Ramlala in Ayodhya
दीप जले मन मंदिर चहकें तीन लोक आलोकित दहकें पुष्प गंध से से तन मन महके हर घट-घट में गूंजे नाम आए रामलला निज धाम
धन्य धन्य यह नगरी अयोध्या धन्य राम मंदिर के योद्धा धन्य धन्य प्रभु सौ-सौ वंदन तुमको अर्पित तुलसी चंदन अविरल नयन नीर से सिंचित तुम्हे पुकारें हम निष्काम आए राम लला निज धाम
अब तक थे कुटिया में ऐसे प्रभु हो इक वनवासी जैसे मिला आज नयनों को यह पल अगणित वर्षों का अर्जित फल शंखनाद है यह नवयुग का बोल रहा जग जय श्रीराम आए रामलला निज धाम
शबरी के मेहमान राम है हनुमत के भगवान राम हैं कौशल्या के प्राण राम हैं रघुनन्दन गुणग्राम राम हैं तुलसी की चौपाई में हैं प्रनतपाल रघुनायक राम आए रामलला निज धाम
पुण्य पर्व अभिनव प्रकाश है सदियों की बुझ रही प्यास है दिव्य अयोध्या धन्य भरत भू राम भजन हर श्वास श्वास है मर्यादा की शिखर शिला पर हुए विराजित प्रभु श्री राम आए राम लला निज धाम