LPG की जमाखोरी रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, आम लोगों पर क्या होगा असर?

भारत सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एलपीजी की जमाखोरी रोकने और आम लोगों को समय पर गैस मिलती रहे इसके लिए Essential Services Maintenance Act (ESMA) लागू कर दिया है।

LPG Cylinder Update
LPG गैस संकट पर सरकार का बड़ा कदम
locationभारत
userअसमीना
calendar10 Mar 2026 11:55 AM
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हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे हालात में भारत सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एलपीजी की जमाखोरी रोकने और आम लोगों को समय पर गैस मिलती रहे इसके लिए Essential Services Maintenance Act (ESMA) लागू कर दिया है।

बाजार में क्यों बढ़ी गैस की कमी?

मौजूदा समय में कई जगहों से कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही थीं। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई अभी भी जारी है लेकिन कमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता कम होने से होटल, ढाबों और छोटे कारोबारियों को परेशानी हो रही थी। सरकार को यह आशंका भी थी कि कुछ लोग गैस सिलेंडरों की जमाखोरी कर सकते हैं जिससे संकट और बढ़ सकता है। इसी वजह से स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सख्त कदम उठाया गया है।

ESMA क्या है और क्यों होता है लागू?

Essential Services Maintenance Act यानी आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम एक ऐसा कानून है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब आम जनता से जुड़ी जरूरी सेवाओं में बाधा आने की आशंका होती है। इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी सेवाएं बिना रुकावट चलती रहें। आम तौर पर इसका इस्तेमाल परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं को चालू रखने के लिए किया जाता है। अब इसी कानून के तहत एलपीजी की आपूर्ति को भी सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है।

रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश

सरकार ने देश की तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को साफ निर्देश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन अधिक से अधिक बढ़ाएं। इसके साथ ही कुछ हाइड्रोकार्बन स्रोतों को भी एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ने को कहा गया है ताकि घरेलू गैस की उपलब्धता बनी रहे। भारत में एलपीजी की मांग काफी बड़ी है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश की कुल एलपीजी खपत लगभग 3.13 करोड़ टन रही जबकि इसका एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है।

मिडिल ईस्ट तनाव का भारत पर असर

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। खासतौर पर खाड़ी देशों से आने वाला तेल और गैस भारत की ऊर्जा व्यवस्था के लिए बेहद अहम है। इस सप्लाई का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz नाम के समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और समुद्री रास्तों में संभावित रुकावट के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसी वजह से भारत सरकार पहले से ही सतर्क कदम उठा रही है।

आम लोगों के लिए क्या मायने?

सरकार का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के किसी भी हिस्से में घरेलू रसोई गैस की कमी न हो। अगर उत्पादन और आपूर्ति दोनों सही तरीके से चलती रही तो आम लोगों को किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है ताकि जरूरत पड़ने पर और कदम उठाए जा सकें।

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2029 चुनाव में महिलाओं को मिल सकता है 33% कोटा, सरकार ने तेज की तैयारी

महिलाओं को लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण देने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया था। हालांकि, इस कानून के अमल को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

महिला आरक्षण पर बढ़ी हलचल
महिला आरक्षण पर बढ़ी हलचल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Mar 2026 11:30 AM
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Women Reservation : संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार गंभीर नजर आ रही है। चर्चा है कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए सरकार कानूनी और प्रक्रियागत विकल्पों पर विचार कर रही है। इस दिशा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की संभावनाएं तलाशे जाने की बात सामने आ रही है। महिलाओं को लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण देने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया था। हालांकि, इस कानून के अमल को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। यही वजह है कि कानून बनने के बावजूद अब तक इसे लागू नहीं किया जा सका है।

2029 चुनाव से पहले रास्ता निकालने की कोशिश

रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार इस बात पर मंथन कर रही है कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया में देरी होती है, तो क्या महिला आरक्षण को उससे अलग कर लागू किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि सरकार इस कानून में आवश्यक संशोधन की संभावना भी देख रही है, ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिल सके। सूत्रों के मुताबिक, इस संवेदनशील और बड़े राजनीतिक मुद्दे पर सरकार जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सहयोगी दलों और विपक्षी पार्टियों से भी बातचीत कर सकती है। माना जा रहा है कि व्यापक राजनीतिक सहमति बनने के बाद ही इस दिशा में कोई ठोस कदम आगे बढ़ाया जाएगा। बताया जा रहा है कि जनगणना की प्रक्रिया 1 मार्च 2027 तक पूरी हो सकती है। इसके बाद आंकड़े जारी किए जाएंगे और फिर परिसीमन आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चूंकि इस बार जनगणना का काम डिजिटल तरीके से किया जाना है, इसलिए पूरी प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लगने की आशंका भी जताई जा रही है। यही कारण है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने का विकल्प गंभीरता से चर्चा में है।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाएं अब भी काफी पीछे

महिला प्रतिनिधित्व की मौजूदा तस्वीर भी इस मुद्दे की अहमियत को रेखांकित करती है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में कुल 4,666 सांसदों और विधायकों में से केवल 464 महिलाएं हैं। यानी निर्वाचित प्रतिनिधियों में महिलाओं की हिस्सेदारी महज 10 प्रतिशत के आसपास है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 2029 के चुनाव से पहले महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाता है, तो यह भारतीय राजनीति में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव साबित हो सकता है। इससे न केवल संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, बल्कि नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी भी मजबूत होगी।

क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम?

सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल माना गया था। इस कानून के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इसके लागू होने की शर्तों ने इसे फिलहाल जमीन पर उतरने से रोक रखा है। अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार आने वाले वर्षों में किस तरह का कानूनी और प्रशासनिक रास्ता अपनाती है। यदि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर लागू करने की सहमति बनती है, तो 2029 का लोकसभा चुनाव भारतीय लोकतंत्र में महिला भागीदारी के लिहाज से ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। Women Reservation

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कम पानी और कम लागत में बंपर मुनाफा! मसूर की खेती कैसे करें, जानें एक्सपर्ट से

मसूर की बुवाई के लिए बलुई दोमट या मध्यम दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। वैज्ञानिकों की सलाह है कि बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। पलेवा करके 2 से 3 जुताई करने से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है।

Lentil cultivation
मसूर की उन्नत और नई प्रजातियां (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Mar 2026 11:18 AM
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Lentil cultivation : भारतीय रसोई में मसूर की दाल का अपना एक अलग स्थान है। पौष्टिक होने के साथ-साथ यह दाल आम जनमानस की पहुंच में भी आसानी से आ जाती है। जहां एक तरफ यह अन्य दालों के मुकाबले सस्ती पड़ती है, वहीं इसके सेवन से सेहत को भी कई फायदे मिलते हैं। मसूर में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम और लोहा जैसे जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

खाने के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी मसूर की फसल किसी वरदान से कम नहीं है। यह उन इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकती है जहां पानी की कमी हो। मसूर में सूखा सहन करने की अद्भुत क्षमता होती है। इसके अलावा, यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और मृदा क्षरण रोकने में भी मददगार साबित होती है। आइए, जानते हैं सीनियर साइंटिस्ट डॉ. ज्योति कुमारी की राय से कि किस तरह कम लागत में मसूर की खेती करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

कैसे करें खेत की तैयारी?

मसूर की बुवाई के लिए बलुई दोमट या मध्यम दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। वैज्ञानिकों की सलाह है कि बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। पलेवा करके 2 से 3 जुताई करने से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे बीजों का जमाव बेहतर होता है। खेत में मौजूद खरपतवार और पिछली फसल के अवशेषों को साफ कर देना चाहिए।

बुवाई का सही समय और तरीका

अच्छी पैदावार के लिए समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अक्तूबर का आखिरी हफ्ता मसूर की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, हालांकि नवंबर के दूसरे हफ्ते तक भी बुवाई की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि देसी हल के मुकाबले सीडड्रिल से बुवाई करने पर उत्पादन अधिक मिलता है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और निराई-गुड़ाई भी आसान हो जाती है।

नई प्रजातियां और बीजोपचार

किसान मसूर की उन्नत प्रजातियों जैसे लेंस 4076, डीपीएल 15, पूसा वैभव, डीपीएल 62, जेएल 3, आईपीएल 81, केएलएस 218, एचयूएल 57 और वीएल 507 का चयन कर सकते हैं। बीजों को बोने से पहले जरूर बीनोमाइल 0.3 प्रतिशत से उपचारित करना चाहिए। अगर किसी खेत में पहली बार मसूर की खेती हो रही हो, तो राइजोबियम कल्चर का इस्तेमाल जरूर करें। इससे जड़ों में गांठें बनती हैं और पैदावार बढ़ती है।

उर्वरकों का सही इस्तेमाल

मसूर दलहनी फसल होने के कारण कम मात्रा में नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। प्रति हेक्टेयर 15-20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50-60 किलोग्राम फास्फोरस और 30-40 किलोग्राम पोटाश का उपयोग करें। जिन इलाकों में जिंक की कमी हो, वहां 2.5 किलोग्राम जिंक सल्फेट और सल्फर की जरूरत होने पर 30 किलोग्राम सल्फर का इस्तेमाल लाभदायक रहता है।

कीट नियंत्रण और कटाई

मसूर में कीड़ों का प्रकोप कम होता है, लेकिन जनवरी में तापमान बढ़ने पर माहू का खतरा रहता है। इसके लिए डाइमिथोएट 0.03 प्रतिशत का छिड़काव करना चाहिए। वहीं, कटाई का सही समय तब होता है जब 70 से 80 फीसदी फलियां सूखने लगें। समय पर कटाई करने से दानों का झड़ना रुकता है और गुणवत्ता बनी रहती है। Lentil cultivation

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