तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्रि कड़गम (टीवीके) को लेकर चर्चा है कि विपक्षी एआईएडीएमके के कई और विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं।

Politics of Tamil Nadu : तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्रि कड़गम (टीवीके) को लेकर चर्चा है कि विपक्षी एआईएडीएमके के कई और विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार करीब 10 असंतुष्ट विधायक 15 अगस्त से पहले इस्तीफा देकर टीवीके का दामन थाम सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो विधानसभा में विजय सरकार की स्थिति और मजबूत हो जाएगी तथा बहुमत का आंकड़ा हासिल करना उसके लिए आसान हो सकता Politics of Tamil Nadu
सूत्रों के मुताबिक टीवीके ने इस पूरी रणनीति को आंतरिक रूप से 'आॅपरेशन एल' नाम दिया है। योजना के तहत पहले संबंधित विधायक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे और उसके बाद औपचारिक रूप से सत्तारूढ़ दल में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि यह प्रक्रिया संभावित उपचुनावों की घोषणा से पहले पूरी करने की तैयारी है, ताकि नए राजनीतिक समीकरणों के साथ चुनावी रणनीति बनाई जा सके। राज्य की राजनीति में यह घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ है। पिछले कुछ सप्ताह के दौरान एआईएडीएमके के कई नेता और पूर्व मंत्री टीवीके में शामिल हो चुके हैं। इससे पहले भी पार्टी के कुछ विधायकों ने सरकार के पक्ष में रुख अपनाकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। लगातार हो रहे दलबदल ने एआईएडीएमके के संगठन और विपक्षी ताकत दोनों पर असर डाला है।
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234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में फिलहाल कुछ सीटें रिक्त हैं। मौजूदा राजनीतिक स्थिति में टीवीके सबसे बड़े दल के रूप में अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी है, जबकि एआईएडीएमके के विधायकों की संख्या लगातार घट रही है। यदि प्रस्तावित इस्तीफे और नए शामिल होने वाले नेता टीवीके में आते हैं तो सरकार बहुमत के और करीब पहुंच सकती है, जिससे भविष्य की राजनीतिक चुनौतियां काफी हद तक कम हो जाएंगी।
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राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि पार्टी बदलने वाले विधायकों को आगामी उपचुनाव में टीवीके के टिकट पर चुनाव लड़ने का अवसर दिया जा सकता है। वहीं वरिष्ठ नेताओं को दोबारा जीतने की स्थिति में मंत्रिमंडल में जगह देने और अन्य नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारियां सौंपने की भी चर्चा है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी के भीतर लंबे समय से नेतृत्व शैली और संगठनात्मक फैसलों को लेकर असंतोष की बातें सामने आती रही हैं। कई नेताओं का मानना है कि वरिष्ठ कार्यकतार्ओं और क्षेत्रीय नेताओं की अनदेखी से नाराजगी बढ़ी है। हाल के दिनों में जिला स्तर पर हुए बदलावों ने भी इस असंतोष को और गहरा किया है, जिसके चलते कई नेता नए राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं।
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दूसरी ओर विपक्षी दलों ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बड़े पैमाने पर दलबदल के पीछे राजनीतिक और आर्थिक प्रलोभन काम कर रहे हैं। कुछ नेताओं ने इसे 'पॉलिटिकल वॉशिंग मशीन' तक करार दिया है। हालांकि टीवीके ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी में शामिल होने वाले नेता अपनी इच्छा से आ रहे हैं और कानूनी प्रक्रियाएं स्वतंत्र रूप से जारी रहेंगी।
तमिलनाडु की राजनीति में अगले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि एआईएडीएमके के और विधायक इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल होते हैं तो राज्य की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही संभावित उपचुनाव और मंत्रिमंडल विस्तार भी राज्य की सियासत की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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