
Noida News: नोएडा उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध शहर है। हर कोई नोएडा के विषय में जानना चाहता है। यहां नोएडा के प्रतिदिन के सभी समाचार अखबारों के हवाले से हम समाचार प्रकाशित करते हैं। नोएडा शहर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों में 29 मई को क्या खास समाचार प्रकाशित हुए हैं यहां एक साथ पढऩे को मिलेंगे।
Noida News: समाचार अमर उजाला से
अमर उजाला अखबार ने अपने नोएडा संस्करण में मुख्य समाचार “बकाया नहीं चुकाने पर बगैर बिके फ्लैट सील, आरसी जारी, ओएसिस, शिवालिक होम और ला गैलेक्सिया पर माई सिटी रिपोर्टर यूपीसीडा ने शुरू की कार्रवाई” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने ग्रेटर नोएडा में बिल्डरों की लापरवाही पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। लंबे समय से बकाया राशि नहीं चुकाने वाले बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्राधिकरण ने पहली बार बिना बिके फ्लैटों को सील करने की कार्रवाई शुरू की है। यूपीसीडा ने ओएसिस, शिवालिक होम और ला गैलेक्सिया की बकाये की वसूली के लिए रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) भी जारी कर दी है। प्राधिकरण की ओर से शिवालिक होम्स परियोजना के दो दर्जन से ज्यादा फ्लैट सील किए गए हैं। इसके साथ ही तीनों बिल्डरों के बगैर बिके फ्लैट का सर्वे शुरू किया गया है। इन बिल्डरों ने वर्षों से सरकार का बकाया नहीं चुकाया है, जिससे पांच हजार से ज्यादा फ्लैट खरीदार रजिस्ट्री के लिए भटक रहे हैं। अहम है कि यूपीसीडा क्षेत्र के अधिकांश प्रोजेक्टों में रजिस्ट्री रुकी हुई है। पांच हजार से ज्यादा खरीदारों को फ्लैट पर कब्जा और मालिकाना हक नहीं मिल सका है। बिल्डरों की उदासीनता और बकाया भुगतान में देरी से को इसकी रजिस्ट्री रूकी है। शिवालिक होम्स (कॉसमॉस इंफ्रा इस्टेट प्रा. लि.) पर 86 लाख रुपये का बकाया है। प्राधिकरण की विशेष टीम ने फ्लैट्स की पहचान कर सर्वे शुरू कर दिया है। लगभग दो दर्जन अनसोल्ड फ्लैट्स की सीलिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो यूपीसीडा की - ओर से अब तक की सबसे सख्त -कार्रवाई मानी जा रही है। इसके साथ ही ओएसिस बिल्डमार्ट - और ला गैलेक्सिया भी यूपीसीडा के रडार पर हैं। ओएसिस बिल्डर पर 9 करोड़ और ला गैलेक्सिया पर आठ करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। दोनों के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी किए गए हैं।
इन बिल्डरों के खरीदारों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया तब तक नहीं शुरू होगी जब तक बकाया नहीं चुकाया जाता और आवश्यक दस्तावेज नहीं सौंपे जाते। वहीं ओएसिस के प्रोजेक्ट वेनिस हाइट्स में फ्लैटों की रजिस्ट्री भी रुकी हुई है, जबकि सैकड़ों परिवार पहले ही वहां रहना शुरू कर चुके हैं।
अमर उजाला अखबार ने अपने नोएडा संस्करण में मुख्य समाचार “फ्लैट के एसी में लगी आग नहीं चला फायर स्प्रिंकलर, आस्था ग्रीन सोसाइटी की घटना, बाल-बाल बचे बच्चे” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि ग्रेनो वेस्ट की आस्था ग्रीन सोसाइटी में बुधवार को एक फ्लैट में लगे एसी की इनर यूनिट में अचानक आग लग गई। यूनिट पिघलकर नीचे गिर गई, लेकिन कमरे में मौजूद बच्चा समय रहते भाग निकला और बाल-बाल बच गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के दौरान फायर स्प्रिंकलर सिस्टम काम नहीं कर रहा था। सोसाइटी के टावर चार के फ्लैट नंबर-103 में परिवार के साथ रहने वाले प्राशिक ने बताया कि बुधवार सुबह वह कार्यालय गए थे। घर में पत्नी और दो बच्चे थे। सुबह करीब 11 बजे एसी की इनर यूनिट में आवाज आई, जिसके बाद धुंआ निकलने लगा, फिर उसमें आग लग गई। उनके आठ साल और चार माह के बच्चे उसी कमरे में थे। बच्चे ने साहस दिखाकर छोटी बहन को लेकर - दूसरे कमरे में मां के पास ले गया।
