भारतीय रिजर्व बैंक से आई बुरी खबर, करोड़ों नागरिकों को दिया बड़ा झटका
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 02:48 AM
भारतीय
रिजर्व
बैंक
(RBI)
से
बुरी
खबर
आई
है।
RBI
से
आने
वाली
बुरी
खबर
के
कारण
भारत
के
करोड़ों
नागरिकों
को
बड़ा
झटका
लगा
है।
भारत
के
करोड़ों
नागरिक
RBI
की
मौद्रिक
नीति
समिति
(MPC)
की
मीटिंग
के
ऊपर
निगाहें
गड़ाए
हुए
थे।
सबको
उम्मीद
थी
कि
1
अक्टूबर
को
RBI
भारत
के
नागरिकों
को
बड़ी
खुशखबरी
देगा।
भारत
के
नागरिकों
की
उम्मीद
के
विपरीत
RBI
ने
1
अक्टूबर
को
बुरी
खबर
दी
है।
RBI
की
MPC
की
दो
दिन
चली
बैठक
के
बाद
RBI
ने
भारत
के
नागरिकों
को
बहुत
बड़ा
झटका
दिया
है।
Repo
MPC Meeting
RBI ने नहीं घटाए रेपो रेट
RBI
की
दो
दिन
तक
चली
MPC
की
मीटिंग
के
बाद
RBI
ने
घोषणा
की
है
कि
मीटिंग
में
रेपो
रेट
को
नहीं
घटाने
का
फैसला
किया
गया
है।
RBI
की
MPC
के
इस
फैसले
का
अर्थ
यह
हुआ
कि
भारत
में
रेपो
रेट
पहले
की
तरह
5.5
प्रतिशत
पर
ही
कायम
रहेंगे।
रेपो
रेट
नहीं
घटने
के
कारण
बैंकों
से
लोन
लेकर
EMI
भरने
वालों
को
EMI
में
कोई
छूट
फिलहाल
नहीं
मिलेगी।
EMI
में
छूट
की
उम्मीद
लगा
बैठे
करोड़ों
भारतीयों
को
RBI
ने
जोरदार
झटका
दिया
है।
रेपो
रेट
कम
होने
की
उम्मीद
कर
रहे
भारत
के
नागरिक
RBI
की
MPC
के
फैसले
से
बेहद
निराश
हुए
हैं।
Repo
MPC Meeting
बड़ी उम्मीद थी भारत के नागरिकों को RBI की MPC से
भारत
के
नागरिकों
को
RBI
की
MPC
से
बहुत
बड़ी
उम्मीद
थी।
हर
किसी
को
लग
रहा
था
कि
1
अक्टूबर
को
RBI
की
MPC
के
नतीजे
रेपो
रेट
घटने
वाले
होंगे।
रेपो
रेट
घट
जाने
से
EMI
का
बोझ
काफी
हद
तक
कम
हो
जाएगा।
RBI
की
MPC
की
बैठक
के
बाद
RBI
ने
घोषणा
कर
दी
है
कि
रेपो
रेट
5.5
प्रतिशत
की
दर
पर
कायम
रहेंगे।
इस
घोषणा
ने
भारत
के
नागरिकों
को
बहुत
निराश
किया
है।
बड़ी संभावना जताई गई थी RBI की MPC की बैठक को लेकर
आपको
बता
दें
कि
RBI
की
MPC
की
बैठक
29
सितंबर
2025
को
शुरू
हुई
थी।
RBI
की
यह
बैठक
30
सितंबर
की
शाम
तक
चली।
इस
बैठक
को
लेकर
चेतना
मंच
ने
भी
विस्तार
से
समाचार
प्रकाशित
किया
था।
चेतना
मंच
के
समाचार
में
बताया
गया
था
कि
RBI
की
मौद्रिक
बैठक
को
लेकर
अनेक
प्रकार
के
अनुमान
लगाए
जा
रहे
हैं।
RBI
की
मौद्रिक
समिति
की
बैठक
में
रेपो
रेट
कम
करने
का
बड़ा
फैसला
हो
सकता
है।
वर्तमान
समय
में
रेपा
रेट
5.50
प्रतिशत
है।
इस
कारण
बैंकों
से
लोन
लेने
वालों
को
महंगी
EMI
देनी
पड़
रही
है।
चेतना
मंच
ने
कहा
था
कि
अनुमान
लगाया
जा
रहा
है
कि
RBI
रेपो
रेट
को
0.25
प्रतिशत
तक
कम
कर
सकता
है।
रेपो
रेट
कम
होने
से
बैंकों
से
लोन
लेने
वालों
की
EMI
यानि
की
प्रति
माह
दी
जाने
वाली
किश्त
कम
हो
सकती
है।
इस
बीच
कुछ
विशेषज्ञों
की
दूसरी
राय
भी
सामने
आई
है।
दूसरी
राय
वाले
विशेषज्ञों
का
कहना
है
कि
RBI
रेपो
रेट
को
ज्यों
का
त्यों
रखने
का
फैसला
कर
सकता
है।
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो
रेट
की
चर्चा
चल
रही
है।
हो
सकता
है
कि
आप
के
रेपो
रेट
को
नहीं
भी
जानते
हों।
हम
आपको
आसान
शब्दों
में
बता
देते
हैं
कि
रेपो
रेट
क्या
होता
है
?
