इस गिरावट का मुख्य कारण ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट थी। रिपोर्ट में कहा गया कि रूस से कच्चे तेल से भरे तीन जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे हैं। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदता रहा तो टैरिफ बढ़ सकते हैं।

Stocks are Falling : मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में रिकॉर्ड गिरावट देखने को मिली। कंपनी का शेयर 1575 रुपये से गिरकर दोपहर तक 1503 रुपये के स्तर तक पहुँच गया, जिससे बाजार में हलचल मच गई। इस गिरावट के चलते रिलायंस की कुल मार्केट वैल्यू में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। यह गिरावट जून 2024 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट है। सेंसेक्स पर भी इसका असर पड़ा और बेंचमार्क इंडेक्स 485 अंक तक लुढ़क गया। रिलायंस निफ्टी 50 में सबसे ज्यादा दबाव डालने वाला शेयर साबित हुआ।
इस गिरावट का मुख्य कारण ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट थी। रिपोर्ट में कहा गया कि रूस से कच्चे तेल से भरे तीन जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे हैं। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदता रहा तो टैरिफ बढ़ सकते हैं। हालांकि, रिलायंस ने तुरंत सफाई दी कि पिछले तीन हफ्तों से रूस से कोई तेल नहीं आया है और जनवरी में भी कोई खेप आने की संभावना नहीं है। कंपनी ने मीडिया में फैल रही रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज किया।
रिलायंस द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद रोकने के बाद भारत में रूस से तेल के आयात में गिरावट आ सकती है। दिसंबर 2025 में यह इंपोर्ट 12 लाख बैरल प्रति दिन तक गिर गया, जबकि जून 2025 में यह 20 लाख बैरल प्रति दिन था। यह लगभग 40% की कमी दर्शाता है।
रिलायंस ने कहा कि खंडन को नजरअंदाज करने से कंपनी की छवि प्रभावित हुई और गलत रिपोर्ट ने भ्रम पैदा किया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि जामनगर रिफाइनरी को हाल ही में कोई रूसी तेल नहीं मिला है और जनवरी में आने की संभावना नहीं है। रिलायंस के शेयरों में यह गिरावट ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट और उसके बाद की गलतफहमी के कारण हुई। इसके बावजूद कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है, लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया के चलते एक दिन में भारी नुकसान दर्ज हुआ।