
RapidX Rail Launch Date : उत्तर प्रदेश के मेरठ और दिल्ली के हजरत निमाजुद्दीन के बीच जल्द शुरू होने वाली रैपिड एक्स ट्रेन की कंमांड महिलाओं के हाथ में होगी। करीब 160 महिला ट्रेन संचालन से लेकर कंट्रोल पैनल तक में महिला अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका होगी।
आपको बता दें कि दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर का इसी माह शुभारंभ हो सकता है और रैपिड एक्स ट्रेन ट्रैक पर दौड़ सकती है। संभावना जताई जा रही है कि मेरठ दिल्ली के इस खंड का आगामी 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुभारंभ किया जा सकता है। रैपिड एक्स ट्रेन का संचालन शुरू होने से हाई स्पीड ट्रेन में सफर करने वाले लोगोें का सपना पूरा हो जाएगा।
जानकारी के अनुसार, मेरठ दिल्ली के बीच चलने वाली आधुनिक हाई स्पीड, हाई-फ्रीक्वेंसी रैपिड एक्स ट्रेनों के संचालन में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस खंड के परिचालन में महिला कर्मचारियों की भागीदारी पुरुष कर्मचारियों से अधिक होगी।
भारत ने देश की प्रथम रीजनल रेल द्वारा न सिर्फ तकनीक के क्षेत्र में कदम बढ़ाया है, बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया है। इस ट्रेन में आधुनिक भारत की एक नई तस्वीर देखने को मिलेगी। प्राथमिक खंड में रैपिड एक्स ट्रेनों के संचालन के लिए नियुक्त ट्रेन संचालकों में पुरुष संचालकों की तुलना में महिला संचालकों की संख्या अधिक है। इसके अलावा, स्टेशन कंट्रोल, प्रबंधन, संचालन एवं रखरखाव, ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर, ट्रेन अटेंडेंट, आदि में भी महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।
एनसीआरटीसी से अधिकारियों के अनुसार, शहरी परिवहन प्रणाली से परिचित कराने एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए पहले इन संचालकों को तीन महीने के लिए क्लासरूम स्टडीज़ के साथ-साथ सिमुलेटर पर ट्रेन चलाने और ट्रेन की गति पर नियंत्रण करने समेत अन्य ज़रूरी प्रशिक्षण दिए गए हैं। इस प्रशिक्षण में उन्हें आरआरटीएस प्रणाली में विश्व में पहली बार प्रयोग की जा रही ईटीसीएस लेवल-2 सिग्नलिंग प्रणाली, इसके रोलिंग स्टॉक, ट्रेन कंट्रोल सिस्टम आदि के बारे में प्रशिक्षित किया गया है। वहीं रैपिड एक्स ट्रेनों की परिचालन गति 160 किमी. प्रति घंटा है, जिसको ज्यादातर महिलाएं चलाएंगी।
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के प्राथमिक खंड में साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो सहित पांच स्टेशन है। आरआरटीएस का प्राथमिक खंड देश की ऐसी पहली रेलवे प्रणाली है, जिसे 160 किमी. प्रति घंटा की अधिकतम परिचालन गति पर इसकी सम्पूर्ण लंबाई को तय करने के लिए परिचालन हेतु खोला जा रहा है।