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अगर आपको हर महीने पेंशन मिलती है तो उसे अनकम्यूटेड पेंशन कहा जाता है। टैक्स के नजरिए से इसे सैलरी की तरह माना जाता है। यानी जिस तरह नौकरी के समय सैलरी पर टैक्स लगता था उसी तरह इस मंथली पेंशन पर भी टैक्स लागू होता है।

रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन को लोग अक्सर पूरी तरह टैक्स फ्री मान लेते हैं लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। भारत में पेंशन पर टैक्स लगता है या नहीं यह कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे आपको पेंशन किस तरह मिल रही है आप सरकारी नौकरी से रिटायर हुए हैं या प्राइवेट से और आपने कौन-सी टैक्स व्यवस्था चुनी है। यही वजह है कि कई लोग हर साल गलत तरीके से टैक्स भर देते हैं या ज्यादा टैक्स दे बैठते हैं।
अगर आपको हर महीने पेंशन मिलती है तो उसे अनकम्यूटेड पेंशन कहा जाता है। टैक्स के नजरिए से इसे सैलरी की तरह माना जाता है। यानी जिस तरह नौकरी के समय सैलरी पर टैक्स लगता था उसी तरह इस मंथली पेंशन पर भी टैक्स लागू होता है। आपकी कुल इनकम और टैक्स स्लैब के हिसाब से यह तय होता है कि आपको कितना टैक्स देना है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि मंथली पेंशन पूरी तरह टैक्स फ्री नहीं होती।
कुछ लोग रिटायरमेंट के समय अपनी पेंशन का एक हिस्सा एक साथ ले लेते हैं जिसे कम्यूटेड पेंशन कहा जाता है। इस पर टैक्स का नियम थोड़ा अलग होता है। सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें मिलने वाली यह एकमुश्त पेंशन पूरी तरह टैक्स फ्री होती है। वहीं प्राइवेट सेक्टर में यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको ग्रेच्युटी मिली है या नहीं। अगर ग्रेच्युटी मिली है तो एक हिस्सा ही टैक्स फ्री होता है बाकी पर टैक्स देना पड़ता है।
जब किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को पेंशन मिलती है तो उसे फैमिली पेंशन कहा जाता है। इसका टैक्स नियम थोड़ा अलग होता है। इसे सैलरी नहीं बल्कि दूसरी आय के रूप में माना जाता है। इसमें आपको कुछ छूट मिलती है जैसे कुल पेंशन का एक हिस्सा या तय राशि तक टैक्स से राहत दी जाती है लेकिन पूरी पेंशन टैक्स फ्री नहीं होती यह बात बहुत से लोग नहीं जानते।
सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों के लिए पेंशन के नियमों में फर्क होता है। सरकारी कर्मचारियों को कम्यूटेड पेंशन में ज्यादा राहत मिलती है जबकि प्राइवेट सेक्टर में नियम थोड़े सख्त होते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने सेक्टर के हिसाब से नियम समझें ताकि बाद में कोई परेशानी न हो।
पेंशनर्स के पास भी टैक्स बचाने के कई विकल्प होते हैं। जैसे स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा लेना सही टैक्स रिजीम चुनना और अलग-अलग सेक्शन के तहत मिलने वाली छूट का इस्तेमाल करना। अगर सही तरीके से प्लानिंग की जाए तो आप अपने टैक्स को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
कई पेंशनर्स ITR भरते समय गलती कर देते हैं जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। मंथली पेंशन को सही हेड में दिखाना बहुत जरूरी है। अगर आप सही जानकारी के साथ ITR भरते हैं तो न सिर्फ आप टैक्स बचा सकते हैं बल्कि किसी भी तरह की परेशानी से भी बच सकते हैं।
पेंशन आपकी जिंदगी की कमाई होती है इसलिए इसके टैक्स नियम समझना बहुत जरूरी है। अगर आप बिना जानकारी के फैसला लेते हैं तो नुकसान हो सकता है। थोड़ी सी समझदारी और सही प्लानिंग के साथ आप अपनी पेंशन का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और टैक्स का बोझ भी कम कर सकते हैं।
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