रितिका चोपड़ा की चुनाव आयोग पर जांच रिपोर्ट क्यों चर्चा में है? जानिए 14 आपत्तियों, ECINet, Form 6 और गोवा के 97 मतदाताओं से जुड़े पूरे मामले को।

जब पत्रकारिता सिर्फ खबर बताने तक सीमित न रहकर सत्ता और संस्थानों के भीतर छिपे सवालों को दस्तावेजों और तथ्यों के साथ सामने लाए, तो उसकी अहमियत और बढ़ जाती है। ऐसी ही एक पत्रकार है रितिका चोपड़ा जिन्होंने अपनी पहचान सिर्फ एक रिपोर्टर के तौर पर नहीं, बल्कि दस्तावेजों और तथ्यों के पीछे छिपी संस्थागत सच्चाई सामने लाने वाली पत्रकार के रूप में बनाई है। शिक्षा नीति से लेकर चुनाव आयोग के कामकाज तक, उनकी रिपोर्टिंग ने कई बार ऐसे सवाल उठाए हैं, जिन पर सार्वजनिक बहस जरूरी थी। अब उनकी ताजा पड़ताल एक बार फिर चर्चा में है। चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की 14 लिखित आपत्तियों, ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण और फॉर्म-6 में बदलाव जैसे मुद्दों को दस्तावेजों के आधार पर सामने लाकर रितिका ने चुनावी संस्थाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यही बेबाकी और दस्तावेज-आधारित रिपोर्टिंग उन्हें अलग पहचान देती है।
रितिका चोपड़ा करीब 19 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उनकी पत्रकारिता की शुरुआत कोलकाता से हुई। उन्होंने 2006 में हिंदुस्तान टाइम्स से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने मेल टुडे और द इकोनॉमिक टाइम्स में काम किया। साल 2015 में वह द इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ीं। यहां उन्होंने शिक्षा, सरकारी नीतियों, राजनीति और चुनाव आयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। रितिका चोपड़ा ने सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से मास कम्युनिकेशन और वीडियोग्राफी में स्नातक की पढ़ाई की है। इन्हें पत्रकारिता में करीब 19 साल का अनुभव है।
रितिका चोपड़ा की पत्रकारिता का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और सरकारी नीतियों से जुड़ा रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, सरकारी फैसलों और नीतिगत बदलावों से जुड़े कई मुद्दों पर खोजी रिपोर्टिंग की है। उनकी चर्चित रिपोर्टिंग में इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर आधारित उनकी "Devalued Degree" सीरीज भी शामिल है। इस सीरीज को ACJ Investigative Journalism Awards में विशेष उल्लेख मिला था। उन्होंने सरकारी नीतियों और शिक्षा से जुड़े ऐसे मुद्दों पर भी रिपोर्टिंग की, जिनका असर छात्रों और आम लोगों पर पड़ता है। इसी तरह की खोजी पत्रकारिता के लिए उन्हें 2024 में चमेली देवी जैन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
चुनाव आयोग रितिका चोपड़ा की लंबे समय से चली आ रही रिपोर्टिंग बीट में शामिल रहा है। उन्होंने राजनीति, शासन, सार्वजनिक नीति और चुनाव आयोग से जुड़े विषयों पर लगातार रिपोर्टिंग की है। चुनाव आयोग के कामकाज पर उनकी पिछली रिपोर्टिंग को भी पत्रकारिता के क्षेत्र में सम्मान मिला है। उन्हें 2021 में रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवॉर्ड उनकी चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज और संस्था की स्वायत्तता से जुड़ी रिपोर्टिंग की सीरीज के लिए मिला था। यही वजह है कि 23 सितंबर 2026 को प्रकाशित उनकी नई चुनाव आयोग जांच रिपोर्ट को उनकी पुरानी रिपोर्टिंग की कड़ी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
23 सितंबर 2026 को द इंडियन एक्सप्रेस में रितिका चोपड़ा की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रकाशित हुई। रिपोर्ट का केंद्र चुनाव आयोग के भीतर पिछले 10 महीनों में दर्ज की गई आपत्तियां और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े फैसले थे। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अलग-अलग मामलों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों का संबंध मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव, मतदाता सूची के डेटा तक पहुंच और दूसरे प्रशासनिक मामलों से था।
रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं:
Form 6 वह फॉर्म है जिसका इस्तेमाल नए मतदाता के तौर पर पंजीकरण के लिए किया जाता है। रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें SIR से संबंधित कुछ नए सवाल जोड़े गए थे। रिपोर्ट में बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। एक आपत्ति में इसे नियमों में बदलाव के बिना किए जाने पर सवाल उठाया गया था। बाद में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव को "अनधिकृत" और "अवैध" बताया और इसे हटाने की बात कही थी।
