संघ प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, हिन्दू राष्ट्र है भारत
RG Kar Case
भारत
RP Raghuvanshi
07 Oct 2024 07:34 PM
भारत
RP Raghuvanshi
07 Oct 2024 07:34 PM
RSS : राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) के सर संघ चालक मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है। RSS के स्वयं सेवकों के एक सम्मेलन में RSS के प्रमुख का यह बड़ा बयान चर्चा का विषय बन गया है। हर काई RSS प्रमुख के इस बयान की अपने-अपने ढंग से समीक्षा कर रहा है। RSS प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान हिन्दू राष्ट्र को लेकर चल रही बहस के बीच अब तक का सबसे बड़ा बयान माना जा रहा है।
क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत को हिन्दु राष्ट्र बनाने की अलग से क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत तो पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है। RSS प्रमुख ने जोर देकर कहा कि भारत पहले से ही हिन्दू राष्ट्र था, भारत हिन्दू राष्ट्र है तथा भारत हमेशा हिन्दू राष्ट्र रहेगा। आरएसएस (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने राजस्थान प्रदेश के बारां के पास धान मंडी में आयोजित RSS के स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए यह बात कही। RSS प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान की हर कोई अपने-अपने ढंग से व्याख्या तथा समीक्षा कर रहा है। समीक्षकों का कहना है कि आरएसएस (RSS) ने हिन्दुत्व के मुद्दे को अधिक धारदार बनाने का फैसला कर लिया है।
RSS प्रमुख ने हिन्दू समाज की एकजुटता पर दिया जोर
भारत को हिंदू राष्ट्र बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS ) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भाषा, जाति और क्षेत्रीय विवादों को मिटाकर हिंदू समाज को अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक ख्याति और प्रतिष्ठा एक मजबूत राष्ट्र होने के कारण है। किसी देश के प्रवासियों की सुरक्षा की गारंटी तभी होती है, जब उनकी मातृभूमि शक्तिशाली हो अन्यथा एक कमजोर देश के प्रवासियों को बाहर निकलने का आदेश दे दिया जाता है।
भागवत राजस्थान में बारां के धान मंडी मैदान में स्वयंसेवक एकत्रीकरण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है। हम यहां अनादि काल से रह रहे हैं, भले ही हिंदू उपनाम बाद में आया। हिंदू शब्द का प्रयोग भारत में रहने वाले सभी संप्रदायों के लिए किया जाता रहा है। हिंदू सभी को अपना मानते हैं और और सभी को गले लगाते हैं। हिंदू कहते हैं कि हम और आप दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं। हिंदू निरंतर संवाद के जरिये सामंजस्यपूर्ण रूप से सह- अस्तित्व में विश्वास करते हैं।
संघ प्रमुख ने कहा कि ऐसे समाज का निर्माण होना चाहिए जहां संगठन, सद्भावना और परस्पर श्रद्धा व्याप्त हो। लोगों के आचरण में अनुशासन, देश के प्रति दायित्व और उद्देश्यों के प्रति समर्पण हो। समाज का गठन केवल व्यक्तियों और उनके परिवारों से नहीं होता, समाज की व्यापक चिंताओं पर राज का विचार करके कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिक वारों से संतुष्टि प्राप्त कर सकता है। RSS