राजद के वरिष्ठ नेता सुनील कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस/ बयान देते हुए चेतावनी दी कि यदि मतगणना में गड़बड़ी हुई तो बिहार की सड़कों पर ऐसा दृश्य दिखेगा जैसा कभी नहीं हुआ और विशेष रूप से कहा कि सड़कों पर नेपाल-बांग्लादेश-श्रीलंका जैसा माहौल बनेगा।

बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। इसके बाद मतगणना और परिणाम की घोषणा के समय से पहले राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊँचा था। राजद के वरिष्ठ नेता सुनील कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस/ बयान देते हुए चेतावनी दी कि यदि मतगणना में गड़बड़ी हुई तो बिहार की सड़कों पर ऐसा दृश्य दिखेगा जैसा कभी नहीं हुआ और विशेष रूप से कहा कि सड़कों पर नेपाल-बांग्लादेश-श्रीलंका जैसा माहौल बनेगा। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अधिकारी/प्रतिनिधि हारने वाले पक्ष को जिताने के लिए पक्षपात कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने कहा कि अगर हमारे जीतने वाली उम्मीदवारों को धोखाधड़ी से हरा दिया गया, तो ऐसी स्थिति बन सकती है। इस बयान के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर माना। बिहार पुलिस और राज्य के डीजीपी ने निर्देश दिए कि इस तरह के भड़काऊ बयानों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
सुनील कुमार सिंह राजद के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं और पार्टी में एक सक्रिय स्वर रखते हैं। इसके पहले भी वे विवादों में रहे हैं। उदाहरण के लिए उनके खिलाफ विधान परिषद से निष्कासन प्रस्ताव पास हुआ था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अनुपयुक्त रूप से कठोर कहा था। इस तरह का बयान आना इस समय और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतगणना से ठीक पहले है। मतगणना के समय शांतिपूर्ण वातावरण, आपूर्ति-सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता काफी मायने रखती है। विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन दोनों ने इस बयान को लेकर अपनी-अपनी राजनीति छेड़ी है। उदाहरण के लिए, सत्ताधारी गठबंधन ने इसे चुनाव प्रक्रिया पर हमला माना है, जबकि राजद ने इसे चेतावनी के रूप में बताया है।
यदि मतगणना के परिणाम प्रत्याशा के अनुरूप नहीं आए, तो इस तरह का बयान विस्फोटक परिस्थिति पैदा कर सकता है। सड़क प्रदर्शन, प्रशासन व पुलिस पर दबाव, मीडिया में हाय-तौबा। इस तरह की चेतावनी के कारण प्रशासन पहले से सतर्क हो गया है। पुलिस तैनाती, सुरक्षा-जांच बढ़ाई गई है। राजद के लिए यह मामला गलत सेंस में गया है क्योंकि बयान को भड़काऊ माना जा रहा है। यह उनके प्रतिद्वंद्वियों को बढ़ावा देता है कि वे उन्हें शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने वाला पक्ष कहें। आम जनता में यह प्रभाव पड़ सकता है कि चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे ऐसा विश्वास बढ़े। यदि इस तरह के बयान और घटनाएं बढ़ें तो चुनाव की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। है।