राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ को RSS के नाम से जाना जाता है। RSS की स्थापना के 100 साल पूरे हो रहे हैं। RSS की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बड़ा सवाल यह है कि क्या RSS अपनी स्थापना का असली मकसद हासिल कर पाया है? इस सवाल का उत्तर यह है कि पूरे 100 साल में भी RSS अपनी स्थापना का असली मकसद पूरा नहीं कर पाया है। सवाल तो यह भी है कि क्या RSS अपना असली मकसद कभी हासिल कर पाएगा ?
27 सितंबर 1925 को हुई थी RSS की स्थापना
RSS की स्थापना 27 सितंबर 1925 को भारत के नागपुर शहर में हुई थी। वर्तमान में सन 2025 चल रहा है। 27 सितंबर 2025 को RSS की स्थापना के 100 साल पूरे हो जाएंगे। स्थापना के 100 साल पूरे होने पर RSS अपना शताब्दी वर्ष पूरी धूमधाम के साथ मनाने की तैयारी कर रहा है। 100 वर्ष के सफर में RSS ने अनेक उपलब्धि हासिल की हैं। इस दौरान सबसे बड़ा सवाल यह है कि RSS ने अपनी स्थापना का असली मकसद पूरा क्यों नहीं किया? RSS की स्थापना के असली मकसद पर जाने से पहले RSS का इतिहास तथा RSS की उपलब्धि जान लेते हैं। फिर आएंगे RSS के असली मकसद पर।
विजय दशमी के पावन पर्व पर पड़ी थी RSS की नींव
RSS को दुनिया का सबसे बड़ा स्वंयसेवी संगठन माना जाता है। RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलराम हेडगेवार थे। हेडगेवार के नाम से प्रसिद्ध रहे RSS के संस्थापक ने 27 सितंबर 1925 को विजय दशमी के पर्व पर अपने घर एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में हेडगेवार के साथ विश्वनाथ केलकर, भाऊजी कावरे, अण्णा साहने, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी आदि मौजूद थे।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानि RSS नाम अस्तित्व में आने से पहले विचार मंथन हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जरीपटका मंडल और भारतोद्वारक मंडल इन तीन नामों पर विचार हुआ। बाकायदा वोटिंग हुई नाम विचार के लिए बैठक में मौजूद 26 सदस्यों में से 20 सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम के पक्ष में अपना वोट दिया, जिसके बाद RSS नाम अस्तित्व में आया। RSS का दावा है कि उसके एक करोड़ से ज्यादा प्रशिक्षित सदस्य हैं। संघ परिवार में 80 से ज्यादा समविचारी या आनुषांगिक संगठन हैं। दुनिया के करीब 40 देशों में संघ सक्रिय है। RSS
RSS का असली मकसद रह गया अधूरा
अब आते हैं RSS के असली मकसद के ऊपर। RSS की स्थापना का असली मकसद भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना था। RSS स्वयं तो भारत को हिन्दू राष्ट्र मानता तथा बोलता है किन्तु भारत अधिकारिक रूप से धर्मनिरपेक्ष देश था। भारत को अधिकारिक रूप से हिन्दू राष्ट्र बनाने का सपना लेकर RSS की स्थापना की गई थी। RSS के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने साफ-साफ कहा था कि भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना ही RSS की स्थापना का मूल उद्देश्य है। 100 साल हो गए किन्तु RSS का असली मकसद अधूरा ही बना हुआ है। भारत में RSS के समर्थकों की बड़ी संख्या है।
RSS के समर्थकों का दावा है कि RSS अपने मूल मकसद की तरफ आगे बढ़ रहा है। दूसरी तरफ भारत के आम नागरिक से लेकर राजनेता तक मानते हैं कि भारत को अधिकारिक रूप से हिन्दू राष्ट्र बनाने का RSS का सपना हमेशा सपना बनकर ही रह जाएगा। भारत ही नहीं दुनिया के तमाम लोग मानते हैं कि RSS कितना भी प्रयास कर ले अगले 100 साल में भी RSS भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का अपना सपना पूरा नहीं कर पाएगा। यह अलग बात है कि RSS ने पूरी दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बनने का बहुत बड़ा गौरव हासिल किया है। RSS की राजनीतिक शाखा भारतीय जनता पार्टी भारत पर शासन कर रही है। फिर भी RSS का असली मकसद पूरा होना असंभव की सीमा तक मुश्किल है।
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