Sainik School या RMS? कौन है डिफेंस करियर के लिए बेस्ट ऑप्शन, जानें दोनों के बीच क्या है अंतर
भारत
चेतना मंच
31 Oct 2025 01:12 PM
Sainik School vs RMS difference: अगर आपका सपना देश की वर्दी पहनकर भारतीय सेना में जाने का है, तो स्कूल स्तर से ही सही दिशा में शुरुआत करना बेहद जरूरी है। भारत में दो प्रमुख प्रकार के रेजिडेंशियल स्कूल हैं जो छात्रों को डिफेंस करियर के लिए तैयार करते हैं- सैनिक स्कूल (Sainik School) और राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल (RMS)। दोनों ही स्कूलों का उद्देश्य देश को अनुशासित, शिक्षित और नेतृत्व क्षमता से भरपूर युवा तैयार करना है। लेकिन अक्सर पैरेंट्स और स्टूडेंट्स के मन में सवाल उठता है कि आखिर दोनों स्कूलों में फर्क क्या है और कौन बेहतर है? आइए जानते हैं विस्तार से।
सैनिक स्कूल- सेना के लिए अनुशासन और नेतृत्व की नींव
देश में वर्तमान में 33 प्रमुख सैनिक स्कूल हैं, जिनका संचालन रक्षा मंत्रालय के अधीन होता है। इन स्कूलों में दाखिला केवल कक्षा 6 और 9 में होता है। सैनिक स्कूलों का मकसद देश के हर राज्य से प्रतिभाशाली छात्रों को चुनकर उन्हें डिफेंस सर्विसेज के लिए प्रेरित करना है। एडमिशन के लिए हर साल ऑल इंडिया सैनिक स्कूल एंट्रेंस एग्जाम (AISSEE) आयोजित किया जाता है, जिसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कराती है।
सैनिक स्कूलों में छात्रों को न सिर्फ पढ़ाई बल्कि अनुशासन, खेलकूद और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया जाता है। ये पूरी तरह से रेजिडेंशियल स्कूल हैं, जहां बच्चे रहकर पढ़ते हैं और सेना जैसी दिनचर्या का पालन करते हैं। फीस सालाना लगभग 1.5 से 1.7 लाख रुपये तक होती है।
राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल- सैन्य परंपरा और गौरव की विरासत
राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल (RMS) देश में कुल 5 हैं - अजमेर, चैल (हिमाचल प्रदेश), धौलपुर, बैंगलोर और बेलगाम। इन स्कूलों की स्थापना देश के सैन्य परिवारों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और डिफेंस करियर के लिए दिशा देने के उद्देश्य से की गई थी। RMS में भी एडमिशन केवल कक्षा 6 और 9 में होता है, लेकिन प्रवेश परीक्षा RMS CET (कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) के जरिए होती है, जिसे स्कूल स्वयं आयोजित करते हैं।
यहां फीस सैनिक स्कूलों की तुलना में काफी कम है। सैनिक कर्मियों के बच्चों के लिए यह लगभग 12,000 से 18,000 रुपये वार्षिक होती है, जबकि आम नागरिकों के बच्चों के लिए करीब 51,000 रुपये। RMS में लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू भी लिया जाता है, जो इसे सैनिक स्कूल से अलग बनाता है।
एडमिशन, परीक्षा पैटर्न और सीट आरक्षण में अंतर
दोनों ही स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया कड़ी और प्रतिस्पर्धात्मक होती है। सैनिक स्कूलों में परीक्षा 300 अंकों की होती है और इसमें मैथ्स का हिस्सा अधिक होता है, जबकि RMS में परीक्षा 200 अंकों की होती है और अंग्रेजी विषय को पास करना अनिवार्य है। सैनिक स्कूलों में इंटरव्यू नहीं होता, जबकि RMS में इंटरव्यू होता है।
सीटों की बात करें तो सैनिक स्कूलों में 67 प्रतिशत सीटें संबंधित राज्यों के छात्रों के लिए और 33 प्रतिशत अन्य राज्यों के लिए आरक्षित रहती हैं। RMS में 70 प्रतिशत सीटें सैनिक कर्मियों के बच्चों के लिए और 30 प्रतिशत सीटें आम नागरिकों और अफसरों के बच्चों के लिए होती हैं।
कौन है डिफेंस करियर के लिए बेहतर विकल्प?
दोनों ही स्कूल डिफेंस सर्विसेज के लिए शानदार नींव तैयार करते हैं। अगर छात्र या पैरेंट्स चाहते हैं कि बच्चा बचपन से ही अनुशासन, नेतृत्व और अखिल भारतीय प्रतियोगी माहौल में विकसित हो, तो सैनिक स्कूल एक बढ़िया विकल्प है। वहीं, अगर कोई सैन्य परिवार से है या डिफेंस बैकग्राउंड रखता है, तो राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल (RMS) उनके लिए और भी उपयुक्त माना जाता है।
दोनों स्कूलों से निकलने वाले छात्र NDA (National Defence Academy) और अन्य सैन्य अकादमियों में चयन पाते हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि दोनों ही संस्थान देश के भावी अफसरों के निर्माण की मजबूत आधारशिला हैं। फर्क बस यह है कि सैनिक स्कूल व्यापक स्तर पर नागरिक छात्रों को जोड़ते हैं, जबकि RMS सैन्य परिवारों की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
सैनिक स्कूल और RMS दोनों ही भारतीय युवाओं में देशभक्ति, अनुशासन और नेतृत्व की भावना को मजबूत करते हैं। कौन बेहतर है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका लक्ष्य क्या है और आप किस तरह के वातावरण की तलाश में हैं। दोनों ही संस्थान “देश सेवा” की भावना को जीवन का हिस्सा बना देते हैं।
AISSEE 2026: सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की तारीख घोषित, मैथ्स होगा गेमचेंजर!