रितिका चोपड़ा की जांच का एक अहम हिस्सा ECINet से जुड़ा है। ECINet को चुनाव आयोग ने अपने कई ऐप और पोर्टल को एक साथ लाने वाले तकनीकी प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू किया था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल सिस्टम और अधिकारियों की पहुंच को लेकर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के अनुसार, आपत्तियों में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या मतदाता सूची के डेटा पर जरूरत से ज्यादा केंद्रीकृत नियंत्रण हो रहा है और क्या फील्ड स्तर के अधिकारियों को पर्याप्त पहुंच मिल रही है। इस मामले में चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। आयोग ने कहा है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा और ऑडिट व्यवस्था के तहत काम करते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि Electoral Registration Officers और District Election Officers अपने कानूनी अधिकारों के तहत मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने का काम करते हैं।
रितिका चोपड़ा की रिपोर्टिंग में गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की 24 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, इन 97 लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, जबकि संबंधित प्रक्रिया में उन्हें वोट देने के योग्य माना गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि अखबार ने इन 97 नामों की जांच की और 20 सितंबर तक वे अंतिम सूची में नहीं मिले। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में नाम होना सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गोवा की कुछ सरकारी योजनाओं में भी मतदाता सूची में नाम होने की शर्त जुड़ी हुई है।
रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष जारी किया। आयोग ने कहा कि वह एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव तथा आंतरिक जांच और संतुलन उसकी सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी अंतिम फैसले से पहले होने वाली सामान्य चर्चा का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल में पूर्ण आयोग की ओर से लिए गए फैसलों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इस तरह इस पूरे मामले में दो पक्ष सामने हैं। रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों और उनसे जुड़े दस्तावेजों को सामने रखा गया है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
रितिका चोपड़ा की पत्रकारिता को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें प्रमुख हैं:
चमेली देवी जैन अवॉर्ड 2024- रितिका चोपड़ा और स्वतंत्र पत्रकार ग्रीष्मा कुठार को संयुक्त रूप से यह सम्मान मिला। यह सम्मान खोजी पत्रकारिता और सरकारी नीतियों तथा स्वतंत्र संस्थाओं से जुड़े उनके काम के लिए दिया गया।
रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवॉर्ड 2021 - चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज और उसकी स्वायत्तता से जुड़े रिपोर्टिंग कार्य के लिए।
International Press Institute India Award - 2019 लोकसभा चुनावों की रिपोर्टिंग के लिए।
UNFPA-Laadli Media Award - हरियाणा पंचायत चुनाव से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रभाव पर रिपोर्टिंग के लिए।
ACJ Investigative Journalism Awards में विशेष उल्लेख - इंजीनियरिंग शिक्षा पर उनकी "Devalued Degree" सीरीज के लिए।
रितिका चोपड़ा की रिपोर्टिंग में एक बात लगातार दिखाई देती है—दस्तावेजों और संस्थागत रिकॉर्ड के आधार पर सवाल उठाना। चुनाव आयोग पर उनकी नई जांच भी इसी शैली का उदाहरण है। इस रिपोर्ट में सिर्फ किसी बयान या राजनीतिक आरोप को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों, प्रशासनिक फैसलों, Form 6, डिजिटल सिस्टम और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है। यही वजह है कि यह रिपोर्ट सिर्फ एक दिन की राजनीतिक खबर नहीं रह गई, बल्कि चुनावी प्रक्रिया और संस्थागत कामकाज को लेकर चर्चा का विषय बन गई है।
रितिका चोपड़ा की पत्रकारिता का सफर यह भी दिखाता है कि किसी एक खबर से पत्रकार की पहचान नहीं बनती। लंबे समय तक किसी विषय पर काम करना, दस्तावेज जुटाना और लगातार सवाल पूछना पत्रकारिता को अलग मजबूती देता है। चुनाव आयोग पर उनकी ताजा जांच इसी लंबे सफर की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। रिपोर्ट ने आयोग के भीतर होने वाली प्रक्रिया, दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी एवं प्रशासनिक सवालों को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है।
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