आग लगने की सूचना पत्नी ने बिल्डर प्रबंधन को दी गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने सोसाइटी के ग्रुप में मैसेज किया, तब बिल्डर के कर्मचारी मदद के लिए उनके घर पर आए, लेकिन तब तक एसी पूरी तरह जल चुका था। एसी में आग लगने के कारण वह पिघल कर आलमारी पर भी गिर गया, जिससे अलमारी भी खराब हो गई।
Hindi News:
अमर उजाला ने 29 मई 2025 के अंक में प्रमुख समाचार “गैंगस्टर मामले में श्रीकांत त्यागी को हाईकोर्ट से राहत, कोर्ट ने लंबित आपराधिक कार्यवाही की रद्द” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीकांत त्यागी को गैंगस्टर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सत्र अदालत में उनके खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की अदालत ने श्रीकांत त्यागी की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। मामला गौतमबुद्ध नगर के फेज-दो थाना क्षेत्र का है। श्रीकांत के खिलाफ 2022 में गैंगस्टर का मामला दर्ज हुआ था। अधिवक्ता अमृता आर. मिश्रा ने दलील दी कि याची के खिलाफ की गई गैंगस्टर की कार्रवाई में अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। गैंगचार्ट पहले से मुद्रित प्रोफार्मा बिना न्यायिक विवेक के तैयार किया गया है। लिहाजा, याची के खिलाफ की गई गैंगस्टर की कार्रवाई अवैध है। याची की दलीलों का सरकारी अधिवक्ता तार्किक जवाब देने में विफल रहे। कोर्ट ने श्रीकांत के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई रद्द कर दी। वहीं फैसले के बाद न पुलिस कुछ बोल रही है और न ही ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी के एओए पदाधिकारी। एओए पदाधिकारियों ने टिप्पणी करने या प्रतिक्रिया देने से इन्कार कर दिया। वहीं सेंट्रल जोन के पुलिस अधिकारी भी पुलिस की कार्रवाई या आगे की तैयारी पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं ।
Noida News: समाचार दैनिक जागरण से
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में 29 मई 2025 का प्रमुख समाचार “700 करोड़ खर्च, फिर भी गांव तरसे एक-एक बूंद को, कई गांवों में डाली ही नहीं गई पाइप लाइन, मिलीभगत से ठेकेदारों को किया भुगतान” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि बसपा शासन काल में 2007 से 2012 के बीच गांवों में सीवर लाइन की तरह पानी की पाइप लाइन बिछाने का भी घोटाला हुआ था। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर 64 गांवों में पानी की पाइप लाइन बिछाने के लिए करीब 700 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए थे। करीब 30 ठेकेदारों ने पाइप लाइन बिछाने के टेंडर लिए। फाइलों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान करा लिया गया, लेकिन 15 से 16 वर्ष बीतने के बाद भी गांवों में पाइप लाइन से जलापूर्ति शुरू नहीं हुई है। अधिकांश गांव ऐसे हैं, जिनमें पाइप लाइन बिछी ही नहीं है।
