
स्वतंत्रता दिवस का जश्न सिर्फ तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं — इसका सम्मान और सुरक्षित रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। भारत का तिरंगा केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि आज़ादी की अमर गाथा, बलिदान की कहानी और देश की एकता का प्रतीक है। 15 अगस्त 1947 को लाल किले पर पहली बार इसे फहराने के बाद यह हर साल हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का परिचायक बन जाता है। जश्न के बाद भी तिरंगे को उसी गरिमा और विधि से संभालना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना इसे फहराना। How to fold Indian flag
भारतीय ‘फ्लैग कोड’ के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज को कभी भी ऐसी जगह न रखें जहां वह गंदा हो, मुड़ा-कुचला पड़े या कट-फट जाए। अगर तिरंगा क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसे सामान्य कपड़ों की तरह फेंकना अपराध है। इसके निस्तारण के लिए भी गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
ध्वज को क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) रूप में रखें।
केसरिया और हरे रंग की पट्टियों को सफेद पट्टी के पीछे की ओर मोड़ें।
सफेद हिस्से को इस तरह मोड़ें कि केवल अशोक चक्र स्पष्ट दिखे, और केसरिया व हरे रंग की कुछ झलक बनी रहे।
फोल्ड किए हुए ध्वज को दोनों हथेलियों में लेकर किसी साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें।
‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ की धारा 2 के तहत, तिरंगे का अपमान — चाहे वह जलाना, फाड़ना, रौंदना, विकृत करना या किसी भी प्रकार से अपवित्र करना हो — तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का कारण बन सकता है।
जुलाई 2022 के संशोधन के बाद, अब राष्ट्रीय ध्वज को दिन और रात, दोनों समय फहराया जा सकता है, बशर्ते वह खुले में हो और अंधेरे में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था हो। पहले यह केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही संभव था। ध्वज हमेशा सर्वोच्च स्थान पर और प्रमुखता से लहराना चाहिए। फटे, गंदे या अस्त-व्यस्त तिरंगे को कभी न फहराएं। उसका हर इस्तेमाल और हर स्पर्श, राष्ट्र के गौरव के अनुरूप हो — यही सच्ची देशभक्ति है। How to fold Indian flag