रेपो
रेट
(Repo Rate)
वह
दर
है
जिस
पर
भारतीय
रिज़र्व
बैंक
(RBI)
देश
के
बैंकों
को
अल्पकालिक
(Short Term)
ऋण
प्रदान
करता
है।
जब
बैंकों
को
पैसों
की
कमी
होती
है
तो
वे
अपने
सिक्योरिटीज
(
जैसे
सरकारी
बॉन्ड
)
को
गिरवी
रखकर
RBI
से
पैसे
उधार
लेते
हैं।
इस
उधार
पर
RBI
जो
ब्याज
दर
वसूलता
है
,
वही
रेपो
रेट
कहलाती
है।
RBI
समय
–
समय
पर
रेपो
रेट
में
बदलाव
करके
अर्थव्यवस्था
को
नियंत्रित
करता
है।
जैसे
रेपो
रेट
बढ़ाना
:
जब
महंगाई
ज़्यादा
होती
है
,
तो
RBI
रेपो
रेट
बढ़ा
देता
है।
इससे
बैंकों
को
महंगा
ऋण
मिलता
है
और
वे
आम
जनता
को
भी
ऊँचे
ब्याज
पर
लोन
देते
हैं।
इससे
बाज़ार
में
पैसे
का
प्रवाह
कम
हो
जाता
है
और
महंगाई
घटाने
में
मदद
मिलती
है।
रेपो
रेट
घटाना
:
जब
आर्थिक
विकास
को
बढ़ावा
देने
की
ज़रूरत
होती
है
,
तो
RBI
रेपो
रेट
घटा
देता
है।
इससे
बैंक
सस्ते
ऋण
लेते
हैं
और
लोगों
को
भी
कम
ब्याज
पर
लोन
देते
हैं।
नतीजतन
,
बाज़ार
में
पैसों
की
उपलब्धता
बढ़
जाती
है।
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रेपो रेट का असर आम जनता पर
जैसे
रेपो
रेट
बढ़ाना
:
जब
महंगाई
ज़्यादा
होती
है
,
तो
क्रक्चढ्ढ
रेपो
रेट
बढ़ा
देता
है।
इससे
बैंकों
को
महंगा
ऋण
मिलता
है
और
वे
आम
जनता
को
भी
ऊँचे
ब्याज
पर
लोन
देते
हैं।
इससे
बाज़ार
में
पैसे
का
प्रवाह
कम
हो
जाता
है
और
महंगाई
घटाने
में
मदद
मिलती
है।
रेपो
रेट
घटाना
:
जब
आर्थिक
विकास
को
बढ़ावा
देने
की
ज़रूरत
होती
है
,
तो
क्रक्चढ्ढ
रेपो
रेट
घटा
देता
है।
इससे
बैंक
सस्ते
ऋण
लेते
हैं
और
लोगों
को
भी
कम
ब्याज
पर
लोन
देते
हैं।
नतीजतन
,
बाज़ार
में
पैसों
की
उपलब्धता
बढ़
जाती
है।
Repo
MPC Meeting
रेपो रेट का असर आम जनता पर
(1) रेपो
रेट
सीधे
–
सीधे
आम
आदमी
की
ज़िंदगी
को
प्रभावित
करती
है।
(2) होम
लोन
,
कार
लोन
और
पर्सनल
लोन
की
EMI
रेपो
रेट
बढ़ने
पर
महंगी
हो
जाती
है।
(3) रेपो
रेट
घटने
पर
EMI
सस्ती
हो
जाती
है।
(4) निवेशकों
,
व्यापारियों
और
उद्योगों
के
लिए
भी
इसका
सीधा
असर
पड़ता
है।
(5) रेपो
रेट
: RBI
बैंकों
को
पैसे
देता
है।
(6) रिवर्स
रेपो
रेट
:
बैंक
अपने
अतिरिक्त
पैसे
को
RBI
के
पास
जमा
करते
हैं
और
उस
पर
ब्याज
पाते
हैं
Repo
MPC Meeting
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