Red Headed Vulture : दुधवा में मिला अदभुत जंतु , देख कर चौंक जाएंगे आप, कभी नहीं देखा होगा
Red Headed Vulture: Red headed vulture seen in South Sonaripur range of Dudhwa National Park
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 05:55 AM
Red Headed Vulture : दुधवा राष्ट्रीय उद्यान (डीएनपी) के दक्षिण सोनारीपुर रेंज में लाल सिर वाला गिद्ध देखा गया है । इसे ‘एशियाई राजा गिद्ध’ के नाम से भी जाना जाता है । डीटीआर के क्षेत्रीय निदेशक बी. प्रभाकर ने बताया कि कुछ दिन पहले जीवविज्ञानी विपिन कुमार ने अपने कैमरे में इस पंछी को रिकार्ड किया और इसके बारे में उद्यान प्रशासन को सूचित किया।
Red Headed Vulture :
लाल सिर वाले गिद्ध (Red Headed Vulture ) या एशियाई राजा गिद्ध को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) द्वारा गंभीर रूप से संकटापन्न प्रजातियों की सूची में डाला गया है। प्रभाकर ने कहा, "दुधवा में एशियाई राजा गिद्ध को कई साल बाद देखा गया है, जो काफी उत्साहजनक है।"उन्होंने बताया कि कि लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए महराजगंज जिले में एक गिद्ध प्रजनन केंद्र भी स्थापित किया गया है ।उन्होंने कहा कि गिद्ध मृत जानवरों को खाते हैं और इस प्रकार वे पर्यावरण की सफाई करते हैं।
क्यों खास है ये गिद्ध
यह मध्यम आकार का गिद्ध है ,इस गिद्ध की लंबाई लगभग 76-86 सेमी. होती है। यह अपने पंखों को लगभग 6 से 8.5 फीट तक फैला सकता है।वयस्क का सिर गहरे लाल से नारंगी रंग का होता है और अवयस्क थोड़े हल्के रंग का होता है।पंखों का आधार स्लेटी रंग का होता है । इसका वजन 6 किलोग्राम से अधिक होता है। नर के आँख की पुतली हल्के सफ़ेद रंग की होती है जबकि मादा की पुतली गाढ़े भूरे रंग की होती है। यह भारत, पाकिस्तान, म्यांमार, भूटान, नेपाल आदि देशों में पाया जाता है। भारत में मुख्य रूप से यह गुजरात और उलर-पूर्वी राज्यों में मिलता है।
यह दुनिया का पुराना गिद्ध है जो लगभग समूचे भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिणी चीन और इंडोचाइना में पाया जाता है।क्षेत्र और आवास
ऐतिहासिक रूप से यह गिद्ध अपने आवासीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में मौजूद था। भारतीय उपमहाद्वीप से लेकर पूर्व में दक्षिण पूर्वी एशिया तक इसकी उपस्थिती थी और भारत से सिंगापुर तक पाया जाता था। आज इसका आवासीय क्षेत्र उत्तरी भारत तक सिकुड़ कर रह गया है। यह खुले मैदानों में, खेतों में और रेगिस्तानी इलाकों में देखने को मिलता है। पतझड़ीय वनों में, पहाड़ों की तलहटी में और नदियों की घाटियों में भी पाया जाता है। प्रायः यह समुद्र सतह से 3000 फ़ुट की ऊँचाई तक ही पाया जाता है।