
IRCTC घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत कुल 14 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय कर दिए हैं। स्पेशल CBI जज विशाल गोगने ने सभी आरोपियों की मौजूदगी में यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव पर आईपीसी की धारा 420 और 120B के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(d) और 13(2) के तहत आरोप तय किए। IRCTC Scam
राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर केवल IPC 120B और 420 के तहत ट्रायल चलेगा, जबकि लालू यादव के मामले में उनके रेलवे मंत्री रहते हुए किए गए कृत्यों के कारण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी मुकदमा चलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि लालू यादव का टेंडरों में दखल रहा और इस घोटाले के कई सबूत CBI ने पेश किए हैं। हालांकि लालू, राबड़ी और तेजस्वी ने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताया। IRCTC Scam
कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को खड़ा होने के लिए कहा और उनके खिलाफ लगे सभी आरोपों का ब्यौरा दिया। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लागू नहीं होंगी, लेकिन सभी पर जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप तय किए गए हैं। कोर्ट ने लालू से पूछा कि क्या वे आरोप स्वीकार करते हैं, गिल्टी प्लीड करेंगे या मुकदमे का सामना करेंगे। लालू यादव ने कोर्ट में साफ शब्दों में सभी आरोपों को गलत और आधारहीन बताया और अपने खिलाफ लगाए गए दावों को खारिज कर दिया।
वहीं कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह सिर्फ घोटाला नहीं, बल्कि व्यापक भ्रष्टाचार और साजिश का मामला है। अदालत ने आरोपियों की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि CBI ने पेश किए गए सबूत इस मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं। कोर्ट ने माना कि इस घोटाले की योजना लालू प्रसाद यादव की जानकारी में बनाई गई थी और इसमें सभी आरोपी शामिल थे। इसके चलते लालू परिवार को प्रत्यक्ष लाभ हुआ, जबकि राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को अत्यंत कम कीमत में जमीन हासिल हुई।
IRCTC घोटाले में केवल लालू परिवार ही नहीं, बल्कि IRCTC के पूर्व ग्रुप जनरल मैनेजर वीके अस्थाना, आर के गोयल, साथ ही सुजाता होटल्स के निदेशक विजय और विनय कोचर भी आरोपियों की सूची में शामिल हैं। मामले की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके खिलाफ CBI के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं और उन्होंने सभी आरोपों को खारिज किया। इसके बावजूद, CBI ने अदालत में 28 फरवरी को यह दावा किया कि उनके पास अभियुक्तों के खिलाफ ठोस और पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जो इस घोटाले की गंभीरता को उजागर करते हैं। IRCTC Scam
CBI का दावा है कि जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री थे, उस दौरान बिहार के लोगों को मुंबई, जबलपुर, कोलकत्ता, जयपुर और हाजीपुर में ग्रुप D पदों पर नौकरी दी गई। लेकिन इन नौकरियों के बदले में आरोप है कि लोग अपनी जमीन लालू परिवार या उनके स्वामित्व वाली कंपनियों के नाम करवा रहे थे। CBI के अनुसार, यह पूरा मामला साजिश और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है, जिसमें नौकरी और संपत्ति के आदान-प्रदान के माध्यम से लालू परिवार को प्रत्यक्ष लाभ हुआ। IRCTC Scam