विषय “रामदेवजी और तेजाजी राजस्थान की लोकआस्था और सामाजिक चेतना के लोकनायक” रहा।

National News : वीर तेजाजी की जन्म जयंती के अवसर पर राजस्थान की लोकआस्था, सामाजिक चेतना और लोकनायकों की परंपरा को केंद्र में रखते हुए समुत्कर्ष समिति के तत्वावधान में 150वीं समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। गोष्ठी का मुख्य विषय “रामदेवजी और तेजाजी : राजस्थान की लोकआस्था और सामाजिक चेतना के लोकनायक” रहा। इस दौरान वक्ताओं ने बाबा रामदेवजी और वीर तेजाजी के जीवन, संघर्ष, लोककल्याण की भावना, सामाजिक समरसता, गौरक्षा, जीव-दया और वचनबद्धता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे। समुत्कर्ष समिति के अध्यक्ष संजय कोठारी एवं सचिव विनोद चपलोत ने बताया कि समिति की यह 150वीं विचार गोष्ठी थी। इस ऐतिहासिक अवसर पर राजस्थान की लोक परंपरा में विशेष स्थान रखने वाले बाबा रामदेवजी और वीर तेजाजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को सामाजिक चेतना के व्यापक संदर्भ में समझने का प्रयास किया गया। National News
ऑनलाइन विचार गोष्ठी का शुभारंभ आर्य सत्य प्रिय द्वारा लोकदेवताओं की स्तुति में प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद पीयूष दशोरा ने विषय प्रवर्तन करते हुए बाबा रामदेवजी और वीर तेजाजी के जीवन-दर्शन तथा समाज पर उनके प्रभाव की रूपरेखा प्रस्तुत की। पीयूष दशोरा ने कहा कि बाबा रामदेवजी ने ‘जम्मा जागरण’ तथा अपनी रचना ‘चौबीस प्रमाणियां’ के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश दिया। वहीं वीर तेजाजी का जीवन सत्य, वचनबद्धता और गौ रक्षा के लिए किए गए बलिदान का उदाहरण माना जाता है। National News
गोष्ठी में डॉ. अनिल दशोरा ने बाबा रामदेवजी के सामाजिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने ‘जम्मा जागरण’ के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। उनके विचारों में सामाजिक ऊंच-नीच और भेदभाव के विरुद्ध चेतना का महत्वपूर्ण स्थान रहा। उन्होंने कहा कि ‘चौबीस प्रमाणियां’ जैसी रचनाओं के माध्यम से बाबा रामदेवजी की परंपरा में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश दिखाई देता है। यही कारण है कि राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बाबा रामदेवजी की लोकआस्था आज भी व्यापक रूप से दिखाई देती है। National News
अशोक पाटीदार ने वीर तेजाजी के जीवन को सत्य, वचनबद्धता और नैतिक मूल्यों से जोड़ते हुए उनके लोकचरित्र के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वीर तेजाजी की लोकगाथा में गायों की रक्षा, कर्तव्यनिष्ठा और दिए हुए वचन को निभाने का संदेश प्रमुख रूप से सामने आता है। लोकमान्यता के अनुसार लाछां गूजरी की गायों की रक्षा के लिए तेजाजी ने संघर्ष किया और इसी क्रम में अपने प्राणों की बाजी लगा दी। इसके साथ ही एक सर्प को दिए गए वचन को निभाने की उनकी कथा उनकी अदम्य वचनबद्धता का प्रतीक मानी जाती है। वक्ताओं ने कहा कि वीर तेजाजी की लोकगाथा को केवल धार्मिक आस्था के नजरिए से नहीं, बल्कि सत्य, कर्तव्य और लोककल्याण के मूल्यों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। National News
शिक्षाविद् गोविन्द सिंह शक्तावत ने कहा कि राजस्थान के लोकनायकों ने अपने समय की सामाजिक परिस्थितियों में लोगों को जागरूक करने का काम किया। उनके अनुसार बाबा रामदेवजी की परंपरा में कामड़िया पंथ सामाजिक समरसता और सर्वधर्म समभाव से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में सामने आता है। उन्होंने कहा कि इन लोकनायकों की भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें समाज सुधार, लोककल्याण और मानवीय मूल्यों का संदेश भी निहित था। लोकदेवताओं की परंपरा ने आमजन को अपनी भाषा और अपनी लोकसंस्कृति के माध्यम से सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का काम किया। National News
विद्यासागर ने कहा कि बाबा रामदेवजी और वीर तेजाजी की लोकपरंपरा को आज के संदर्भ में देखने की आवश्यकता है। उन्होंने जीव-दया, गौरक्षा, असहायों की सेवा और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में पर्यावरण संतुलन और सामाजिक कल्याण बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे समय में लोकनायकों की शिक्षाओं से जुड़े मानव सेवा, जीव-दया और प्रकृति संरक्षण जैसे मूल्यों को नए संदर्भ में समझना उपयोगी हो सकता है। National News
विचार गोष्ठी के दौरान प्राचार्य संजय लूणावत और विदुषी रश्मि मेहता ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के साहित्यिक सत्र में गरिमा खंडेलवाल ने ओजस्वी एवं भावपूर्ण काव्य पाठ प्रस्तुत कर बाबा रामदेवजी और वीर तेजाजी की लोकमहिमा को स्वर दिया। कार्यक्रम का संचालन शिवशंकर खण्डेलवाल ने किया। National News
समुत्कर्ष समिति की इस ऑनलाइन विचार गोष्ठी में गोपाल माली, कविता शर्मा, अवनीश तिवारी, अरविंद सिंह सिसोदिया, मुकेश जैन, चैनशंकर दशोरा, गिरीश चौबीसा, रामेश्वर प्रसाद शर्मा, डॉ. दिनेश बंसल, सुदर्शना भट्ट, डॉ. जगदीश कुमावत, नर्बदा देवी, तरुण कुमार दाधीच तथा तरुण शर्मा सहित अनेक प्रतिभागी शामिल हुए। National News
वीर तेजाजी की जन्म जयंती के अवसर पर हुई इस विचार गोष्ठी ने यह प्रश्न भी सामने रखा कि राजस्थान के लोकनायकों को केवल धार्मिक आस्था और लोककथाओं तक सीमित करके देखने के बजाय उनके सामाजिक एवं नैतिक संदेशों को वर्तमान संदर्भ में किस प्रकार समझा जाए। बाबा रामदेवजी से जुड़ी सामाजिक समरसता की परंपरा और वीर तेजाजी की लोकगाथा में दिखाई देने वाली सत्य एवं वचनबद्धता की भावना राजस्थान की लोकसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोकआस्था के इन प्रतीकों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, सेवा, जीव-दया और कर्तव्य जैसे मूल्यों पर संवाद आज भी जारी है। समुत्कर्ष समिति की 150वीं विचार गोष्ठी इसी लोकपरंपरा को विचार-विमर्श के केंद्र में लाने का एक प्रयास रही। National News
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