RBI की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले का असर बैंकिंग सेक्टर के साथ होम और कार लोन लेने वाले ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।

National News : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद आम लोगों की जेब पर असर डालने वाला फैसला सामने आया है। RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। लंबे समय से स्थिर रेपो रेट में हुए इस बदलाव का असर बैंकिंग सेक्टर के साथ होम और कार लोन लेने वाले ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंकों की उधारी लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आगे चलकर ब्याज दरों और कर्ज की EMI पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, किसी ग्राहक की EMI में वास्तविक बदलाव उसके बैंक, लोन के प्रकार और ब्याज दर की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। National News
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की जानकारी देते हुए वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख किया। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को लेकर चिंता जताई। National News
RBI के अनुसार वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। ऊर्जा कीमतों में तेजी का असर आगे चलकर कई दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके साथ ही वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता की स्थिति भी बनी हुई है। National News
मौद्रिक नीति समिति के फैसले के बाद रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई जिसके बाद रेपो रेट बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गयी है। इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी SDF रेट बढ़कर 5.25 प्रतिशत हो गया है। National News
RBI ने मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी MSF रेट को बढ़ाकर 5.75 प्रतिशत कर दिया है। इन बदलावों का असर बैंकिंग सिस्टम में ब्याज दरों की दिशा पर पड़ सकता है। National News
RBI ने रेपो रेट बढ़ाने के साथ वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई के अनुमान में भी संशोधन किया है। कोर महंगाई के अनुमान को पहले के 4.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.4 प्रतिशत किया गया है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI आधारित महंगाई के अनुमान को भी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है। RBI गवर्नर ने इसके पीछे कमजोर मानसून और अल नीनो के संभावित असर को भी एक कारण बताया। National News
रेपो रेट में बढ़ोतरी का सीधा असर सभी ग्राहकों पर एक जैसा नहीं पड़ता। लेकिन यदि बैंक अपनी बाहरी बेंचमार्क आधारित ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं तो नए कर्ज लेने वालों के लिए होम और कार लोन महंगे हो सकते हैं। मौजूदा फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों की EMI या लोन की अवधि पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है। National News
रेपो रेट में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक स्तर पर महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और आर्थिक अनिश्चितता जैसे मुद्दे केंद्रीय बैंक के सामने चुनौती बने हुए हैं। अब बाजार और बैंकिंग सेक्टर की नजर इस फैसले के बाद ब्याज दरों में होने वाले संभावित बदलावों पर रहेगी। National News
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