क्या रितिका चोपड़ा की रिपोर्टिंग ने दिल्ली के सत्ता गलियारों से लेकर चुनाव आयोग तक हलचल बढ़ा दी है ? चुनाव आयोग के भीतर दर्ज 14 लिखित आपत्तियों की कहानी आखिर क्या है और इन आपत्तियों ने SIR, Form-6 और ECINet को लेकर नए सवाल क्यों खड़े कर दिए है ?

National News : भारत की चुनाव व्यवस्था को लेकर इन दिनों एक ऐसी रिपोर्ट चर्चा में है, जिसने चुनाव आयोग के कामकाज, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, नए मतदाताओं के लिए Form-6 और चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम ECINet की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिए हैं। यह पड़ताल द इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा और उनकी सहयोगी रिपोर्टिंग पर आधारित है। रिपोर्ट में चुनाव आयोग के आंतरिक दस्तावेजों और अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई टिप्पणियों का हवाला दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण दावा यह है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के फैसलों अथवा आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया, Form-6 में बदलाव और मतदाता डेटा तक पहुंच को केंद्रीकृत करने जैसे मुद्दे शामिल थे। National News
रितिका चोपड़ा की 23 सितंबर 2026 की विस्तृत पड़ताल में कहा गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने कुछ निर्णयों को लेकर रिकॉर्ड पर अपनी असहमति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कुछ महत्वपूर्ण कदम उनकी जानकारी अथवा सहमति के बिना आगे बढ़ाए गए। यहां सबसे अहम बात यह है कि मामला केवल राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं है। द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में उन आंतरिक नोट्स, पत्रों और प्रशासनिक रिकॉर्ड का हवाला दिया है, जिनके आधार पर यह पूरा विवाद सामने आया। National News
नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से जुड़ा एक नया सवाल जोड़े जाने पर विवाद सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक आवेदक से यह पूछा गया कि उसका अथवा उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, यह सवाल फॉर्म में अनिवार्य घोषित नहीं था, लेकिन आवेदक उसके जवाब के बिना फॉर्म आगे जमा नहीं कर पा रहा था। यही वह बिंदु है जिस पर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने 16 मई को आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार, उनका कहना था कि Form-6 एक वैधानिक फॉर्म है और उसमें बदलाव के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन की आवश्यकता होगी। बाद में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई। इसके बाद 13 अगस्त को संधू ने इस बदलाव को लेकर इसे हटाने की मांग की और रिपोर्ट के अनुसार इसे “unauthorised” तथा “illegal” बताया। इंडियन एक्सप्रेस ने जुलाई में इस बदलाव की रिपोर्ट पहली बार प्रकाशित की थी। National News
इस विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम ECINet से जुड़ा है। 22 जनवरी 2026 को लॉन्च किए गए ECINet को चुनाव आयोग के कई ऐप और पोर्टल को एक साथ जोड़ने वाले तकनीकी प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने इस बात को लेकर चिंता जताई कि मतदाता सूची से जुड़े अधिकारों और प्रक्रियाओं का डिजिटल नियंत्रण दिल्ली स्थित केंद्रीय IT व्यवस्था में अधिक केंद्रित हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चिंता यह थी कि मतदाता सूची तैयार करने की वैधानिक जिम्मेदारी रखने वाले स्थानीय Electoral Registration Officers यानी EROs की भूमिका तकनीकी व्यवस्था से सीमित नहीं होनी चाहिए। इसी मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों के बीच पत्राचार हुआ और रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्तों ने यहां तक सवाल उठाया कि IT सिस्टम कहीं ERO की वैधानिक भूमिका और निर्णय लेने की क्षमता को प्रतिबंधित तो नहीं कर रहा। National News
इस पूरी पड़ताल के बाद इंडियन एक्सप्रेस ने गोवा का एक केस स्टडी भी सामने रखा। रिपोर्ट के मुताबिक 97 ऐसे मतदाता सामने आए जिनके बारे में स्थानीय स्तर पर ERO ने उन्हें पात्र पाया, लेकिन केंद्रीयकृत ECINet व्यवस्था में उन निर्णयों को दर्ज करने में तकनीकी बाधा आई। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस बड़े सवाल से जुड़ता है कि यदि स्थानीय वैधानिक अधिकारी किसी मतदाता को पात्र मानता है तो अंतिम डिजिटल सिस्टम उस निर्णय को किस सीमा तक स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है। National News
रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद के दावे पर अपना पक्ष रखा। 24 सितंबर 2026 की इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने 14 नोट्स के अस्तित्व, तारीख या उनकी सामग्री को सीधे नकारा नहीं, लेकिन यह कहा कि बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार, टिप्पणियां और सुझाव निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में लिए गए निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। यानी विवाद का मूल प्रश्न अब यह है कि रिकॉर्ड पर दर्ज असहमतियों को किस रूप में समझा जाए—क्या वे सामान्य संस्थागत विमर्श का हिस्सा थीं या महत्वपूर्ण निर्णयों पर वास्तविक प्रशासनिक मतभेद का संकेत थीं। National News
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में SIR भी है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार बिहार से शुरू हुई इस प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। इनमें मृत मतदाता, स्थान बदल चुके मतदाता, डुप्लीकेट नाम अथवा अन्य कारणों से हटाए गए नाम शामिल हो सकते हैं; अंतिम सूची से पहले दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। इसी विशाल स्तर की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया ने चुनाव आयोग की भूमिका और पारदर्शिता को लेकर बहस को और व्यापक बनाया है। National News
विवाद का एक नया घटनाक्रम 25 सितंबर को सामने आया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर SIR, ECINet और कथित तौर पर पूर्ण आयोग की सहमति के बिना लिए गए कुछ फैसलों की जांच की मांग की गई है। याचिका में ECINet और ERONet के तकनीकी तथा प्रशासनिक ऑडिट की मांग भी की गई है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि याचिका में लगाए गए आरोप अदालत द्वारा सिद्ध किए गए निष्कर्ष नहीं हैं। National News
रितिका चोपड़ा की इस पड़ताल की खासियत यही है कि उन्होंने विवाद को केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर नहीं रखा, बल्कि चुनाव आयोग के भीतर हुए पत्राचार और रिकॉर्ड पर दर्ज टिप्पणियों को रिपोर्ट का आधार बनाया। उनकी रिपोर्टिंग का असर इस बात से भी देखा जा सकता है कि इंडियन एक्सप्रेस ने इसके बाद Form-6, ECINet, गोवा के 97 मतदाताओं और आयोग के जवाब से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर लगातार रिपोर्ट प्रकाशित की हैं। 25 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस के कार्यक्रम में स्वयं रितिका चोपड़ा ने इस जांच पर चर्चा की। चेतना मंच के लिए इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल यही है भारत की मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में अंतिम निर्णय किस स्तर पर लिया जा रहा है, स्थानीय चुनाव अधिकारी और केंद्रीय डिजिटल सिस्टम के बीच अधिकारों का संतुलन कैसे तय हो रहा है और आयोग के भीतर दर्ज असहमतियों का संस्थागत समाधान किस तरह होता है? इन सवालों के जवाब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि सामने आए दस्तावेजों, चुनाव आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण और आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही से तय होंगे। National News
द इंडियन एक्सप्रेस ने इस पड़ताल पर विशेष वीडियो/ऑडियो सामग्री भी प्रकाशित की है, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर दर्ज 14 आपत्तियों और ECINet से जुड़े सवालों पर चर्चा की गई है।
रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट पर वीडियो — YouTube
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