Rani Avantibai Lodhi : 1857 की क्रांति में इस वीरांगना ने किए थे अंग्रेजों के दांत खट्टे
Rani Avantibai Lodhi
भारत
चेतना मंच
20 Mar 2023 05:45 PM
Rani Avantibai Lodhi balidan divas : भारत में पुरुषों के साथ आर्य वीरांगनाओं ने भी देश, राज्य और धर्म, संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है। गोंडवाने की रानी दुर्गावती और झाँसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई के पदचिन्हों का अनुसरण करते हुए रामगढ (मध्य प्रदेश) की रानी वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी ने सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में वीरता के साथ अग्रेंजो से खुलकर लोहा लिया था। अंत में भारत की स्वाधीनता संग्राम के लिए अपने जान की बाजी लगा दी।
Rani Avantibai Lodhi balidan divas
वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को मनकेहणी के जमींदार राव जुझार सिंह जी के यहां हुआ था। 20 मार्च 1858 को इस वीरांगना ने रानी दुर्गावती का अनुसरण करते हुए युद्ध क्षेत्र में अपने आप को चारों तरफ से घिरता देख स्वंय को तलवार भोंक कर देश के लिए प्राणों का बलिदान दे दिया।
स्वयं का बलिदान देकर बचा ली भारत माता की लाज
अवंतीबाई ने अपने सीने तलवार भोंकते समय कहा- ‘‘हमारी दुर्गावती ने जीते जी बैरी के हाथ से अंग न छुए जाने का प्रण लिया था, इसे न भूलना‘‘। उनकी यह बात भी भविष्य के लिए भी हस्ताक्षर बन गयी। वीरांगना अवंतीबाई का ही अनुसरण करते हुए उनकी दासी ने भी स्वयं को तलवार भोंक कर अपना जीवन दे दिया।
निःसंदेह वीरांगना अवंतीबाई का जीवन जितना पवित्र, पराक्रमी तथा निष्कलंक रहा, उनका बलिदान भी उतनी ही यशस्वी रहा। धन्य है वह वीरांगना जिसने एक अद्वितीय उदहारण प्रस्तुत करते हुए 1857 ई की भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में 20 मार्च 1858 को देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसप्रकार उस महान वीरांगना ने अपना नाम भारत के गौरवशाली इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखवा लिया।
आज 20 मार्च 2023 को हम सभी उस आर्य वीरांगना के 165वें बलिदान दिवस पर शत्-शत् नमन और विनम्र श्रदांजलि अर्पित करते हैं।
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