प्राधिकरण ने मिलीभगत कर ठेकेदारों को बिना पाइप लाइन बिछाए ही भुगतान कर दिया। कार्य पर निगरानी की जिम्मेदारी परियोजना विभाग की थी। विभागीय सहायक प्रबंधक, प्रबंधक व वरिष्ठ प्रबंधक की रिपोर्ट और संस्तुति पर ही भुगतान का प्रविधान है। विभागीय प्रबंधकों ने भौतिक सत्यापन किए बिना ही फाइलों में कार्य पूर्ण होने की रिपोर्ट लगाकर बिल भुगतान की संस्तुति कर दी। नए इससे ठेकेदारों को बिना कार्य के ही भुगतान हो गया। प्राधिकरण अब गांवों मैं फिर से रास्तों की मरम्मत करा रहा है। मरम्मत के दौरान खोदाई की गई तो अधिकांश गांवों में पानी की पाइप लाइन नहीं मिली है। इनमें हबीबपुर, जलपुरा, ऐमनाबाद, सुधियाना, मायचा, कासना, गिरधरपुर, रोजा जलालपुर, रोजा याकूबपुर तीन दर्जन से अधिक गांव हैं।
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में प्रमुख समाचार “चारागाह की जमीन पर आवंटित हो गए औद्योगिक भूखंड” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि प्राधिकरण में 25 वर्ष पहले तैनात अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा औद्योगिक सेक्टर फेज तीन में सेक्टर-65, 67 के 592 आवंटियों, को भुगतना पड़ रहा है। उद्यम संचालन के लिए उन्हें प्राधिकरण से प्रापर्टी मार्गेज परमिशन, पर्चेजबल फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और कंप्लीशन सार्टिफिकेट लेने में दिक्कत आ रही है। कारण यह है कि प्राधिकरण ने औद्योगिक सेक्टर बनाकर भूखंड आवंटित कर दिए, उद्यमियों ने कब्जा लेकर लीज डीड करा प्राधिकरण में लीज रेंट तक जमा कर दिया। करोड़ रुपये प्लांट मशीनरी पर खर्च कर लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा दिया, लेकिन जमीन के अभिलेखों में सरकारी भूमि दर्ज है। यह दादरी तहसील में गांव गढ़ी चौखंडी, मामूरा, बसई ब्राउदहीन के माजरे में शामिल है। तीनों गांव की यह भूमि पशुचर या चारागाह (ग्राम समाज) के नाम पर दर्ज है। आश्चर्य की बात है कि प्राधिकरण के संज्ञान में आने के बाद जमीन का पुनर्ग्रहण नहीं किया गया। आवंटियों को वर्ष 2015 में तब पता चला कि जब दादरी तहसील से प्रत्येक औद्योगिक इकाई को (पौने दो करोड़ से आठ करोड़ रुपये) रिकवरी व सीलिंग का नोटिस आया। घबराए उद्यमियों ने निस्तारण के लिए नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (एनईए) में संपर्क साधा। तत्कालीन सीईओ से इस प्रकरण में विस्तार से एसोसिएशन पदाधिकारियों से बातचीत हुई, जल्द - राहत देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी - समस्या जस की तस बनी हुई है। हाल ही में फिर से इस प्रकरण में 100 आवंटियों को दादरी तहसील से - नोटिस जारी होने पर मामला गरमा गया। परेशान आवंटी एक बार फिर से इस मुद्दे को लेकर एनईए पहुंचे। इस प्रकरण को अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन ने दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के साथ आयोजित बैठक में रख कर उद्यम संचालन में आ रही दिक्कतों से अवगत कराया, जिस पर मुख्य संचिव मनोज कुमार सिंह ने उद्यमियों को आश्वासन दिया है कि इस मामले में आवंटियों को दिक्कत नहीं आने दी जाएगी, जल्द ही इस मामले पर शासनादेश जारी होगा। दादरी तहसीलदार ओम प्रकाश पासवान ने कहा कि यह प्रकरण पुराना है, विस्तार से देखना पड़ेगा।
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