Advertisement
Advertisement
आज का दौर सोशल मीडिया का दौर है, जहां हर छोटी-बड़ी जानकारी कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है। लोग अब खबरों, विचारों और अपडेट्स के लिए बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पर निर्भर रहने लगे हैं। इसने जहां अभिव्यक्ति को नया मंच दिया है, वहीं गलत सूचनाओं के प्रसार का खतरा भी बढ़ा दिया है।

Advertisement
RSS : आज का दौर सोशल मीडिया का दौर है, जहां हर छोटी-बड़ी जानकारी कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है। लोग अब खबरों, विचारों और अपडेट्स के लिए बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पर निर्भर रहने लगे हैं। इसने जहां अभिव्यक्ति को नया मंच दिया है, वहीं गलत सूचनाओं के प्रसार का खतरा भी बढ़ा दिया है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है। AI एक तरफ रचनात्मकता और तकनीक का नया जरिया बन रहा है, तो दूसरी तरफ इसका गलत इस्तेमाल फर्जी वीडियो, नकली बयान और भ्रामक दस्तावेज तैयार करने में भी हो रहा है। चुनावी माहौल में यही खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी इन दिनों ऐसे ही AI आधारित फर्जी वीडियो और वायरल दावों को लेकर चिंता जता रहा है। संघ ने लोगों से साफ कहा है कि किसी भी वायरल वीडियो, बयान या पत्र पर बिना जांच-पड़ताल किए भरोसा करना ठीक नहीं है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर तैयार किए गए कथित वीडियो ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है। इन वीडियो में उन्हें ऐसे बयान देते हुए दिखाया गया, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं बताया गया। समस्या यह है कि AI तकनीक अब इतनी आगे बढ़ चुकी है कि चेहरे के हावभाव, आवाज की लय और होंठों की हरकत तक इस तरह बदली जा सकती है कि आम दर्शक आसानी से धोखा खा जाए। यही वजह है कि डीपफेक अब महज तकनीकी शरारत नहीं, बल्कि जनमत को प्रभावित करने वाला एक गंभीर औजार बन चुका है। डीपफेक के असर को लेकर यह चिंता पहले भी सामने आती रही है कि सामान्य सोशल मीडिया यूजर के लिए असली और नकली कंटेंट में फर्क करना कठिन हो सकता है।
सिर्फ वीडियो ही नहीं, बल्कि RSS के नाम पर कथित लेटरहेड और फर्जी पत्र भी वायरल किए जा रहे हैं। हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोहन भागवत के नाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित बताए गए नकली पत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए, जिन्हें RSS ने फर्जी करार दिया। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सामग्री का मकसद केवल गलत सूचना फैलाना नहीं, बल्कि संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाना और राजनीतिक भ्रम पैदा करना भी है। यही कारण है कि RSS ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस तक शिकायत पहुंचाई है।
चुनाव के समय इस तरह की भ्रामक सामग्री का असर सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा होता है। उस दौरान जनता पहले ही आरोप-प्रत्यारोप, राजनीतिक संदेशों और चुनावी दावों से घिरी रहती है। ऐसे माहौल में अगर किसी बड़े संगठन या प्रमुख चेहरे के नाम पर फर्जी वीडियो या नकली दस्तावेज सामने आ जाएं, तो उनका असर बहुत तेजी से फैल सकता है। यही वजह है कि RSS के पदाधिकारियों ने लोगों से कहा है कि किसी भी सनसनीखेज वीडियो, ऑडियो या पत्र को सच मानने से पहले उसकी कई स्तर पर जांच जरूरी है।
संघ से जुड़े लोगों का मानना है कि अब राजनीतिक और वैचारिक विरोध के लिए एक नई डिजिटल प्लेबुक तैयार हो चुकी है, जिसमें AI का इस्तेमाल करके भ्रम फैलाना आसान हो गया है। पहले अफवाह फैलाने में समय लगता था, लेकिन अब कुछ ही मिनटों में किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठन के नाम पर फर्जी कंटेंट तैयार कर उसे लाखों लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। यही वजह है कि यह लड़ाई अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि तकनीकी मोर्चे पर भी आ गई है।
AI के इस दौर ने सबसे बड़ी चुनौती यह पैदा की है कि अब वीडियो या ऑडियो जैसी चीजें भी अपने आप में अंतिम सबूत नहीं मानी जा सकतीं। जो सामग्री पहले लोगों को सबसे ज्यादा विश्वसनीय लगती थी, वही आज सबसे अधिक भ्रामक साबित हो रही है। किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरा और कथित बयान को इतनी सफाई से बदला जा सकता है कि प्रशिक्षित नजर के बिना उसका फर्जी होना पकड़ना मुश्किल हो जाए। यही कारण है कि डिजिटल साक्षरता अब सिर्फ तकनीकी विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जागरूकता का हिस्सा बनती जा रही है।
डीपफेक और AI-जनित गलत सूचना का दायरा अब किसी एक संगठन तक सीमित नहीं रहा। हाल की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कई सार्वजनिक हस्तियां इस तरह के कंटेंट का शिकार बनी हैं। इससे साफ है कि यह समस्या व्यापक है और इसका असर राजनीति, समाज और सार्वजनिक भरोसे तीनों पर पड़ रहा है। इसलिए RSS की चिंता को केवल संगठनात्मक प्रतिक्रिया मानकर नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह उस बड़े संकट की ओर इशारा है जिसमें तकनीक का इस्तेमाल सच्चाई को धुंधला करने के लिए किया जा रहा है। RSS
Advertisement
Advertisement